मजबूरियों में दम तोड़ता बचपन….

बस स्टैंड पर पेन बेचता गरीब भारतीय बच्चा

एक सर्द सुबह बस स्टेशन पर बैठा मैं अपनी बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी दो छोटे बच्चे मेरे पास आए। उनकी मासूम आँखों में थकान और समस्याओं से जूझते बचपन की कहानी साफ झलक रही थी। उनके नन्हें हाथों में पेन के कुछ पैकेट थे। वे मेरे पास आए और मुझसे पेन खरीदने की गुजारिश करने लगे। उनकी...

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गरीबी: स्थिति या मानसिक सोच?

गरीबी की मानसिकता में फंसा भारतीय युवक सोच में डूबा हुआ

गरीबी, हमारे देश में एक ऐसी समस्या है, जिसे खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा प्रयास किए गए। इसके लिए हर प्रकार की योजनाएँ, कार्यक्रम और अभियान चलाए गए, फिर भी इस समस्या से छुटकारा नहीं पाया जा सका। इसका एक कारण यह है कि इस समस्या को केवल एक आर्थिक स्थिति मानकर ही इसका हल खोजा जाता रहा, जबकि...

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गरीबी और अशिक्षा का भंवर

गरीबी और अशिक्षा से जूझते भारतीय झुग्गी बस्ती के बच्चे

विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भी आज देश में आन्तरिक तौर पर देखा जाए, तो हजारों समस्याएँ देखने को मिल जाएँगी। कहने को तो हम आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुके हैं, लेकिन आज भी देश में करीब 53 करोड़ लोग गरीबी और अभाव का जीवन जी रहे हैं, आज देश में जितने...

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मजाल है कि टस से मस हो जाए गरीबी

भारत की झुग्गी बस्ती में बैठा गरीब मजदूर परिवार गरीबी की वास्तविकता दर्शाता हुआ

‘भारत में गरीबी’ एक ऐसा विषय है, जिस पर आज भी बात की जाती है। यह सोचने वाली बात है कि दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करने के बाद भी हम गरीब देशों की रेस से बाहर नहीं आ पा रहे हैं, या फिर यूँ कह लें कि इस तराजू में बैठना हमें इतना भा रहा है कि अब...

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गरीब का सामना संघर्ष से ही क्यों?

कुएँ से पानी लाती ग्रामीण गरीब महिला और उसके साथ बच्चे

कल्पना कीजिए एक माँ की, जो एक छोटे-से गाँव में रहती है। दिन भर की भागदौड़ से हुई थकान की वजह से सुबह उठने में कहीं देर न हो जाए, इस वजह से सारी रात खिड़की की संद से रोशनी के आने के इंतज़ार में बिता देती है। हर दिन तड़के उठकर, उसकी पहली चिंता होती है अपने परिवार के...

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तमाम तथ्यों में से सत्य माना किसे जाए?

भारत में गरीबी के विरोधाभासी आँकड़े दिखाता एक चार्ट और सोच में डूबा व्यक्ति

इंटरनेट पर गरीबी की खबरों और इससे जुड़े आँकड़ों की बाढ़ आई पड़ी है। कुछ खबरें दावा करती हैं कि भारत से गरीबी बीते कुछ सालों या दशकों में अच्छी खासी मात्रा में कम हुई है, जबकि कुछ खबरें लम्बे-चौड़े आँकड़ों के साथ इस बात की पुष्टि करती हैं कि देश से भुखमरी गुड़ पर मक्खी की तरह चिपकी बैठी...

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माथे पर मक्कारी का ठप्पा लगातीं सरकारी योजनाएँ

सरकारी योजनाओं के पोस्टर के सामने सोचता हुआ भारतीय व्यक्ति

मदद एक हद तक ही अच्छी लगती है, यदि बार-बार और लगातार मदद मिलती रहे, तो मदद लेने वाला व्यक्ति इसका आदी बन जाता है। उसमें काम करने की लगन का गला तो घुटने लगता ही है, साथ ही साथ मक्कारी का ठप्पा भी उस व्यक्ति के माथे पर लग जाता है। भारत सरकार जरूरतमंदों को राहत देने के उद्देश्य...

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अज्ञानी पर ही सदा, करे गरीबी वार…..

दीपक की रोशनी में पढ़ता भारतीय बच्चा – शिक्षा से गरीबी का अंत

क्या आपने कभी सोचा है बचपन में हमें अ से ज्ञ ही क्यों सिखाया गया, ज्ञ को पहले अ को बाद में क्यों नहीं सिखाया गया? दरअसल अ से ज्ञ तक पढ़ना, अज्ञान से ज्ञानी बनाने तक का पूरा सफर है। इस बात को समझने में लोगों की पूरी उम्र निकल जाती है और कई बार उम्र निकलने के बाद...

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पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं…….

पिंजरे में कैद उदास पक्षी और पास खड़ी खुली आसमान की रोशनी

रामचरित मानस की यह चौपाई बताती है कि किसी के अधीन रहना कितना बड़ा अभिशाप होता है। हमारे धर्मिक ग्रन्थ हमें बहुत सी ऐसी बातें बताते हैं, जिन्हें स्वयं अनुभव करना कोई नहीं चाहेगा। उन्हीं में से एक है, पराधीनता…. हर कोई स्वतंत्रता चाहता है फिर चाहे वह इंसान हो या पशु-पक्षी। बात जब पशु-पक्षी की चली है, तो मैं...

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दान-पुण्य के झूठे ढकोसलें

घर में अकेले बैठे बुज़ुर्ग माता-पिता जिन्हें उनके बच्चे समय नहीं दे रहे

संसार का यह नियम है, जो इस धरती पर आया है उसे एक न एक दिन अपना जीवन काल पूरा करके मृत्यु को प्राप्त करना ही है। लगभग सभी धर्मों की यह मान्यता है कि किसी के मरने के बाद उसके लिए कुछ किया जाना चाहिए। उस व्यक्ति के मरने के बाद न जाने कितनी ही वस्तुओं का दान किया...

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