फेल होना भी है जरुरी….

दबाव और असफलता के बीच संघर्ष करता बच्चा, जीवन की सीख लेता हुआ

हर चीज की शुरुआत बचपन से ही होती है। बचपन में सीखी सीख आपको भविष्य के लिए तैयार करती है। इसमें जितना योगदान घर से मिले संस्कारों का होता है, उतना ही स्कूली जीवन में मिली सीख का भी होता है। स्कूल से मिली सीख केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देती है, बल्कि व्यक्ति को जिंदगी की कसौटी के लिए...

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क्वालीफाईड होने में पीछे रह गई एजुकेशन

डिग्री होने के बावजूद वास्तविक कौशल से वंचित, उलझन में भारतीय छात्र

. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था, “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि इसे समाज के हित में उपयोग करना चाहिए।” लेकिन, समय के साथ यह धारणा धुँधली होती जा रही है। हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ डॉ डिग्री को योग्यता का प्रमाण माना जाता है, लेकिन उस डिग्री के पीछे...

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गलत सीख देती किताबों का जिम्मेदार कौन?

गलत जानकारी वाली किताब पढ़ता भारतीय छात्र

कहते हैं किताबें हमारे जीवन की सबसे अच्छी साथी होती हैं। जब भी हमें उनकी आवश्यकता होती है, वे हमारे लिए उपलब्ध होती हैं। किताबें हमारे आसपास की दुनिया को समझने, सही और गलत के बीच निर्णय लेने में हमारी मदद करती हैं। वे हमारे आदर्श, मार्गदर्शक या सर्वकालिक शिक्षक के रूप में भी हमारे जीवन में शामिल होती हैं।...

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जीवन के बोझ तले, कैसे पनपेंगे ये नौनिहाल??

ढाबे पर काम करता गरीब भारतीय बच्चा जो स्कूल जाने की उम्र में श्रम कर रहा है

अक्सर बीच-बाजार में या रास्तों में, चाय की टपरी या होटलों में हमें कुछ बच्चे नजर आते हैं। इनकी आँखें सितारों जैसी होती हैं, लेकिन उन आँखों की चमक को जीवन की कड़वी वास्तविकता ने धुँधला कर दिया है। यह कोई किताबी बातें नहीं, बल्कि गरीबी में पैदा हुए अनगिनत बच्चों का रोज़मर्रा का सच है। हर दिन उनके लिए...

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बच्चों को दें कोई हुनर, ताकि वो बन पाएँ अपनी जिंदगी के विनर..

भारत में एक बच्चा संगीत और चित्रकला जैसी गतिविधियाँ सीखता हुआ

पिछले दिनों एक वीडियो देखने में आया, जहाँ महज़ ढाई-तीन साल का एक कोरियन बच्चा अपने अन्य दोस्तों के साथ अपनी कक्षा में बड़ी ही सावधानी और सफाई के खाना पकाना सीख रहा था। उन बच्चों को देखकर बड़ा अच्छा लगा। साथ ही, इतने छोटे बच्चों को खाना पकाते देख थोड़ा आश्चर्य भी हुआ, क्योंकि हमारे यहाँ तो ढाई-तीन साल...

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शिक्षा है या नोट छापने की मशीन….

महंगी कोचिंग फीस भरते परेशान भारतीय छात्र और अभिभावक।

एक समय था जब शिक्षा को समाज में बदलाव और विकास का मुख्य साधन माना जाता था। शिक्षक को एक मार्गदर्शक, गुरु और प्रेरक के रूप में देखा जाता था, जो विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक ज्ञान, बल्कि जीवन मूल्य भी सिखाते थे। यह वह समय था जब शिक्षक जीवन जीने के अनोखे गुण सिखाते थे और शिक्षा पूरी होने...

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शिक्षित किसान, उन्नत देश 

ड्रोन और टैबलेट से फसल की जांच करता आधुनिक भारतीय किसान।

प्राचीन काल से ही भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है, और कृषि हमेशा से ही हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। आज भी देश की जीडीपी में लगभग 22% हिस्सा कृषि से आता है। लेकिन, जिस कृषि क्षेत्र ने देश को पहचान दी, वही दशकों से गंभीर संकटों का सामना कर रहा है। यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक...

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बाद पछताए क्या होत, जब चिड़िया चुग गई खेत..

एक व्यक्ति उदास होकर अपने घर के बरामदे में अकेले बैठा, डिजिटल युग में खोए रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक।

हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं, जहाँ विज्ञान और तकनीक ने हमारे जीवन को बेहद सुविधाजनक बना दिया है। हम हजारों किलोमीटर दूर बैठे इंसान को देख और सुन सकते हैं, पूरी दुनिया हमारे मोबाइल में समा गई है, कारण कि आज का युग तकनीकी का युग है। वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और इंटरनेट ने हमें हर एक...

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मौत किराए पर नहीं मिलती

एक विचारशील व्यक्ति श्मशान के किनारे खड़ा, जीवन की अनमोलता और मृत्यु की अनिवार्यता को समझते हुए।

इस दुनिया में लगभग हर चीज़ किराए पर मिल जाती है, जैसे कि घर, गाड़ी, कपड़े और यहाँ तक कि गहने भी। लेकिन, एक चीज़ ऐसी है, जिसके लिए अपने जीवन की सारी मालकियत, दौलत-शोहरत आदि चाहे जो कुछ भी न्यौंछावर कर दो, चाहे कुछ भी कर लो, वह कभी किराए पर नहीं मिलती.. मैं जिस चीज की बात कर...

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सफलता मेहनत से या फिर सोच से?

एक युवा व्यक्ति सोचते हुए, उसके चारों ओर सफलता के प्रतीक और प्रकाश की किरणें दिखाई दे रही हैं।

आपकी सफलता का आकार, आपकी सोच पर निर्भर करता है लोग अक्सर मानते हैं कि सफलता मेहनत करने से मिलती है। जितनी अधिक हम मेहनत करेंगे, उतनी अधिक सफलता पाएँगे.. आप क्या सोचते हैं? क्या सच में आपको लगता है कि यह सही है? यदि सही है तो कितना सही है? क्या सचमुच सफलता में सिर्फ और सिर्फ मेहनत का...

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