किसने बनाए हैं ‘जूठन’ और ‘उतरन’ जैसे शब्द?

झुग्गी बस्ती के बाहर बैठा भूखा बच्चा कूड़े के पास रखा बचा हुआ खाना देखता हुआ

लम्बे समय की सेविंग के बाद पिछले महीने ही अपने लिए इतना महँगा शर्ट खरीदा था, इतनी जल्दी यह मुझे छोटा होने लगा है, एक काम करता हूँ किसी को दे देता हूँ.. आज फिर माँ ने टिफिन में दो रोटी ज्यादा रख दी, यह फिर फेंकने में जाएगी, किसी को दे देता हूँ.. यह जो हमारे द्वारा अपने कपड़ों...

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तोड़ देगी भारत को गरीबी एक दिन

भारतीय युवा नेता संविधान के स्वर्ण द्वार के सामने ज्ञान की कुंजी पकड़े हुए – राष्ट्र निर्माण का प्रतीक

बात करे हैं कामयाबी की दास्तां सुनाएँ क्या गरीबी की भूखा तरसे खाने के एक निवाले को नमन है भारत के ऐसे विकास निराले कोविभिन्न देशों की स्थिति-परिस्थिति यानि आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उन्हें दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है: एक विकसित और एक विकासशील। निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को आमतौर पर विकासशील देश कहा जाता...

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‘मैं’ सिर्फ एक शरीर तक सीमित नहीं

कुहासे भरी सुबह में शांत भाव से बैठे साधु, आत्मा और शरीर से परे चेतना का प्रतीक

सर्दियों की एक शांत-सी सुबह में, मुझे अपने विचारों के साथ कुछ सुखद पल खुद के साथ बिताने का सुअवसर मिला। चारों ओर कुहासा पसरा था, जैसे समय खुद किसी तपस्वी की तरह मौन साधे बैठा हो। मन उसी मौन में कहीं भीतर उतर गया था कि तभी एक प्रसंग की बेशकीमती स्मृति मेरे मन में दस्तक देती है, जो...

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शुरुआत कहाँ से करें?

कमज़ोरी से ताकत की ओर बढ़ता भारतीय युवक, अंधेरी सुरंग से उजाले की ओर चलता हुआ

शुरुआत कहाँ से करें? शायद वहीं से जहाँ हम अक्सर ठिठक जाते हैं.. शायद वहीं से, जहाँ पहली बार किसी की बात ने भीतर तक चुभा दिया था, और हम चुपचाप मुस्कुरा दिए थे, ताकि किसी को महसूस न हो कि भीतर तक सब कुछ हिल चुका है। जहाँ हम पहली बार कमज़ोर कहे गए थे और हमने ऊपर से...

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शब्दों में शक्ति तभी होगी, जब सोच में गहराई होगी.. 

बालकनी में चाय और किताब के साथ विचारमग्न भारतीय लेखक

“एक लेखक की सबसे बड़ी पूँजी उसकी सोच होती है। शब्द तो केवल उस सोच का माध्यम होते हैं।”  एक शाम मैं अपनी बालकनी में सुकून से बैठा था। बड़े दिनों बाद ऐसा मौका मिला था, जब हाथ में एक बढ़िया किताब और पास में गर्मागर्म चाय थी। लेखक ने किताब में अपनी विचारधारा को कुछ इस तरह पिरोया था...

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भाग्यशाली मैं….

मोबाइल पर लगातार व्हाट्सऐप फॉरवर्ड देखते हुए मुस्कुराता हुआ भारतीय व्यक्ति

आजकल जीवन जीने का ढंग किसी राजा महाराजा जैसा हो गया है। जब से स्मार्ट फोन लिया है एक अलग ही अनुभूति होती है। सुबह उठते ही न जाने कितने गुड मॉर्निंग और सुप्रभात के मैसेज राह देखते हैं, जैसे मेरी प्रभात के शुभ हुए बिना तो मेरे मित्रों का दिन ही नहीं निकलेगा। फिर इतनी इज्जत पाकर जो अनुभूति...

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और सब बढ़िया…..!

मुस्कुराता हुआ भारतीय व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच दिखाते हुए

सुख और दुःख, हमारे जीवन के दो पहिए हैं, दोनों की धुरी पर ही जीवन की गाड़ी चलती है। जीवन में जितना सुख आता है, उतना ही दुःख भी आता है। फिर भी हम सुख का स्वागत तो खुले दिल से करते हैं, लेकिन दुःख का नहीं….। जबकि हम भी जानते हैं कि जीवन में यदि सुख है, तो दुःख...

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आप ही हैं अपने मददगार

अकेला व्यक्ति सूर्योदय के समय पहाड़ी पर खड़ा आत्मविश्वास के साथ आगे देखता हुआ

खुद में वह बदलाव लाएँ, जिसकी अपेक्षा आप दूसरों से कर रहे हैं….  जीवन एक ऐसी अनोखी पाठशाला है, जहाँ हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। यह पाठशाला एक आम पाठशाला की तरह ही समय-समय पर परीक्षाएँ लेती है। और तो और आपकी मेहनत के अनुसार ही आपको अच्छे या बुरे परिणाम देती है। एक सामान्य पाठशाला...

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अनोखा इलाज..

मोबाइल पर यूट्यूब देखते हुए पेट पकड़कर बैठा व्यक्ति

एक दिन पेट में दर्द-सा हुआ। उस दिन घर में कोई था नहीं और मुझे दवाइयाँ मिली नहीं और बाहर जाकर लाने की मेरी हिम्मत नहीं थी। सोचा कोई घरेलु नुस्खा ही अपनाया जाए। लेकिन क्या..? मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं। तभी मन में ख्याल आया कि क्यों न यूट्यूब से ही कोई नुस्खा निकाला जाए। जैसे ही यूट्यूब पर...

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जो टूटते हैं, उनमें ही तो कला होती है फिर से जुड़ जाने की

एक विचारशील व्यक्ति श्मशान के किनारे खड़ा, जीवन की अनमोलता और मृत्यु की अनिवार्यता को समझते हुए।

सर्दियों की एक ठंडी शाम थी। हवा में धूप का स्वाद घुला हुआ था, और पेड़ों की छाँव किसी बूढ़े संत की तरह स्थिर बैठी थी। समय जैसे चल नहीं रहा था, बस रुक गया था उस पल में, उस मौन में, जिसे कोई देख तो नहीं सकता, लेकिन महसूस जरूर कर सकता है। मैं पार्क के एक कोने में...

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