मौत किराए पर नहीं मिलती

एक विचारशील व्यक्ति श्मशान के किनारे खड़ा, जीवन की अनमोलता और मृत्यु की अनिवार्यता को समझते हुए।

इस दुनिया में लगभग हर चीज़ किराए पर मिल जाती है, जैसे कि घर, गाड़ी, कपड़े और यहाँ तक कि गहने भी। लेकिन, एक चीज़ ऐसी है, जिसके लिए अपने जीवन की सारी मालकियत, दौलत-शोहरत आदि चाहे जो कुछ भी न्यौंछावर कर दो, चाहे कुछ भी कर लो, वह कभी किराए पर नहीं मिलती.. मैं जिस चीज की बात कर...

Continue reading...

सफलता मेहनत से या फिर सोच से?

एक युवा व्यक्ति सोचते हुए, उसके चारों ओर सफलता के प्रतीक और प्रकाश की किरणें दिखाई दे रही हैं।

आपकी सफलता का आकार, आपकी सोच पर निर्भर करता है लोग अक्सर मानते हैं कि सफलता मेहनत करने से मिलती है। जितनी अधिक हम मेहनत करेंगे, उतनी अधिक सफलता पाएँगे.. आप क्या सोचते हैं? क्या सच में आपको लगता है कि यह सही है? यदि सही है तो कितना सही है? क्या सचमुच सफलता में सिर्फ और सिर्फ मेहनत का...

Continue reading...

जीवन के हर दरवाजे को खोल सकती है ज्ञान की कुँजी

एक युवा व्यक्ति सुनहरी रोशनी में चमकती ज्ञान की कुँजी पकड़े हुए, नए अवसरों की ओर देखता हुआ।

जब हम अपनी आँखें बंद कर सपनों की दुनिया में खो जाते हैं, तो हम कल्पना की अनंत ऊँचाइयों पर उड़ने लगते हैं, जहाँ हर असंभव काम भी हमे संभव होता दिखाई देने लगता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि इस संसार के जादू को भी हकीकत में बदलने की एक जादुई कुँजी है? हाँ, यह कुँजी है- ज्ञान।...

Continue reading...

शिक्षा और सबक

दादा-दादी बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हुए, पीढ़ियों के बीच सीखने का भाव दर्शाता दृश्य।दादा-दादी बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हुए, पीढ़ियों के बीच सीखने का भाव दर्शाता दृश्य।

सीखना ही जीवन है….. जिस क्षण हम सीखना बंद कर देते हैं, वास्तव में हम जीना बंद कर देते हैं.. सीखना एक सुंदर यात्रा है, जो हमारे इस दुनिया में आने से शुरू होती है और तब तक जारी रहती है, जब तक हम आखिरी साँस नहीं ले लेते। एक शिशु का इस दुनिया की अद्भुत चीजों के बारे में...

Continue reading...

युवाओं के हाथ में राजनीति के नए युग की शुरुआत….. 

भारतीय ग्रामीण क्षेत्र में चुनावी मंच से युवाओं को संबोधित करता एक युवा नेता।

राजनीति.. यह शब्द सुनते ही अक्सर हमारे मन में नकारात्मक विचारों की बाढ़ आ जाती है। भ्रष्टाचार, सत्ता की भूख और धोखाधड़ी जैसे शब्द हमारे दिमाग में घूमने लगते हैं। समाज में राजनीति और राजनेता दोनों को ही नकारात्मक दृष्टि से देखा जाता है। आज के समय में शायद ही कोई माता-पिता होंगे, जो अपने बच्चे को राजनेता बनते देखना...

Continue reading...

भारतीय राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी तो पूरी, लेकिन भागीदारी कम

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को दर्शाती महिला नेता और ग्रामीण चुनावी कार्यक्रम

कुछ समय पहले मुझे एक गाँव के चुनावी कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहाँ की स्थानीय राजनीति के बारे में सुनने और समझने का मौका मिला। जब मैं कार्यक्रम में पहुँचा, तो सबसे पहले मेरी नज़र वहाँ उपस्थित लोगों की भीड़ पर पड़ी, जिनमें से ज्यादातर पुरुष थे। महिलाएँ भी थीं, पर उनकी संख्या नगण्य थी और जो...

Continue reading...

राजनेताओं से भी लिया जाए काम का लेखा-जोखा..

लोकतंत्र में राजनेताओं की जवाबदेही और कार्य रिपोर्ट

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र को समझाते हुए अब्राहम लिंकन ने कहा था, “जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन”, जहाँ जनता अपने बीच से ही एक व्यक्ति को नेता चुनती है और वही नेता जनता के हित में काम करते हैं। ये नेता जनता के प्रतिनिधि होते हैं और जनता का विश्वास उनके कँधों पर...

Continue reading...

केवल राजनीति पर क्यों उठे सवाल…

नेपोटिज़्म राजनीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में

आजकल एक शब्द बड़ा प्रचलित हो चला है, जो आपने भी अक्सर सुना होगा, नेपोटिज़्म या हिंदी में कहें तो भाई-भतीजावाद। आज हर क्षेत्र और स्तर पर आपको इसका असर देखने को मिल जाएगा। लेकिन, इस आरोप से सबसे ज्यादा राजनीति बदनाम है। हालाँकि, ज्यादा दूर न जाएँ; यदि आप अपने आस-पास ही देखें, तो आपको इसके उदाहरण बड़ी आसानी...

Continue reading...

अब वो बात कहाँ..

पुराने समय में संगीत सुनने का अनुभव

एक रोज़ मेरा किसी काम से बाहर जाना हुआ, घर लौटते हुए शाम हो गई। मैं घर लौट ही रहा था कि दूर किसी चाय की दुकान पर एक पुराना गाना सुनाई दिया। गाने के बोल मेरे कानों में पड़े, तो एक पल के लिए मैं जवानी के उस समय में पहुँच गया, जब मैं गाने सुनने का बड़ा शौकीन...

Continue reading...

सच्चे रिश्तेदार

शादी में भीड़ और सच्चे रिश्तेदारों का फर्क

शादियों का मौसम शुरू हो चुका है, और हर रोज लाखों की तादाद में शादियाँ हो रही हैं। आप लोग भी रिश्तेदारों और परिचितों की शादियों में मेहमान नवाजी का लुफ्त उठा ही रहे होंगे। आजकल की शादियों में 500-700 मेहमान बुलाना तो आम बात है। कहीं-कहीं तो यह संख्या हजारों में भी देखने को मिल जाती है। ज्यादा से...

Continue reading...