भारत के सबसे वरिष्ठ और सक्रिय राजनेता

भारत के वरिष्ठ और सक्रिय राजनेताओं को दर्शाती यथार्थवादी तस्वीर

भारतीय राजनीति में अनुभव और आयु का कुछ ऐसा समन्वय देखने को मिलता है, जहाँ राजनीतिक कद या प्रभाव केवल चुनावी सफलताओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि समय और उम्र के साथ धीरे-धीरे गढ़ा जाता है। दशकों के अथक और जटिल संघर्ष के बाद एक नेता वरिष्ठ नेता की श्रेणी में आता है। भारतीय लोकतंत्र के समृद्ध और प्रेरणादायक सफर में ऐसे कई राजनेता हुए जिन्होंने उम्र को अपनी राजनीतिक यात्रा का गतिरोध नहीं बनने दिया। वर्तमान में भी ऐसे कुछ राजनेता हैं जिनकी आयु 80 वर्ष की महत्वपूर्ण सीमा को पार कर चुकी है, बावजूद इसके वह राष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह सक्रिय, ऊर्जावान और प्रभावी बने हुए हैं। फिर बात जम्मू कश्मीर के कद्दावर फारुख अब्दुल्ला की हो या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की, जिन्होंने राजनीतिक संकटों व उथल-पुथल के दौर में संतुलन तथा स्थिरता बनाए रखते हुए, समाज के विभिन्न वर्गों, समुदायों तथा क्षेत्रों को एकजुट रखने की अद्भुत क्षमता दिखाई है।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति के करिश्माई और निर्विवाद फारूक अब्दुल्ला अपनी 88 वर्ष की सम्मानजनक आयु में भी क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर सबसे जोशीले, मुखर, साहसिक तथा सक्रिय नेताओं में अग्रणी तथा प्रेरक स्थान रखते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक अध्यक्ष तथा कई बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे फारूक साहब ने राज्य की सबसे जटिल, संवेदनशील तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हुए, न केवल आतंकवाद के घने अंधेरे दौर में जनता को एकजुट तथा सुरक्षित रखा, बल्कि संघीय ढाँचे तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की भी रक्षा की। फारूक अब्दुल्ला का लंबा, चुनौतीपूर्ण तथा अत्यंत प्रेरक राजनीतिक सफर यह साबित करता है कि सच्चा अनुभव, दृढ़ संकल्प तथा जनसेवा की भावना आयु के साथ और अधिक प्रखर, प्रभावी तथा जीवंत हो जाती है।  

महाराष्ट्र तथा राष्ट्रीय राजनीति के अप्रतिम, कुशल तथा आधुनिक चाणक्य शरद पवार अपनी 85 वर्ष की आयु में भी सबसे दूरदर्शी, रणनीतिक तथा प्रभावशाली नेताओं में शुमार हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के संस्थापक तथा महाराष्ट्र के चार बार मुख्यमंत्री रहे पवार साहब ने सहकारिता आंदोलन को अभूतपूर्व तथा क्राँतिकारी ऊँचाइयों तक पहुँचाकर लाखों किसानों, ग्रामीणों तथा छोटे उद्यमियों की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। केंद्र में कृषि, रक्षा, खाद्य तथा उपभोक्ता मामले जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफल तथा कुशल संचालन करते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास, सिंचाई परियोजनाओं, कृषि सुधारों तथा खाद्य सुरक्षा नीतियों को नई दिशा, तेज गति तथा ठोस आधार प्रदान किया। उनका योगदान महाराष्ट्र की समृद्धि, सहकारिता क्राँति तथा राष्ट्रीय राजनीति की स्थिरता तथा परिपक्वता के लिए सदैव याद किया जाएगा तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

सुब्रमण्यम स्वामी अपनी 86 वर्ष की आयु में भी आर्थिक नीतियों, विदेश संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दों पर सबसे बेबाक, तीक्ष्ण, बौद्धिक तथा मुखर टिप्पणीकार तथा विश्लेषक बने हुए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री स्वामी ने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में गहन, मौलिक तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर का योगदान दिया, बड़े तथा जटिल भ्रष्टाचार मामलों को कानूनी लड़ाई के माध्यम से उजागर तथा न्याय दिलाया और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव अग्रिम पंक्ति में रहे। स्वामी की निरंतर सक्रियता तथा युवा नेताओं को प्रेरित करने की क्षमता यह साबित करती है कि ज्ञान, साहस तथा दृढ़ता आयु के साथ और अधिक निखरती है, साथ ही राष्ट्र के लिए उपयोगी भी होती जाती है।  

तमिलनाडु की राजनीति के मजबूत, दृढ़ तथा सम्मानजनक स्तंभ टी.आर. बालू अपनी 84 वर्ष की आयु में भी लोकसभा में सक्रिय, प्रभावी तथा गरिमामयी भूमिका निभा रहे हैं। डीएमके के वरिष्ठ तथा निष्ठावान नेता के रूप में बालू ने कई बार केंद्रीय मंत्रालयों का सफल संचालन किया तथा पर्यावरण एवं वन, राजमार्ग, शिपिंग तथा बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दूरगामी तथा विकासोन्मुखी योगदान दिया। उनकी अटूट दृढ़ता, पार्टी के प्रति पूर्ण निष्ठा तथा जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें एक आदर्श तथा मजबूत नेता बनाता है।

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी 83 वर्ष की आयु में भी पार्टी को एकजुट करने तथा मजबूती प्रदान करने में सबसे समर्पित तथा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पिछड़े समाज से आने वाले खड़गे साहब का शांत स्वभाव, संयमित तथा विचारपूर्ण दृष्टिकोण, सामाजिक न्याय की लड़ाई को सदैव प्रेरित करता रहता है। वहीं, कांग्रेस पार्टी के ही पी. चिदंबरम अपनी 80 वर्ष की आयु में राज्यसभा सांसद तथा सक्रिय बौद्धिक टिप्पणीकार के रूप में अति सक्रिय हैं। पूर्व वित्त तथा गृह मंत्री चिदंबरम की आर्थिक नीतियां तथा सुधार भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण रहे हैं।

ये सभी वरिष्ठ तथा अनुभवी कद्दावर नेता भारतीय राजनीति के चमकते सितारे, अमर प्रतीक तथा जीवंत धरोहर कहे जा सकते हैं, जो यह साबित करते हैं कि असल राजनीतिक ताकत आयु से नहीं मापी जाती, बल्कि अनुभव की महत्वपूर्ण गहराई, जनता के प्रति अटूट समर्पण, दूरदर्शी विजन, संकटों में स्थिरता तथा राष्ट्रहित में निष्ठा से आँकी जाती है। ये नेता न केवल आज के भारत के स्तंभ हैं, बल्कि कल के भारत के लिए एक मजबूत तथा प्रेरणादायक नींव भी हैं, जिनकी छाया में हमारा लोकतंत्र और अधिक समृद्ध, समावेशी तथा मजबूत होता जाएगा।

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