शिव पुराण के अनुसार, दक्ष-प्रजापति अपनी पुत्रियों के लिए ऐसे योग्य और धनवान वर चाहते थे, जो देवता हों, पृथ्वी पर जीवन को आसान बनाने में सहायक हों, जैसे कि वर्षा-देवता देवराज इंद्र या फिर अग्नि देव। वर्तमान समय में कॉर्पोरेट जगत की स्थिति भी यही है, जहाँ सबसे योग्य, सबसे कुशल और सबसे दक्ष टीम मेंबर्स की तलाश को...
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वो बातें, जो भगवान श्री कृष्ण से पीआर प्रोफेशनल्स को जरूर सीखना चाहिए
पब्लिक रिलेशन्स (पीआर) की दुनिया लगातार विकसित हो रही है। इस विकास के साथ ही साथ अपने क्षेत्र विशेष की जटिलताओं से निपटने के लिए प्रोफेशनल्स को न सिर्फ लगातार प्रेरणा, बल्कि सार्थक मार्गदर्शन की भी जरुरत होती है। गहन ज्ञान और शाश्वत शिक्षाओं का एक ऐसा ही सटीक स्रोत प्राचीन भारतीय महाकाव्य, भगवद्गीता से मिलता है। इस महाकाव्य में...
Continue reading...एम्प्लॉयीज़ से चलती है कंपनी
यह शत-प्रतिशत सत्य है। जब भी कोई कंपनी अपनी नींव रखने के बाद नए आयाम छूती है, तरक्की करती है, नई दिशाओं में आगे बढ़ती है और सफल होती है, तो बेशक उसमें बॉस का अहम् योगदान होता है। लेकिन सबसे बड़ा योगदान होता है, उसमें काम करने वाले एम्प्लॉयीज़ का, जो इसे अपनी कर्मस्थली मानते हैं। और सही मायने...
Continue reading...बॉस या……..
खड़ूस.. अकड़ू.. ये ऐसे अनकहे शब्द हैं, जो हमेशा ही मेरे कानों में गूँजते हैं, जब भी स्टाफ का कोई मेंबर तनी हुई भौहें लेकर गुस्से से आसपास से गुजर रहा होता है। मुँह पर कोई नहीं कह पाता, लेकिन मेरा मानना है कि बेशक स्टाफ के चुनिंदा लोगों के मन में यह नाम आ ही जाता होगा। यह तो...
Continue reading...पीआर एजेंसी की जरुरत कब और क्यों?
एल्विन एडम्स का मानना है कि संचार के इस युग में पब्लिक रिलेशन किसी भी ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण है। आज के समय में हर तरह के ब्रांड्स, चाहे वे नए हो या पुराने, तेजी से विकास कर रहे हैं। तेजी से हो रहे इस विकास ने इंडस्ट्री के सामने अलग ब्रांड इमेज बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है,...
Continue reading...सोने की चिड़िया में फिर बसने लगे प्राण
अपने पिंजरे की बेड़ियों को तोड़ते हुए अभूतपूर्व गति से उड़ने लगी सोने की चिड़िया भारत एक ऐसा नाम है, जो दुनिया के शक्तिशाली देशों के दायरे से अरसे से अछूता रहा है, यह बात और है कि किसी ज़माने में हमारे देश का दूसरा नाम ‘सोने की चिड़िया’ विश्व में शंखनाद करता था। जिस देश का कोहिनूर सदियों से...
Continue reading...सेक्स एजुकेशन गलत नहीं, आज की आवश्यकता है
हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली द्वारा कलंक और रूढ़िवादिता के कारण होने वाली सामाजिक प्रतिक्रिया से बचने के लिए सेक्स एजुकेशन को बहुत आसानी से समाप्त कर दिया गया है, लेकिन इसकी कीमत तो छात्र ही चुकाते हैं। यह गंभीर समस्या आज उचित समाधान की माँग कर रही है। इससे जुड़ी शर्म की उत्पत्ति का पता लगाने और सेक्स एजुकेशन को...
Continue reading...क्या हम सेक्स एजुकेशन का सच्चा विज्ञान जान पाए हैं?
यूँ तो हमारा देश संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना ही जाता है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हम संस्कृति और सभ्यता के आड़े सत्य को न जानें। जैसा कि पिछले आर्टिकल में मैंने बात की थी कि हमारे एजुकेशन सिस्टम में सेक्स एजुकेशन का क्या स्थान है? उसी को आगे बढ़ाते हुए, अतीत में सेक्स एजुकेशन...
Continue reading...हमारी शिक्षा प्रणाली में सेक्स एजुकेशन का क्या स्थान है?
मैं उस पीढ़ी से हूँ, जहाँ “सेक्स” शब्द को अत्यधिक आपत्तिजनक शब्द माना जाता है। सच कहूँ तो, मैं उस पीढ़ी से हूँ, जहाँ यदि कोई “सेक्स” शब्द का इस्तेमाल करता है, तो हम अपने कान बंद कर लेते हैं, क्योंकि आपत्तिजनक शब्द का तमगा लग जाने से इस विषय पर कहाँ कोई बात करेगा या शिक्षा देगा? परिणामस्वरूप, हमें...
Continue reading...कलम की टीस..
मैं कलम हूँ। लोग मुझे अक्सर एक निर्जीव वस्तु मानते हैं, जो न हिल सकती है, न साँस ले सकती है। वे मुझे सिर्फ एक प्लास्टिक की बनी वस्तु समझते हैं, लेकिन हकीकत उनकी सोच से कहीं परे है। मैं क्या कर सकती हूँ, यह वही व्यक्ति समझ सकता है, जिसके विचारों में शक्ति हो और उँगलियों में उन विचारों...
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