गरीबी का ब्रांड

सड़क किनारे मेहनत करते गुमनाम विक्रेता और कारीगर

ब्रांड वह शब्द है, जिसने दुनियाभर में तहलका मचा रखा है। यह सिर्फ एक लेबल नहीं है; यह एक धारणा है, जो हमारे विचारों को प्रभावित करती है। आज की दुनिया में हर कोई ब्रांडेड सामान की तलाश में रहता है। चाहे वह कपड़ा, खाना, इलेक्ट्रॉनिक्स या कोई अन्य दैनिक आवश्यकता की चीज़ हो, हर चीज़ को खरीदने से पहले हम अक्सर जिस पहलू पर विचार करते हैं, वह है उसका ब्रांड। क्योंकि हमारा मानना है कि ब्रांड किसी चीज़ की गुणवत्ता, कीमत और विश्वसनीयता निर्धारित करता है। लेकिन, बाजार में रोजाना आने वाली नए ब्रांडेड चीज़ों के प्रति हमारे आकर्षण के बीच, पहले से मौजूद ऐसे सामान बनाने वालों को कौन याद रखता है, जिनके पास न तो कोई दिखावा है, और न ही टीवी या अन्य मीडिया पर विज्ञापन करने की सुविधा? दिलचस्प बात यह है कि इन सामानों को बनाने और बेचने वाले भी अपने साथ एक ब्रांड लेकर चलते हैं, वह है गरीबी का ब्रांड।

हाँ, इस ब्रांड के उत्पाद अक्सर सड़कों पर पाए जाते हैं। हलचल भरी सड़कों पर, जहाँ शहरी जीवन अपनी दैनिक लय में गुनगुनाता है, वहाँ कुछ लोग चुपचाप अपने काम के माध्यम से हर दिन नई कहानियाँ बुनते हैं। कोई फल बेचने वाला अपने फलों की रंग-बिरंगी सजावट करता दिखाई है, तो कोई दर्जी कपड़े में कहानियाँ सिलता है। उनके काम बड़ी-बड़ी हस्तियों या बड़े विज्ञापन के बिना फलते-फूलते हैं।

उनका प्रचार मशहूर हस्तियों या बड़े नामों द्वारा नहीं किया जाता है, बल्कि रोजमर्रा के लोगों द्वारा किया जाता है, जो मुस्कुराहट के साथ आपका स्वागत करते हैं। ये लोग कभी-कभी तनावपूर्ण, कभी-कभी थके हुए, लेकिन हमेशा मेहनत करते हुए नजर आते हैं, क्योंकि उन्हें अपने परिवार और खुद का भरण-पोषण करना होता है। दिखावे के बजाए ये कड़ी मेहनत और समर्पण पर भरोसा करते हैं, जिस पर शायद हमारा ध्यान कभी नहीं जाता है।

आमतौर पर, जब कोई सामान बाजार में लॉन्च होता है, तो कई तरह से उसका प्रचार-प्रसार किया जाता है, जिससे देखते ही देखते जनता के बीच वह प्रसिद्ध हो जाता है और देखते ही देखते ब्रांड बन जाता है।

हालाँकि, सड़कों पर न जाने कितने ही सामान बेचे जा रहे हैं, जिन्हें कोई जानता तक नहीं है। कभी उन लोगों के बारे में सोचा है, जो खुद इन उत्पादों को बनाते हैं और दूर रखते हैं उन्हें दिखावे और अमीरी के चोचले से। कोई महिला सुंदर टोकरियाँ बुनती है, कोई मोची मजबूत जूते बनाता है, तो कहीं कोई किसान ताज़ी उपज उगाता है। हर किसी के पास संघर्ष और दृढ़ता की एक कहानी है। उनका काम उनके कौशल और समर्पण का प्रमाण है, फिर भी इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता, जाएगा भी कैसे? उनका सामान किसी प्रतिष्ठित लेबल के साथ नहीं आता है न!

