2026

समाज पानी तो फिल्टर कर पीता है लेकिन खून नहीं

भारतीय जेल में कैदी, समाज द्वारा तिरस्कृत और अलग-थलग

कैदियों के प्रति समाज का नज़रिया अपराधी या पीड़ित के बीच नहीं बंटा हुआ है। यह एक कटु सत्य है कि समाज के लिए एक कैदी सिर्फ अपराधी हो सकता है पीड़ित नहीं। यही सोच समाज पर भारी पड़ रही है और न केवल अपराध बल्कि अपराधियों को भी जन्म दे रही है। भारतीय समाज में कैदियों के प्रति नज़रिया...

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बिना सज़ा के ही सज़ा काट रहे हैं विचाराधीन कैदी..

भारतीय जेल में फैसले का इंतजार करते विचाराधीन कैदी

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ हर किसी को स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है। भारत के संविधान और न्यायपालिका का भी यही मानना है कि भले ही कोई अपराधी सज़ा पाने से बच जाए, लेकिन किसी बेगुनाह को सज़ा न हो। लेकिन, विडंबना यह है कि इस लोकतांत्रिक और न्यायप्रिय देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपना...

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अब जरुरत, जेलों को बनाया जाए बिगाड़गृह से सुधारगृह

भारतीय जेल में कैदियों का पुनर्वास और सुधार की आवश्यकता

आज की जेलें: सुधारगृह या बिगाड़गृह? प्राचीन समय में किसी अपराधी के लिए कारावास की सज़ा को जरुरी माना जाता था। उसके पीछे तर्क यह था कि कैदियों को एकांत कारावास में रखने से उन्हें आत्म-मंथन का मौका मिले, जिससे अपराधियों में सुधार आए। हिंदू और मुगल शासन के दौरान, अपराधियों को कड़ी निगरानी में रखा जाता था और इसका...

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एक गुनाह की कितनी सज़ा?

भारतीय जेल में अमानवीय परिस्थितियों से जूझता कैदी

समाज की दिखावटी सुविधाओं की ऊँची-ऊँची दीवारों के पीछे, दर्द और पीड़ा की एक छिपी हुई दुनिया है। यह दुनिया है जेल के कैदियों की, जो एक गलती के लिए सज़ा के अंतहीन चक्र में फंसे हुए हैं। समाज के मायने में एक अपराध के लिए एक ही सज़ा होती है। हमें भी बस इतना ही दिखता है कि किसी...

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जिंदगियों को खत्म करता अपराध का जाल..

अत्यधिक भीड़ और अमानवीय परिस्थितियों से जूझती भारतीय जेल

उभरते हुए भारत की एक अनदेखी वास्तविकता है भारतीय जेलों की दमनकारी दुनिया…. जेलों की शुरुआत करने का मूल उद्देश्य सुधार और पुनर्वास करना था, लेकिन दुःखद रूप से यह अपराध को जन्म देने वाले केंद्र में तब्दील हो चुकी हैं। ऊँची-ऊँची दीवारों के भीतर की परिस्थितियाँ न केवल आपराधिक व्यवहार को कायम रखती हैं, बल्कि लोगों को अपराध के...

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जेल: एक अनकही यूनिवर्सिटी में बुलंद होते नामी क्रिमिनल्स के हौंसले

भारतीय जेल में अपराधी मानसिकता और खौफ को दर्शाता दृश्य

जेल एक अनोखी यूनिवर्सिटी है। जेल एक कैदी को इतना सिखा देती है कि हम और आप उस बारे में सोच भी नहीं सकते। अगर यूँ कहा जाए कि जेल, जिंदगी की भूख बढ़ा देती है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा। आप हर एक चीज़ के लिए भूखे होते हैं। आईपीएस दिनेश एमएन, जिन्होंने सात साल जेल में...

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कैदी के गुनाहों का दोषी कौन?

अपराध और परवरिश के बीच संबंध को दर्शाता दृश्य

गलती हर इंसान से होती है, बचपन में गलती करने पर बच्चे को बेशक एहसास नहीं होता कि उसने आखिर किया क्या है, लेकिन गाल पर लगा जोरदार तमाचा इतना डर तो बैठा ही जाता है कि यह काम दोबारा नहीं करना है, क्योंकि यदि किया, तो फिर से मार घल जाएगी। मेरी नज़रों में सुधार के लिए मारी गई...

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क्या सच में पढ़ाई से ज्यादा जरुरी है शादी?

भारत में शादी और पढ़ाई के खर्च के बीच दुविधा

कुछ समय पहले गुजरात के जामनगर में हुए एक भव्य आयोजन की चर्चा आपने जरूर सुनी होगी। देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के बेटे की प्री-वेडिंग सेरेमनी थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन पर करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हुए। हमारे देश में अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि फलाने की शादी...

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दूसरा मौका सभी के लिए महत्वपूर्ण

परीक्षा में दूसरा मौका मिलने से आत्मविश्वास से पढ़ाई करता छात्र

कितना अच्छा लगता है न, जब एक बार असफल होने के बाद, सफलता पाने के लिए दूसरा मौका मिल जाए। व्यक्ति हमेशा अपने अनुभव से कुछ न कुछ सीखता रहता है। मैंने अक्सर देखा है कि कहीं भी हमें यदि दूसरा मौका मिलता है, तो हम पहले से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। मैं यहाँ मेले में खेले जाने वाला निशानेबाजी...

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पाठ्यक्रम के साथ पाठशाला का रास्ता सुगम होना भी जरुरी

ग्रामीण भारत में स्कूल तक पहुँचने में बच्चों की कठिनाइयाँ

जैसा कि आप सभी जानते हैं, देश की शिक्षा नीति में लगभग 34 वर्ष बाद परिवर्तन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और शैक्षणिक ढाँचे को मजबूत बनाना है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और छात्र परिणामों पर विशेष बल दिया गया है, जिससे छात्रों के बीच एकाग्रता, सहयोग और रचनात्मकता को बढ़ावा...

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