नामी क्रिमिनल्स के हौंसले जेल एक अनोखी यूनिवर्सिटी है। जेल एक कैदी को इतना सिखा देती है कि हम और आप उस बारे में सोच भी नहीं सकते। अगर यूँ कहा जाए कि जेल, जिंदगी की भूख बढ़ा देती है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा। आप हर एक चीज़ के लिए भूखे होते हैं। आईपीएस दिनेश एमएन, जिन्होंने...
Continue reading...कैदी के गुनाहों का दोषी कौन?
गलती हर इंसान से होती है, बचपन में गलती करने पर बच्चे को बेशक एहसास नहीं होता कि उसने आखिर किया क्या है, लेकिन गाल पर लगा जोरदार तमाचा इतना डर तो बैठा ही जाता है कि यह काम दोबारा नहीं करना है, क्योंकि यदि किया, तो फिर से मार घल जाएगी। मेरी नज़रों में सुधार के लिए मारी गई...
Continue reading...दूसरा मौका सभी के लिए महत्वपूर्ण
कितना अच्छा लगता है न, जब एक बार असफल होने के बाद, सफलता पाने के लिए दूसरा मौका मिल जाए। व्यक्ति हमेशा अपने अनुभव से कुछ न कुछ सीखता रहता है। मैंने अक्सर देखा है कि कहीं भी हमें यदि दूसरा मौका मिलता है, तो हम पहले से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। मैं यहाँ मेले में खेले जाने वाला निशानेबाजी...
Continue reading...पाठ्यक्रम के साथ पाठशाला का रास्ता
सुगम होना भी जरुरी जैसा कि आप सभी जानते हैं, देश की शिक्षा नीति में लगभग 34 वर्ष बाद परिवर्तन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और शैक्षणिक ढाँचे को मजबूत बनाना है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और छात्र परिणामों पर विशेष बल दिया गया है, जिससे छात्रों के बीच एकाग्रता, सहयोग...
Continue reading...महँगी होती शिक्षा की लगातार गिरती गुणवत्ता
अब न तो पहले जैसी शिक्षा रही है और न ही पहले जैसे शिक्षक एक सुबह मैं ताजी हवा खाने के लिए टहलने निकला था, रोज की तरह ही सड़कों पर पीली स्कूल बसें आती जाती दिखाई पड़ रही थीं। चौराहों पर छोटे-छोटे बच्चे स्कूल की यूनिफॉर्म पहने कँधे पर बड़ा-सा बस्ता टांगे अपनी स्कूल बसों की राह देख रहे...
Continue reading...लगातार अभ्यास मूर्ख व्यक्ति को
भी बना देता है बुद्धिमान “करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान। रसरी आवत-जात ते सिल पर परत निशान॥” कवि वृंद रचित ”वृंद सतसई” का यह दोहा पुराने समय से ही काफी प्रचलित है, जो बच्चों को स्कूल हो या घर सभी जगह सिखाया जाता है, जिसका अर्थ है कि निरंतर अभ्यास करने से मुर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है।...
Continue reading...किताबी ज्ञान के साथ-साथ
व्यावहारिक ज्ञान भी जरुरी.. एक व्यक्ति को तब तक सफल नहीं माना जा सकता, जब तक वह पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ दुनियादारी की समझ न रखे एक बार किसी काम से मेरा बैंक जाना हुआ, बैंक में भीड़ ज्यादा होने के कारण लम्बी लाइन लगी हुई थी। मैं भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने लगा, तभी मेरी...
Continue reading...गुरु कुम्हार और शिष्य घड़ा
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट। अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥ कबीर के इस दोहे का अर्थ नई पीढ़ियाँ शायद ही जानती हों। गुरु और शिष्य के उदाहरण को हम इस दोहे से बखूबी समझ सकते हैं। जिस प्रकार कुम्हार भीतर से हाथ का सहारा देकर, बाहर से चोट मारकर मटके तथा बर्तनों को गढ़ता है,...
Continue reading...खोखला बीज भला क्या काम का?
इंसान की आधारभूत जरूरतों में से पहली जरूरत रोटी होती है, जिसके लिए किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाता है, लेकिन सिर्फ मेहनत कर देने से अच्छी फसल नहीं उग जाती, इसके लिए जरूरत होती है गुणवत्ता वाले बीज की, क्योंकि जब बीज अच्छा होगा, तभी अच्छी फसल होगी और तब सही मायने में किसान की मेहनत रंग लाएगी। किसी...
Continue reading...भ्रष्टाचार और पेपर लीक
की आग की लपटों में झुलसते छात्र भारत की शिक्षा प्रणाली एक भयानक तूफान के चपेट में आ बैठी है। एक ऐसा तूफान, जो धूल-मिट्टी के रूप में अपने साथ भ्रष्टाचार और पेपर लीक का बवंडर साथ लिए चल रहा है। एक ऐसा तूफान, जो अनगिनत छात्रों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को निगलता ही चला जा रहा है। इन तमाम...
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