भारतीय राजनीति

यूपीए का दशक: मनमोहन की मौन सरकार और उपलब्धियों-विवादों की कहानी

यूपीए सरकार और मनमोहन सिंह के दशक की उपलब्धियों और विवादों को दर्शाती तस्वीर

भारतीय राजनीति में 2004 से 2014 का दशक एक ऐसा विरोधाभासी और जटिल अध्याय है, जिसका मूल्यांकन एकतरफा नहीं किया जा सकता। एक राजनीतिक रणनीतिकार के चश्मे से देखने पर महसूस होता है कि यह वह ऐतिहासिक दौर था, जब भारत ने इतिहास की सबसे तेज आर्थिक विकास दर दर्ज की और अभूतपूर्व लोक-कल्याणकारी सामाजिक सुधारों की नींव रखी, लेकिन...

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वर्ष 2026 के बाद किस दिशा में जाएगा भारतीय लोकतंत्र का भविष्य

2026 के बाद भारतीय लोकतंत्र के संभावित भविष्य को दर्शाती राजनीतिक तस्वीर

​भारतीय लोकतंत्र आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ से भविष्य की राहें पहले से कहीं अधिक जटिल और रोमांचक नजर आ रही हैं। वर्ष 2026 केवल कैलेंडर का एक नया पन्ना नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक राजनीतिक परिवर्तन की दहलीज है, जो आने वाले दशकों के लिए भारत की लोकतांत्रिक दिशा निर्धारित करेगा। वर्ष 2014 के...

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क्या 2047 विकसित भारत की राजनीति, विश्वगुरु के नारे को साकार कर पाएगी?

विकसित भारत 2047 और विश्वगुरु भारत की अवधारणा को दर्शाती तस्वीर

जब भारत 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव नहीं मना रहा होगा, बल्कि अपने अब तक के राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक सफर का गंभीर आत्म-मूल्यांकन भी कर रहा होगा। यह पड़ताल सिर्फ यह नहीं देखेगी कि देश ने कितनी आर्थिक तरक्की की, कितनी सड़कें बनीं या कितनी गगनचुंबी इमारतें खड़ी...

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सरकार और समाज के साथ कदमताल करतीं केंद्रीय राज्य

अनुप्रिया पटेल के राजनीतिक नेतृत्व और सामाजिक सरोकारों को दर्शाती तस्वीर

भारतीय राजनीति में कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो अक्सर मंत्रियों को उनके मंत्रालय तक ही सीमित देखा जाता है। लेकिन, केंद्रीय राज्य मंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को उन अपवादों में ही शामिल किया जा सकता है, जो मंत्रालय की जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक कर्तव्यों के निर्वहन में भी पहली पंक्ति में खड़ी नजर...

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लंबे कद और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए प्रख्यात हुए भारतीय राजनीति के कद्दावर चेहरे

लंबे कद और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले भारतीय राजनेताओं का प्रतिनिधित्व

भारतीय राजनीति में कद का तात्पर्य सिर्फ शारीरिक ऊँचाई से नहीं होता, राजनेताओं के विचार, फैसले, संघर्ष और जनता के मन में बनी उनकी छवि, उनके कद को असल मायने में बयान करती है। हालाँकि, इसमें भी कोई दो राय नहीं कि जब कोई नेता मंच पर खड़ा होता है, तो उसकी लंबी कद-काठी, सधा हुआ आत्मविश्वास और दमदार उपस्थिति...

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राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़े बदलाव लाने वालीं भारत की शीर्ष सबसे शक्तिशाली महिला राजनेताएँ

भारत की शक्तिशाली महिला राजनेताओं का प्रतिनिधित्व करती राजनीतिक तस्वीर

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता, समावेशिता और निरंतर विकास है। इस लोकतंत्र की आत्मा में महिलाओं का नेतृत्व एक ऐसी सशक्त धारा के रूप में उभरा है, जो न केवल सत्ता के शीर्ष पदों पर काबिज है, बल्कि समाज के हर वर्ग को न्याय, अवसर और सम्मान प्रदान करने में अग्रणी भूमिका भी निभा रही है। आज...

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भारतीय राजनीति में अपनी सादगी और साहस से इतिहास रचने वाले छोटे कद के बड़े राजनेता

छोटे कद वाले भारतीय राजनेता और उनका प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व

भारतीय लोकतंत्र की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ नेतृत्व की ऊँचाई कभी सेंटीमीटर या फीट में नहीं नापी जाती, बल्कि यह जनता के विश्वास की गहराई और दूरदर्शी फैसलों की स्पष्टता से तय होती है। आज सोशल मीडिया के दौर में जहाँ नेता की मंचीय उपस्थिति, बॉडी लैंग्वेज और शारीरिक हाइट को बहुत महत्व दिया जाता है, वहाँ...

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भारतीय राजनीति में अपनी दिव्यांगता को ताकत बनाकर नई दिशा गढ़ने वाले प्रमुख चेहरे

दिव्यांगता को चुनौती देकर भारतीय राजनीति में नेतृत्व करने वाले प्रमुख राजनेता

भारतीय लोकतंत्र की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ नेतृत्व कभी शारीरिक क्षमता या रंग-रूप से नहीं नापा जाता, बल्कि जनता के विश्वास और संघर्ष की भावना के साथ दूरदर्शी सोच से तय होता है। भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे अनेक और महान नेता हुए हैं, जो नेत्रहीनता, पैरालिसिस या अन्य गंभीर शारीरिक स्थितियों का सामना करते हुए...

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तो क्या नीतीश कुमार होंगे देश के अगले राष्ट्रपति?

2027 राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश कुमार की संभावित दावेदारी और राष्ट्रीय राजनीति

भारतीय राजनीति का इतिहास गवाह है कि यहाँ सत्ता के शीर्ष पर होने वाली नियुक्तियाँ केवल योग्यता का पैमाना नहीं होतीं, बल्कि वे भविष्य के दशकों की राजनीति तय करने वाले सुनियोजित समीकरण होते हैं। वर्ष 2027 में वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल पूर्ण होने जा रहा है। जैसे-जैसे यह समय निकट आ रहा है, दिल्ली के सियासी...

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‘जेन-ज़ी’ की सियासी भाषा को कैसे समझें राजनीतिक दल?

भारत में जेन-ज़ी युवा वोटर्स और आधुनिक राजनीतिक रणनीति

भारतीय गणराज्य की सबसे निर्णायक ताकत उसकी युवा आबादी में है। 18 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के करोड़ों युवा वोटर आज चुनावी नतीजों का सबसे बड़ा, सबसे प्रभावशाली तथा सबसे परिवर्तनकारी फैक्टर बन चुके हैं। जेन-ज़ी की यह नई, ऊर्जावान, जागरूक तथा महत्वाकांक्षी पीढ़ी पुरानी राजनीतिक भाषा, पुरानी शैली, पुरानी रणनीतियों तथा पुरानी सोच से पूरी तरह अलग,...

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