रामचरित मानस की यह चौपाई बताती है कि किसी के अधीन रहना कितना बड़ा अभिशाप होता है। हमारे धर्मिक ग्रन्थ हमें बहुत सी ऐसी बातें बताते हैं, जिन्हें स्वयं अनुभव करना कोई नहीं चाहेगा। उन्हीं में से एक है, पराधीनता…. हर कोई स्वतंत्रता चाहता है फिर चाहे वह इंसान हो या पशु-पक्षी। बात जब पशु-पक्षी की चली है, तो मैं...
Continue reading...दान-पुण्य के झूठे ढकोसलें
संसार का यह नियम है, जो इस धरती पर आया है उसे एक न एक दिन अपना जीवन काल पूरा करके मृत्यु को प्राप्त करना ही है। लगभग सभी धर्मों की यह मान्यता है कि किसी के मरने के बाद उसके लिए कुछ किया जाना चाहिए। उस व्यक्ति के मरने के बाद न जाने कितनी ही वस्तुओं का दान किया...
Continue reading...बेरोजगारी की गर्त में जा रहे हैं युवा, तो फिर सरकारी नौकरियाँ कौन ले रहा..??
सरकार तो पर्याप्त नौकरियाँ दे रही है, लेकिन आज के युवा उन नौकरियों को पाने के लिए बनाए गए मापदंडों को पार कर पाने में सक्षम ही नहीं हैं बेरोजगारी एक ऐसा विषय बन गया है, जिसकी चर्चा बरसों से ज्यों की त्यों बनी रहती है, कम होने के बजाए उल्टा यह दिन-ब-दिन बढ़ती ही चली जाती है। आज के...
Continue reading...अपना दाम खोटा, परखैया का क्या दोष..?
पहले के ज़माने में लोग ‘पहला सुख निरोगी काया’ को मानते थे। पूरे दिन मेहनत-मजदूरी करने के बाद शाम को चौपाल पर बैठकर किस्से-कहानियाँ सुनाया करते थे। उस समय मोबाइल और टीवी नाम के दानव नहीं हुआ करते थे। इसलिए लोग अपना समय बातों-बातों में बड़ी-बड़ी सीख देने वालीं ज्ञान की बातें एक-दूसरे से साझा किया करते थे। वह भी...
Continue reading...क्या हम लौटने लगे हैं अपनी जड़ों की ओर?
हर दिन के नियम की तरह कल शाम जब मैं मंदिर गया, तो कुछ लेट हो गया। तब तक आरती का समय हो चला था, तो मैं वहीं रुक गया। आरती के लिए जैसे ही शंख बजा, मंदिर में मौजूद सभी लोग एक जगह जमा हो गए। और फिर शंख और घंटी की मधुर आवाज के साथ आरती शुरू हुई।...
Continue reading...इस बार चलते हैं उल्टी सैर पर..
समय के पहिए के घूमने के साथ रहन-सहन के तरीके, परम्पराओं, अन्य तौर-तरीकों और यहाँ तक कि लोगों की विचारधाराओं में भी बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। बड़े दिनों बाद कल एक परिचित के यहाँ शादी में जाना हुआ, तब मैंने यह बात गौर की, कि समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है.. बड़ा ही शानदार माहौल था।...
Continue reading...गरीबी का ब्रांड
ब्रांड वह शब्द है, जिसने दुनियाभर में तहलका मचा रखा है। यह सिर्फ एक लेबल नहीं है; यह एक धारणा है, जो हमारे विचारों को प्रभावित करती है। आज की दुनिया में हर कोई ब्रांडेड सामान की तलाश में रहता है। चाहे वह कपड़ा, खाना, इलेक्ट्रॉनिक्स या कोई अन्य दैनिक आवश्यकता की चीज़ हो, हर चीज़ को खरीदने से पहले...
Continue reading...मेरा काम ही मेरी पहचान है….
एक शाम मैं अपने घर की बालकनी में अपने कुछ मित्रों के साथ बैठा था कि अचानक तेज बारिश आ गई। सुहावनी शाम और तेज बारिश में याद आई गरमा-गर्म चाय और पकौड़ों की.. बात जब पकौड़ों की चली, तो हर कोई शहर में सबसे स्वादिष्ट पकौड़े कहाँ मिलते हैं, इस पर अपनी राय परोसने लगा.. कोई कहता कि पकौड़े...
Continue reading...लोगों का भला भी करते चलें..
जीवन की आपाधापी में ऐसे न जाने कितने ही काम हैं, जो बेशक हमें जिम्मेदारी के साथ करने होते हैं, लेकिन हमारी शान-ओ-शौकत के नीचे कुचलकर वे दम तोड़ देते हैं.. आलिशान बंगले, महँगी गाड़ियाँ, संभाले न संभले ऐसी धन-दौलत, नाम, रुतबा और भी न जाने कितने ही भारी-भरकम शब्द घोंट देते हैं गला उन लोगों का, जिनके जीवन के...
Continue reading...कठिनाइयों के बीच खड़ी उम्मीद……
शहर की हलचल भरी सड़कों पर, हॉर्न बजाते शोर और तेज़ कदमों की आवाज़ के बीच, हमारे दैनिक जीवन के गुमनाम नायक मौजूद होते हैं। ये लोग, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है और कम ही सराहा जाता है, हमारे शहरी जीवन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। फिर भी, उनकी चुनौतियों और बाधाओं से भरी यात्रा पर शायद ही कभी...
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