हर निवाले की बचत जरुरी….

हर निवाले की बचत जरूरी

“भोजन का सही सम्मान उसकी बर्बादी न करके और उसे प्रेम से ग्रहण करके किया जाता है।” भूख हमारे देश की एक बड़ी समस्या है, जिससे आजादी के 78 सालों बाद भी हम पूरी तरह निजात नहीं पा सके हैं। हमारे देश में रोज करीब 20 करोड़ लोग भूखे सोने को मजबूर हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, हर दिन...

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मौन पीड़ाओं की नज़रअंदाजी..

मौन पीड़ाओं की अनदेखी

हमारे शहरों की हलचल भरी सड़कों पर, हॉर्न बजाती कारों के शोर और भागदौड़ के बीच, हम अक्सर ऐसे लोगों की खामोश चीखें सुनते हैं, जो हर दिन जीवन के लिए संघर्ष करते हैं। कभी रास्तों पर हमें बुजुर्ग पुरुष और महिलाएँ, कमजोर और समय से थके हुए, हाथ फैलाकर बैठे मिलते हैं। कभी खोखली आँखों वाले बच्चे, अपने छोटे-छोटे...

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बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख

भारत में असमान बचपन की सच्चाई

बचपन जीवन का सबसे खूबसूरत दौर होता है। बचपन के वो खेल-खिलौने, वो यार-दोस्त ही तो जीवनभर की मीठी याद बन जाते हैं, जो जीवन के कठिन दौर में भी कभी याद आ जाए, तो मन को थोड़ा सुकून और चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान दे जाती है। लेकिन, बचपन की मासूमियत और उसकी मिठास का एहसास हर किसी के नसीब...

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एक अनदेखा संकट….

भारत में बच्चों का कुपोषण संकट

हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहाँ का हर कोना खान-पान की एक संपन्न विरासत लिए हुए है। एक ऐसा देश, जहाँ कहीं आपको मसालों की सुगंध मिलेगी, तो कही हवाओं में मिठास घुली होगी। अलग-अलग कोने में अलग-अलग जायका मिलेगा। यह खान-पान तो हमारी पहचान है, लेकिन खाने के शौकीन इस देश की एक सच्चाई और है, जहाँ...

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इंसानियत की समझ से परे टीस भूख की

भूख की टीस – इंसान, जानवर और पक्षी

भूख और भुखमरी ये ऐसे मुद्दे हैं, जो हमें हमारी इंसानियत की गहराइयों में झाँकने पर मजबूर करते हैं। जब हमारा अपना बच्चा भूखा सोता है, तो हमारी आत्मा भीतर तक कचोट जाती है। दया बेशक हमें सिर्फ अपने लोगों पर ही आती है। कुछ स्थितियों में बाहर किसी व्यक्ति को देखकर भी आ ही जाती है, लेकिन हम में...

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डस्टबिन खा रहा लोगों का खाना

डस्टबिन बनाम भूखे बच्चे – भारत की कड़वी सच्चाई

कल दोपहर मैं एक होटल में खाना खाने गया था। मेरी टेबल के पास बैठे कुछ लोग दिखाई दिए, जिन्होंने बहुत सारा खाना मंगवाया था। लेकिन जब वे लोग होटल से गए, तो उनकी प्लेटों में ढेर सारा खाना बचा हुआ था। मेरा दिल बड़ा दुखा, जब मैंने देखा कि वेटर बिना सोचे-समझे उस सारे खाने को कूड़ेदान में फेंक...

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भूख की चीख

भूखे बच्चे की नम आँखें

पेट से निकली हुई बेबाक भूख की चीख कानों से सुनाई नहीं, बल्कि दिखाई देती है आँखों से भूख से जिस समय पेट बिलखता है, उस स्थिति में दुनिया की कोई भी बात ज़हन में नहीं आती। बात बहुत बड़ी है, जरुरत है, पेट की इस गुहार को सुनने की और इसे महसूस करने की। उस पेट में उठती दलील,...

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खून को पसीने के रूप में बहाता है किसान, तब जाकर आप तक पहुँचता है अन्न

खेत में पसीना बहाता भारतीय किसान

“खून को पसीने के रूप में बहाता है किसान, तब जाकर आप तक पहुँचता है अन्न” यह वाक्यांश सटीक रूप से इस तथ्य को उजागर करता है कि किसानों का श्रम और संघर्ष ही हमारे जीवन का आधार है। यदि वे मेहनत और हमारी फिक्र करना बंद कर दें, तो मुझे कहने में कोई संकोच नहीं कि हम चंद ही...

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मजबूरियों में दम तोड़ता बचपन….

बस स्टैंड पर पेन बेचता गरीब भारतीय बच्चा

एक सर्द सुबह बस स्टेशन पर बैठा मैं अपनी बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी दो छोटे बच्चे मेरे पास आए। उनकी मासूम आँखों में थकान और समस्याओं से जूझते बचपन की कहानी साफ झलक रही थी। उनके नन्हें हाथों में पेन के कुछ पैकेट थे। वे मेरे पास आए और मुझसे पेन खरीदने की गुजारिश करने लगे। उनकी...

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गरीबी: स्थिति या मानसिक सोच?

गरीबी की मानसिकता में फंसा भारतीय युवक सोच में डूबा हुआ

गरीबी, हमारे देश में एक ऐसी समस्या है, जिसे खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा प्रयास किए गए। इसके लिए हर प्रकार की योजनाएँ, कार्यक्रम और अभियान चलाए गए, फिर भी इस समस्या से छुटकारा नहीं पाया जा सका। इसका एक कारण यह है कि इस समस्या को केवल एक आर्थिक स्थिति मानकर ही इसका हल खोजा जाता रहा, जबकि...

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