‘मैं’ सिर्फ एक शरीर तक सीमित नहीं

कुहासे भरी सुबह में शांत भाव से बैठे साधु, आत्मा और शरीर से परे चेतना का प्रतीक

सर्दियों की एक शांत-सी सुबह में, मुझे अपने विचारों के साथ कुछ सुखद पल खुद के साथ बिताने का सुअवसर मिला। चारों ओर कुहासा पसरा था, जैसे समय खुद किसी तपस्वी की तरह मौन साधे बैठा हो। मन उसी मौन में कहीं भीतर उतर गया था कि तभी एक प्रसंग की बेशकीमती स्मृति मेरे मन में दस्तक देती है, जो...

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शुरुआत कहाँ से करें?

कमज़ोरी से ताकत की ओर बढ़ता भारतीय युवक, अंधेरी सुरंग से उजाले की ओर चलता हुआ

शुरुआत कहाँ से करें? शायद वहीं से जहाँ हम अक्सर ठिठक जाते हैं.. शायद वहीं से, जहाँ पहली बार किसी की बात ने भीतर तक चुभा दिया था, और हम चुपचाप मुस्कुरा दिए थे, ताकि किसी को महसूस न हो कि भीतर तक सब कुछ हिल चुका है। जहाँ हम पहली बार कमज़ोर कहे गए थे और हमने ऊपर से...

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शब्दों में शक्ति तभी होगी, जब सोच में गहराई होगी.. 

बालकनी में चाय और किताब के साथ विचारमग्न भारतीय लेखक

“एक लेखक की सबसे बड़ी पूँजी उसकी सोच होती है। शब्द तो केवल उस सोच का माध्यम होते हैं।”  एक शाम मैं अपनी बालकनी में सुकून से बैठा था। बड़े दिनों बाद ऐसा मौका मिला था, जब हाथ में एक बढ़िया किताब और पास में गर्मागर्म चाय थी। लेखक ने किताब में अपनी विचारधारा को कुछ इस तरह पिरोया था...

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भाग्यशाली मैं….

मोबाइल पर लगातार व्हाट्सऐप फॉरवर्ड देखते हुए मुस्कुराता हुआ भारतीय व्यक्ति

आजकल जीवन जीने का ढंग किसी राजा महाराजा जैसा हो गया है। जब से स्मार्ट फोन लिया है एक अलग ही अनुभूति होती है। सुबह उठते ही न जाने कितने गुड मॉर्निंग और सुप्रभात के मैसेज राह देखते हैं, जैसे मेरी प्रभात के शुभ हुए बिना तो मेरे मित्रों का दिन ही नहीं निकलेगा। फिर इतनी इज्जत पाकर जो अनुभूति...

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और सब बढ़िया…..!

मुस्कुराता हुआ भारतीय व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच दिखाते हुए

सुख और दुःख, हमारे जीवन के दो पहिए हैं, दोनों की धुरी पर ही जीवन की गाड़ी चलती है। जीवन में जितना सुख आता है, उतना ही दुःख भी आता है। फिर भी हम सुख का स्वागत तो खुले दिल से करते हैं, लेकिन दुःख का नहीं….। जबकि हम भी जानते हैं कि जीवन में यदि सुख है, तो दुःख...

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आप ही हैं अपने मददगार

अकेला व्यक्ति सूर्योदय के समय पहाड़ी पर खड़ा आत्मविश्वास के साथ आगे देखता हुआ

खुद में वह बदलाव लाएँ, जिसकी अपेक्षा आप दूसरों से कर रहे हैं….  जीवन एक ऐसी अनोखी पाठशाला है, जहाँ हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। यह पाठशाला एक आम पाठशाला की तरह ही समय-समय पर परीक्षाएँ लेती है। और तो और आपकी मेहनत के अनुसार ही आपको अच्छे या बुरे परिणाम देती है। एक सामान्य पाठशाला...

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अनोखा इलाज..

मोबाइल पर यूट्यूब देखते हुए पेट पकड़कर बैठा व्यक्ति

एक दिन पेट में दर्द-सा हुआ। उस दिन घर में कोई था नहीं और मुझे दवाइयाँ मिली नहीं और बाहर जाकर लाने की मेरी हिम्मत नहीं थी। सोचा कोई घरेलु नुस्खा ही अपनाया जाए। लेकिन क्या..? मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं। तभी मन में ख्याल आया कि क्यों न यूट्यूब से ही कोई नुस्खा निकाला जाए। जैसे ही यूट्यूब पर...

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जो टूटते हैं, उनमें ही तो कला होती है फिर से जुड़ जाने की

एक विचारशील व्यक्ति श्मशान के किनारे खड़ा, जीवन की अनमोलता और मृत्यु की अनिवार्यता को समझते हुए।

सर्दियों की एक ठंडी शाम थी। हवा में धूप का स्वाद घुला हुआ था, और पेड़ों की छाँव किसी बूढ़े संत की तरह स्थिर बैठी थी। समय जैसे चल नहीं रहा था, बस रुक गया था उस पल में, उस मौन में, जिसे कोई देख तो नहीं सकता, लेकिन महसूस जरूर कर सकता है। मैं पार्क के एक कोने में...

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आदत आदत की बात है

सुबह दौड़ लगाता एक भारतीय सैनिक और छाया में बदलता विद्रोही चेहरा

अच्छी आदतों से ‘शक्ति’ का जन्म होता है और बुरी आदतों से ‘बर्बादी’ का आदत.. यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक शक्ति है, जो इंसान को ऊँचाइयों तक ले जा भी सकती है और उसे बर्बादी के गहरे गर्त में धकेल भी सकती है। सच तो यह है कि आदतें ही हमें इंसान बनाती हैं, और आदतें ही हमें...

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मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

सूखे खेत में खड़ा मेहनती किसान आसमान की ओर देखता हुआ

एक किसान की कहानी है। सूखे की वजह से बार-बार उसकी फसल नष्ट हो जाती थी। गाँव के लोग अक्सर उसे ताने दिया करते थे.. तू खेती करता है, इसलिए ही तेरे खेत में बार-बार सूखा पड़ता है। तू खेती छोड़ दे, भगवान तुझे नहीं देख रहा.. कई साल वही ताने सुनते-सुनते गुज़र गए.. हर साल वह बुआई करता.. खूब...

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