बिना सज़ा के ही सज़ा काट रहे हैं विचाराधीन कैदी..

भारतीय जेल में सलाखों के पीछे बैठा विचाराधीन कैदी न्याय का इंतजार करता हुआ

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ हर किसी को स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है। भारत के संविधान और न्यायपालिका का भी यही मानना है कि भले ही कोई अपराधी सज़ा पाने से बच जाए, लेकिन किसी बेगुनाह को सज़ा न हो। लेकिन, विडंबना यह है कि इस लोकतांत्रिक और न्यायप्रिय देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपना...

Continue reading...

अब जरुरत, जेलों को बनाया जाए

भारतीय जेल में कौशल प्रशिक्षण लेते कैदी, सुधारगृह की आवश्यकता दर्शाता दृश्य

बिगाड़गृह से सुधारगृह आज की जेलें: सुधारगृह या बिगाड़गृह? प्राचीन समय में किसी अपराधी के लिए कारावास की सज़ा को जरुरी माना जाता था। उसके पीछे तर्क यह था कि कैदियों को एकांत कारावास में रखने से उन्हें आत्म-मंथन का मौका मिले, जिससे अपराधियों में सुधार आए। हिंदू और मुगल शासन के दौरान, अपराधियों को कड़ी निगरानी में रखा जाता...

Continue reading...

एक गुनाह की कितनी सज़ा?

भारतीय जेल में उत्पीड़ित युवक, अपराध की सज़ा से अधिक पीड़ा झेलता कैदी

समाज की दिखावटी सुविधाओं की ऊँची-ऊँची दीवारों के पीछे, दर्द और पीड़ा की एक छिपी हुई दुनिया है। यह दुनिया है जेल के कैदियों की, जो एक गलती के लिए सज़ा के अंतहीन चक्र में फंसे हुए हैं। समाज के मायने में एक अपराध के लिए एक ही सज़ा होती है। हमें भी बस इतना ही दिखता है कि किसी...

Continue reading...

जिंदगियों को खत्म करता अपराध का जाल..

भीड़भाड़ वाली भारतीय जेल की कोठरी में खड़े निराश कैदी, जो अपराध के दुष्चक्र में फँसी जिंदगियों को दर्शाते हैं।

उभरते हुए भारत की एक अनदेखी वास्तविकता है भारतीय जेलों की दमनकारी दुनिया…. जेलों की शुरुआत करने का मूल उद्देश्य सुधार और पुनर्वास करना था, लेकिन दुःखद रूप से यह अपराध को जन्म देने वाले केंद्र में तब्दील हो चुकी हैं। ऊँची-ऊँची दीवारों के भीतर की परिस्थितियाँ न केवल आपराधिक व्यवहार को कायम रखती हैं, बल्कि लोगों को अपराध के...

Continue reading...

समाज के लिए नुकसानदेह 50 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों के पुनर्वास और कल्याण की नज़रअंदाजगी

जेल से रिहा हुए 50 वर्ष से अधिक उम्र के भारतीय कैदी, जिनका समाज में पुनर्वास और भविष्य अनिश्चित है।

एनसीआरबी के आँकड़ों के अनुसार भारतीय जेलों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के 73 हजार से ज्यादा कैदी हैं। ऐसे कैदियों की स्थिति और उनकी रिहाई के बाद का जीवन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर जेल प्रशासन और केंद्र सरकार को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आज के समय में, जब भारत सामाजिक न्याय और समावेशी विकास...

Continue reading...

क्या सच में पढ़ाई से ज्यादा जरुरी है शादी?

भारतीय परिवार जो शिक्षा बनाम महंगी शादी पर विचार कर रहा है, शिक्षा के महत्व को दर्शाते हुए

कुछ समय पहले गुजरात के जामनगर में हुए एक भव्य आयोजन की चर्चा आपने जरूर सुनी होगी। देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के बेटे की प्री-वेडिंग सेरेमनी थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन पर करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हुए। हमारे देश में अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि फलाने की शादी...

Continue reading...

जेल: एक अनकही यूनिवर्सिटी में बुलंद होते

जेल की सलाखों के पीछे आत्मविश्वास से खड़ा एक कुख्यात भारतीय अपराधी, जो जेल को अपराध की अनकही यूनिवर्सिटी के रूप में दर्शाता है।

नामी क्रिमिनल्स के हौंसले जेल एक अनोखी यूनिवर्सिटी है। जेल एक कैदी को इतना सिखा देती है कि हम और आप उस बारे में सोच भी नहीं सकते। अगर यूँ कहा जाए कि जेल, जिंदगी की भूख बढ़ा देती है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा। आप हर एक चीज़ के लिए भूखे होते हैं। आईपीएस दिनेश एमएन, जिन्होंने...

Continue reading...

कैदी के गुनाहों का दोषी कौन?

चिंतित भारतीय माता-पिता, एक समस्याग्रस्त किशोर को सही मार्ग दिखाते हुए, किशोर अपराध की रोकथाम का प्रतीक

गलती हर इंसान से होती है, बचपन में गलती करने पर बच्चे को बेशक एहसास नहीं होता कि उसने आखिर किया क्या है, लेकिन गाल पर लगा जोरदार तमाचा इतना डर तो बैठा ही जाता है कि यह काम दोबारा नहीं करना है, क्योंकि यदि किया, तो फिर से मार घल जाएगी। मेरी नज़रों में सुधार के लिए मारी गई...

Continue reading...

दूसरा मौका सभी के लिए महत्वपूर्ण

ग्रामीण छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए भारतीय शिक्षक, गुरु–शिष्य परंपरा का प्रतीक

कितना अच्छा लगता है न, जब एक बार असफल होने के बाद, सफलता पाने के लिए दूसरा मौका मिल जाए। व्यक्ति हमेशा अपने अनुभव से कुछ न कुछ सीखता रहता है। मैंने अक्सर देखा है कि कहीं भी हमें यदि दूसरा मौका मिलता है, तो हम पहले से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। मैं यहाँ मेले में खेले जाने वाला निशानेबाजी...

Continue reading...

पाठ्यक्रम के साथ पाठशाला का रास्ता

कमज़ोर बुनियादी ढाँचे को दर्शाता, कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाते ग्रामीण भारतीय बच्चे

सुगम होना भी जरुरी जैसा कि आप सभी जानते हैं, देश की शिक्षा नीति में लगभग 34 वर्ष बाद परिवर्तन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और शैक्षणिक ढाँचे को मजबूत बनाना है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और छात्र परिणामों पर विशेष बल दिया गया है, जिससे छात्रों के बीच एकाग्रता, सहयोग...

Continue reading...