दुनियादारी की होड़ में अब दया भी बिकाऊ

भारतीय शहर की सड़क पर भूखे मासूम भाई-बहन को दिखाता भावनात्मक दृश्य

दो मासूम.. एक की उम्र लगभग 5 या 6 वर्ष.. और एक की मुश्किल से 1 वर्ष.. शरीर पर आधे-अधूरे कपड़े.. चेहरे पर बेबसी.. आँसूओं से लबालब भीगी हुईं आँखें.. एक नहीं, दोनों की.. कौड़ियों के दाम बिकता बचपन.. भूख की असहनीय पीड़ा.. तड़प रोटी की.. अपनी उम्र से लगभग 50 वर्ष अधिक जी लेने वाला वह 5 वर्षीय बच्चा...

Continue reading...

एक भूखी भूख..

भारतीय झुग्गी बस्ती में भूख से बेहाल एक बच्ची अपने भाई की गोद में लेटी हुई

जब भी जोरों की भूख लगती है और खाना बनने में तनिक भी देरी होती है, तो थाली-चम्मच पीटने की आवाज़ से पूरा घर गूँज उठता है, “मम्मी-मम्मी खाना दो..” और फिर क्या, कुछ ही देर में उस थाली में माँ रूपी फरिश्ता गर्म-गर्म खाना परोस देता है और इतना ही नहीं, बड़े ही प्रेम से अपने बच्चों और पूरे...

Continue reading...

थाली से नाली तक का सफर

शादी समारोह में प्लेट में छोड़ा गया खाना और पास में डस्टबिन, भारत में भोजन की बर्बादी को दर्शाता दृश्य

शान दिखाना नहीं, बल्कि पेट भरना है भोजन का असली मतलब भारत, एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ किसानों के श्रम और समर्पण से लाखों-करोड़ों लोगों को भर पेट भोजन मिलता है। सही मायने में किसान हमारे देश की रीढ़ हैं, जो अपने खून-पसीने से अपने जीवन के दिन-रात एक करके अन्न उगाते हैं। सिर्फ इसलिए, ताकि हम भूखे न...

Continue reading...

छोटा-सा योगदान भी बड़े मायने रखता है…

भारतीय समाज में गरीब बच्चों को शिक्षा देते लोग, जो छोटे योगदान से बड़े बदलाव का संदेश देते हैं

आज सुबह से ही हल्की-हल्की बारिश हो रही है, और हो भी क्यों न बरसात का मौसम जो चल रहा है। यह मौसम अक्सर लोगों को बड़ा पसंद होता है, क्योंकि इस समय धरती हरियाली की चादर ओढ़े, पेड़-पौधों पर आई नई पत्तियाँ खुशी से झूमती हुई, बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। इस लुभावने मौसम और...

Continue reading...

गरीबी या मक्कारी?

भारतीय झुग्गी बस्ती में मुफ्त सरकारी योजनाओं के बावजूद गरीबी में रहने का चुनाव करता परिवार

गरीबी एक ऐसा शब्द है, जो सुनने में जितना साधारण लगता है, वास्तविकता में उतना ही भयावह और गंभीर है। यह एक ऐसी सामाजिक बुराई है, जिसने न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि पूरे समाज, देश और यहाँ तक की वैश्विक स्तर पर मानवता को जकड़ रखा है। गरीबी को सही मायनों में एक अभिशाप कहा जाए, तो यह कोई अतिशयोक्ति...

Continue reading...

फायदेमंद गरीबी

एक भारतीय शहर की झुग्गी के पास गरीब और धनी लोगों का अंतर दिखाता दृश्य, जिसमें कोई व्यक्ति झूठा गरीब होने का दिखावा कर रहा हो।

एक समय था जब स्वयं को गरीब बताना हीन भावना को जन्म देता था, लेकिन अब स्वयं को गरीब दर्शाना फायदेमंद हो गया है…. स्वतंत्रता के बाद देश में जातिगत भेदभाव और गरीबी से उत्थान के लिए छात्रवृत्ति, अनुदान और विभिन्न योजनाओं इत्यादि के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएँ लागू कीं, ताकि पिछड़े...

Continue reading...

आपके मायने में आशियाने की परिभाषा क्या?

बालकनी में गोरैया का घोंसला बनाने वाली जोड़ी और शहर में गरीबों के अस्थायी आशियाने, मानव और प्रकृति की मेहनत का प्रतीक।

अपना काम बनता,भाड़ में जाए जनता….. शाम का समय, गोधूलि बेला में घर की बालकनी में बैठकर चाय की चुस्कियाँ लेने का जो आनंद है, उसे शब्दों में बयाँ कर पाना मुश्किल है। मेरा पेड़-पौधों और खुले वातावरण से विशेष लगाव है, इसलिए मैं अक्सर शाम का समय घर की बालकनी में ही बिताता हूँ। एक शाम मैं बालकनी में...

Continue reading...

सड़कें न हो गरीबों का घर……

सड़क किनारे कंबल में लिपटे बेघर परिवार के साथ छोटे बच्चे – शहरी गरीबी की सच्ची तस्वीर

हमारे शहरों के हर कोने में, जहाँ पर जीवन एक अलग लय में बहता है और जहाँ सपनों को उड़ने के लिए पंख मिलते हैं, इसके पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शहरी गरीब, जो शहर को जीवित रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, उन्हें जीवन की बुनियादी जरूरतों के बिना खुद...

Continue reading...

किसने बनाए हैं ‘जूठन’ और ‘उतरन’ जैसे शब्द?

झुग्गी बस्ती के बाहर बैठा भूखा बच्चा कूड़े के पास रखा बचा हुआ खाना देखता हुआ

लम्बे समय की सेविंग के बाद पिछले महीने ही अपने लिए इतना महँगा शर्ट खरीदा था, इतनी जल्दी यह मुझे छोटा होने लगा है, एक काम करता हूँ किसी को दे देता हूँ.. आज फिर माँ ने टिफिन में दो रोटी ज्यादा रख दी, यह फिर फेंकने में जाएगी, किसी को दे देता हूँ.. यह जो हमारे द्वारा अपने कपड़ों...

Continue reading...

तोड़ देगी भारत को गरीबी एक दिन

भारतीय युवा नेता संविधान के स्वर्ण द्वार के सामने ज्ञान की कुंजी पकड़े हुए – राष्ट्र निर्माण का प्रतीक

बात करे हैं कामयाबी की दास्तां सुनाएँ क्या गरीबी की भूखा तरसे खाने के एक निवाले को नमन है भारत के ऐसे विकास निराले कोविभिन्न देशों की स्थिति-परिस्थिति यानि आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उन्हें दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है: एक विकसित और एक विकासशील। निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को आमतौर पर विकासशील देश कहा जाता...

Continue reading...