सपनों से दूर करती यह कैसी पढ़ाई…….

डिग्री हाथ में लिए नौकरी की तलाश में निराश भारतीय युवा, जो शिक्षा और कौशल के बीच की खाई को दर्शाता है

किताबी ज्ञान तक सीमित हमारी शिक्षा नीति और इंडस्ट्री के लिए जरुरी कौशल के बीच की खाई भारत के हलचल और महत्वाकांक्षाओं से भरे एक शहर में, आन्या रहती है। आन्या 20-22 साल की एक होनहार बालिका है, जिसने हाल ही में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अब वह एक अच्छी-सी नौकरी चाहती है। पढ़ाई...

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छात्र उपस्थित, शिक्षक अनुपस्थित

सरकारी स्कूल की खाली कक्षा में बैठे छात्र जहाँ शिक्षक की अनुपस्थिति भारत में शिक्षा संकट को दर्शाती है

‘बिना शिक्षक के कक्षा’, यह कुछ ऐसा है, जैसे बिना हवा और पानी के हमारी पृथ्वी नई अटेंडेंस: बच्चे! प्रेज़ेंट टीचर.. टीचर! एब्सेंट बच्चों.. बिना शिक्षक के शिक्षा.. कितना अजीब लग रहा है न यह पढ़कर? ज़रा कल्पना करके देखिए एक ऐसे गुरुकुल की, जिसमें कोई गुरु ही न हो और फिर भी शिष्य उस गुरुकुल में शिक्षा या कोई...

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यह इत्र सबसे महँगा

एक गरीब बच्चा किताब पढ़ता हुआ और पास में उड़ती चिड़िया – शिक्षा की महक का प्रतीकात्मक दृश्य

फूलों का स्वभाव होता है खुद के साथ ही साथ अपने आसपास के वातावरण को भी महकाना और अपनी महक से सराबोर कर देना हर उस शख्स को, जिसने इसे छुआ है। फूलों से बने इत्र में खूबियाँ और भी बढ़ जाती हैं। बात महक की चली है, तो इसी पर आगे बढ़ते हैं। क्या महक का नाता सिर्फ फूलों...

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बचपन के भी दो चेहरे

भारत की सड़क पर स्कूल जाते बच्चे और फुटपाथ पर बैठे गरीब बच्चे – बचपन के दो चेहरे का सामाजिक दृश्य

बचपन के भी दो चेहरे हैं.. यह तथ्य आपको तब सत्य होता दिखाई देगा, जब आप खुद के आवरण से बाहर आएँगे, और अपने आस-पास के लोगों पर भी ध्यान देंगे.. हमारे देश की चहल-पहल भरी सड़कों पर बच्चों की अलग ही दुनिया हमें देखने को मिलती है.. लेकिन, उन मासूमों के जीवन में जो प्रतिकूल स्थितियाँ देखने को मिलती...

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हर निवाले की बचत जरुरी….

हर निवाले की बचत जरूरी

“भोजन का सही सम्मान उसकी बर्बादी न करके और उसे प्रेम से ग्रहण करके किया जाता है।” भूख हमारे देश की एक बड़ी समस्या है, जिससे आजादी के 78 सालों बाद भी हम पूरी तरह निजात नहीं पा सके हैं। हमारे देश में रोज करीब 20 करोड़ लोग भूखे सोने को मजबूर हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, हर दिन...

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मौन पीड़ाओं की नज़रअंदाजी..

मौन पीड़ाओं की अनदेखी

हमारे शहरों की हलचल भरी सड़कों पर, हॉर्न बजाती कारों के शोर और भागदौड़ के बीच, हम अक्सर ऐसे लोगों की खामोश चीखें सुनते हैं, जो हर दिन जीवन के लिए संघर्ष करते हैं। कभी रास्तों पर हमें बुजुर्ग पुरुष और महिलाएँ, कमजोर और समय से थके हुए, हाथ फैलाकर बैठे मिलते हैं। कभी खोखली आँखों वाले बच्चे, अपने छोटे-छोटे...

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बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख

भारत में असमान बचपन की सच्चाई

बचपन जीवन का सबसे खूबसूरत दौर होता है। बचपन के वो खेल-खिलौने, वो यार-दोस्त ही तो जीवनभर की मीठी याद बन जाते हैं, जो जीवन के कठिन दौर में भी कभी याद आ जाए, तो मन को थोड़ा सुकून और चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान दे जाती है। लेकिन, बचपन की मासूमियत और उसकी मिठास का एहसास हर किसी के नसीब...

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एक अनदेखा संकट….

भारत में बच्चों का कुपोषण संकट

हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहाँ का हर कोना खान-पान की एक संपन्न विरासत लिए हुए है। एक ऐसा देश, जहाँ कहीं आपको मसालों की सुगंध मिलेगी, तो कही हवाओं में मिठास घुली होगी। अलग-अलग कोने में अलग-अलग जायका मिलेगा। यह खान-पान तो हमारी पहचान है, लेकिन खाने के शौकीन इस देश की एक सच्चाई और है, जहाँ...

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इंसानियत की समझ से परे टीस भूख की

भूख की टीस – इंसान, जानवर और पक्षी

भूख और भुखमरी ये ऐसे मुद्दे हैं, जो हमें हमारी इंसानियत की गहराइयों में झाँकने पर मजबूर करते हैं। जब हमारा अपना बच्चा भूखा सोता है, तो हमारी आत्मा भीतर तक कचोट जाती है। दया बेशक हमें सिर्फ अपने लोगों पर ही आती है। कुछ स्थितियों में बाहर किसी व्यक्ति को देखकर भी आ ही जाती है, लेकिन हम में...

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डस्टबिन खा रहा लोगों का खाना

डस्टबिन बनाम भूखे बच्चे – भारत की कड़वी सच्चाई

कल दोपहर मैं एक होटल में खाना खाने गया था। मेरी टेबल के पास बैठे कुछ लोग दिखाई दिए, जिन्होंने बहुत सारा खाना मंगवाया था। लेकिन जब वे लोग होटल से गए, तो उनकी प्लेटों में ढेर सारा खाना बचा हुआ था। मेरा दिल बड़ा दुखा, जब मैंने देखा कि वेटर बिना सोचे-समझे उस सारे खाने को कूड़ेदान में फेंक...

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