क्या आपको वह आदमी याद है, जो आपके स्कूल के पास गुब्बारे और कैंडी बेचा करता था? आप में से कुछ लोगों को शायद उसका चेहरा भी याद न हो, लेकिन सालों बाद भी यदि आप अपने पुराने स्कूल के सामने से गुजरेंगे, तो शायद आपको वह शख्स आज भी गुब्बारे और कैंडी बेचते हुए मिलेगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब वह झुर्रियों और सफेद बालों के साथ बहुत अधिक थका हुआ दिखाई देगा, लेकिन आज भी उसी शिद्दत से बच्चों को उसकी कैंडीज़ और गुब्बारे खरीदने के लिए पुकारता हुआ नजर आएगा। यह बात और है कि आज उसकी कैंडी आपको उतना नहीं लुभा पाएगी, जितनी तब लुभाती थीं, जब आप स्कूल की छुट्टी वाली घंटी का बेसब्री से इंतज़ार करते थे। हो सकता है कि आप उसका नाम भी नहीं जानते हों, लेकिन यह जरूर याद होगा कि उसकी कैंडीज़ कितनी स्वादिष्ट हुआ करती थीं।

उसके जैसे कई लोग हैं, जो अपना पूरा जीवन सड़कों पर छोटा-मोटा सामान बेचने में बिता देते हैं। वे सारी जिंदगी वही सामान बेचते हैं, फिर भी उन्हें कोई पहचान नहीं मिलती है। अन्य किसी ब्रांड की तरह ही उनके पास भी वर्षों का अनुभव, विश्वसनीयता व निरंतरता है और शायद वे अपना सामान बहुत काम कीमतों पर बेचते हों। लेकिन, फिर भी बड़े-बड़े ब्रांड्स के पास अपनी पहचान बनाने और फलने-फूलने के लिए अवसर होते हैं, वहीं दूसरी तरफ ये लोग अपने अस्तित्व के लिए निरंतर संघर्ष करते रहते हैं।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि आज की दुनिया में लोगों में किसी सामान की गुणवत्ता से कहीं ज्यादा उसके ब्रांड का जुनून है। यह जुनून हमारे समाज के उथलेपन को साफ तौर पर दर्शाता है। इस दिखावे के कारण सड़कों पर रोज संघर्ष की नई कहानी लिखते इन लोगों को हम अक्सर नज़रअंदाज कर देते हैं। हमारे समाज में, हम किसी सामान को उसके शिल्प कौशल या गुणवत्ता से आँकने के बजाए, उसके ब्रांड नेम और प्राइस टैग से आँकते हैं। नए-नए ट्रेंड्स के पीछे भागते हुए हम, यह भूल जाते हैं कि किसी चीज़ का असली मूल्य लेबल में नहीं, बल्कि उसके पीछे की कहानी में छुपा है।

इन लोगों को इनकी पहचान दिलाने के लिए आइए एक बार विचार करें कि एक ब्रांड की सफलता क्या दर्शाती है। क्या यह सिर्फ एक नाम या लोगों से अधिक नहीं होना चाहिए? क्या इसमें समर्पण और मानवीय भावना जैसे मूल्यों की झलक नहीं होना चाहिए? अब समय आ गया है कि हम इन गुमनाम ब्रांड्स को पहचानें, जो सुर्खियों में नहीं हैं, लेकिन सिर्फ पहचान की तलाश में हैं। आखिरकार, उनकी कहानी किसी भी अन्य कहानी से ज्यादा वास्तविक और मार्मिक है।

अगली बार जब आप खरीदारी करें, तो आप अपनी पसंद किस आधार पर बना रहे हैं, यह जरूर सोचें। आप कोई सामान सिर्फ उसके ब्रांड की वजह से चुन रहे हैं या वह सामान सच में खरीदने लायक है, इस पर जरूर विचार करें और हो सके, तो इन गुमनाम कारीगरों से सामान जरूर खरीदें। हो सकता है कि इनका सामान किसी ब्रांडेड सामान की तरह फैशनेबल न हो, लेकिन इनकी अपनी खासियत है। इनसे उन्हें बनाने वाले लोगों के जीवन और संघर्ष को महत्व मिलता है। इन उत्पादों का समर्थन करके, आप सिर्फ खरीदारी ही नहीं करेंगे, बल्कि आप उनकी कड़ी मेहनत को भी स्वीकार करेंगे और उनका सम्मान भी करेंगे, जिसके वे असल में हकदार हैं।

अब समय आ गया है कि हम ब्रांड होने का असली मतलब समझें, लेबल से परे देखें और किसी सामान को उसके ब्रांड की जगह उसे बनाने वाले की मेहनत से आँकें। आइए, गरीबी के ब्रांड को चमकने का और उसकी असली कीमत को पहचाने जाने का मौका दें, क्योंकि आखिरकार, एक ब्रांड को केवल प्रसिद्धि के आधार पर ही नहीं, बल्कि प्रामाणिकता, गुणवत्ता और मानवीय भावना के आधार पर भी प्रसिद्धि मिलना चाहिए।

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