थाली से नाली तक का सफर

शादी समारोह में प्लेट में छोड़ा गया खाना और पास में डस्टबिन, भारत में भोजन की बर्बादी को दर्शाता दृश्य

शान दिखाना नहीं, बल्कि पेट भरना है भोजन का असली मतलब भारत, एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ किसानों के श्रम और समर्पण से लाखों-करोड़ों लोगों को भर पेट भोजन मिलता है। सही मायने में किसान हमारे देश की रीढ़ हैं, जो अपने खून-पसीने से अपने जीवन के दिन-रात एक करके अन्न उगाते हैं। सिर्फ इसलिए, ताकि हम भूखे न...

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छोटा-सा योगदान भी बड़े मायने रखता है…

भारतीय समाज में गरीब बच्चों को शिक्षा देते लोग, जो छोटे योगदान से बड़े बदलाव का संदेश देते हैं

आज सुबह से ही हल्की-हल्की बारिश हो रही है, और हो भी क्यों न बरसात का मौसम जो चल रहा है। यह मौसम अक्सर लोगों को बड़ा पसंद होता है, क्योंकि इस समय धरती हरियाली की चादर ओढ़े, पेड़-पौधों पर आई नई पत्तियाँ खुशी से झूमती हुई, बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। इस लुभावने मौसम और...

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गरीबी या मक्कारी?

भारतीय झुग्गी बस्ती में मुफ्त सरकारी योजनाओं के बावजूद गरीबी में रहने का चुनाव करता परिवार

गरीबी एक ऐसा शब्द है, जो सुनने में जितना साधारण लगता है, वास्तविकता में उतना ही भयावह और गंभीर है। यह एक ऐसी सामाजिक बुराई है, जिसने न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि पूरे समाज, देश और यहाँ तक की वैश्विक स्तर पर मानवता को जकड़ रखा है। गरीबी को सही मायनों में एक अभिशाप कहा जाए, तो यह कोई अतिशयोक्ति...

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फायदेमंद गरीबी

एक भारतीय शहर की झुग्गी के पास गरीब और धनी लोगों का अंतर दिखाता दृश्य, जिसमें कोई व्यक्ति झूठा गरीब होने का दिखावा कर रहा हो।

एक समय था जब स्वयं को गरीब बताना हीन भावना को जन्म देता था, लेकिन अब स्वयं को गरीब दर्शाना फायदेमंद हो गया है…. स्वतंत्रता के बाद देश में जातिगत भेदभाव और गरीबी से उत्थान के लिए छात्रवृत्ति, अनुदान और विभिन्न योजनाओं इत्यादि के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएँ लागू कीं, ताकि पिछड़े...

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आपके मायने में आशियाने की परिभाषा क्या?

बालकनी में गोरैया का घोंसला बनाने वाली जोड़ी और शहर में गरीबों के अस्थायी आशियाने, मानव और प्रकृति की मेहनत का प्रतीक।

अपना काम बनता,भाड़ में जाए जनता….. शाम का समय, गोधूलि बेला में घर की बालकनी में बैठकर चाय की चुस्कियाँ लेने का जो आनंद है, उसे शब्दों में बयाँ कर पाना मुश्किल है। मेरा पेड़-पौधों और खुले वातावरण से विशेष लगाव है, इसलिए मैं अक्सर शाम का समय घर की बालकनी में ही बिताता हूँ। एक शाम मैं बालकनी में...

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सड़कें न हो गरीबों का घर……

सड़क किनारे कंबल में लिपटे बेघर परिवार के साथ छोटे बच्चे – शहरी गरीबी की सच्ची तस्वीर

हमारे शहरों के हर कोने में, जहाँ पर जीवन एक अलग लय में बहता है और जहाँ सपनों को उड़ने के लिए पंख मिलते हैं, इसके पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शहरी गरीब, जो शहर को जीवित रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, उन्हें जीवन की बुनियादी जरूरतों के बिना खुद...

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किसने बनाए हैं ‘जूठन’ और ‘उतरन’ जैसे शब्द?

झुग्गी बस्ती के बाहर बैठा भूखा बच्चा कूड़े के पास रखा बचा हुआ खाना देखता हुआ

लम्बे समय की सेविंग के बाद पिछले महीने ही अपने लिए इतना महँगा शर्ट खरीदा था, इतनी जल्दी यह मुझे छोटा होने लगा है, एक काम करता हूँ किसी को दे देता हूँ.. आज फिर माँ ने टिफिन में दो रोटी ज्यादा रख दी, यह फिर फेंकने में जाएगी, किसी को दे देता हूँ.. यह जो हमारे द्वारा अपने कपड़ों...

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तोड़ देगी भारत को गरीबी एक दिन

भारतीय युवा नेता संविधान के स्वर्ण द्वार के सामने ज्ञान की कुंजी पकड़े हुए – राष्ट्र निर्माण का प्रतीक

बात करे हैं कामयाबी की दास्तां सुनाएँ क्या गरीबी की भूखा तरसे खाने के एक निवाले को नमन है भारत के ऐसे विकास निराले कोविभिन्न देशों की स्थिति-परिस्थिति यानि आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उन्हें दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है: एक विकसित और एक विकासशील। निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को आमतौर पर विकासशील देश कहा जाता...

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‘मैं’ सिर्फ एक शरीर तक सीमित नहीं

कुहासे भरी सुबह में शांत भाव से बैठे साधु, आत्मा और शरीर से परे चेतना का प्रतीक

सर्दियों की एक शांत-सी सुबह में, मुझे अपने विचारों के साथ कुछ सुखद पल खुद के साथ बिताने का सुअवसर मिला। चारों ओर कुहासा पसरा था, जैसे समय खुद किसी तपस्वी की तरह मौन साधे बैठा हो। मन उसी मौन में कहीं भीतर उतर गया था कि तभी एक प्रसंग की बेशकीमती स्मृति मेरे मन में दस्तक देती है, जो...

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शुरुआत कहाँ से करें?

कमज़ोरी से ताकत की ओर बढ़ता भारतीय युवक, अंधेरी सुरंग से उजाले की ओर चलता हुआ

शुरुआत कहाँ से करें? शायद वहीं से जहाँ हम अक्सर ठिठक जाते हैं.. शायद वहीं से, जहाँ पहली बार किसी की बात ने भीतर तक चुभा दिया था, और हम चुपचाप मुस्कुरा दिए थे, ताकि किसी को महसूस न हो कि भीतर तक सब कुछ हिल चुका है। जहाँ हम पहली बार कमज़ोर कहे गए थे और हमने ऊपर से...

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