भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ दशक ऐसे रहे हैं, जिन्होंने आने वाली सदियों की दिशा तय की है। 1990 का दशक भी ऐसा ही एक प्रस्थान बिंदु था। यदि हमें समकालीन भारत की सामाजिक और राजनीतिक बुनावट को समझना है, तो हमें दो शब्दों की गहराई में उतरना होगा, मंडल और कमंडल। यह केवल दो विचारधाराओं का टकराव नहीं...
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क्या कम हो रही है पीएम मोदी की लोकप्रियता?
हमने पिछले डेढ़ दशक के दौरान भारतीय राजनीति को कई परिदृश्यों में बदलते देखा है। कैसे कुछ बेहतर सोशल मीडिया कैंपेन्स के दम पर एक राज्य तक सीमित राजनेता राष्ट्रीय चेहरा बन गया और सत्ता के केंद्र में स्थापित हो गया। जाहिर है, बात पीएम मोदी की हो रही है, जिन्होंने लगातार तीन बार न केवल देश का प्रधानमंत्री बनने...
Continue reading...भारी-भरकम कद-काठी वाले मशहूर भारतीय नेता
भारतीय राजनीति एक ऐसा जीवंत और विशाल रंगमंच है, जहाँ नेता का व्यक्तित्व हर कोण से परखा जाता है। यहाँ कद-काठी का अर्थ केवल शारीरिक वजन या भारी-भरकम बनावट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह विश्वसनीयता और जनता के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक बन जाता है। भारतीय लोकतंत्र की गौरवशाली परंपरा में ऐसे कई कद्दावर नेता हुए, जिनकी मजबूत...
Continue reading...भारत के सबसे वरिष्ठ और सक्रिय राजनेता
भारतीय राजनीति में अनुभव और आयु का कुछ ऐसा समन्वय देखने को मिलता है, जहाँ राजनीतिक कद या प्रभाव केवल चुनावी सफलताओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि समय और उम्र के साथ धीरे-धीरे गढ़ा जाता है। दशकों के अथक और जटिल संघर्ष के बाद एक नेता वरिष्ठ नेता की श्रेणी में आता है। भारतीय लोकतंत्र के समृद्ध और प्रेरणादायक सफर...
Continue reading...2047 का भारत और सिमटती सफेद पट्टी की चेतावनी
भारत जब 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव का उत्सव नहीं मना रहा होगा, बल्कि अपने सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक विकास का गहन आत्ममंथन भी कर रहा होगा। 2047 कोई दूर की तारीख नहीं, बल्कि वह दर्पण है, जिसमें आज की प्रवृत्तियाँ, जैसे हमारी भाषा, हमारे राजनीतिक निर्णय और हमारे सामाजिक व्यवहार,...
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