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कल्चर, कनेक्शन और क्रेडिबिलिटी: भारत में रीजनल पीआर के लिए सफलता के पिलर्स

भारत में रीजनल पीआर का प्रतीकात्मक दृश्य, जहाँ संस्कृति, स्थानीय कनेक्शन और ब्रांड विश्वसनीयता एक साथ दिखाई देती है

आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में, प्रभावी पब्लिक रिलेशन्स की महत्ता पहले से कहीं अधिक है, खासकर तब, जब बात भारत के विविध और जीवंत बाजार को नेविगेट करने की आती है। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत में किसी भी पीआर कैंपेन की सफलता कल्चर (संस्कृति), कनेक्शन (संपर्क) और क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) की तिकड़ी में महारत हासिल करने पर निर्भर करती...

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पीआर परिदृश्य में किस तरह क्राँति ला रही है क्रिएटर इकॉनमी?

ब्रांड्स के साथ काम करते कंटेंट क्रिएटर्स, पीआर और क्रिएटर इकॉनमी के बदलते परिदृश्य को दर्शाता दृश्य

कहानी कहने की कला और आकर्षक कॉन्टेंट हमेशा ही दर्शकों के मन-मस्तिष्क में विशेष स्थान रखते हैं। सोशल मीडिया के आगमन ने इस विशेष कला को ऊँचा उड़ने के लिए नए पंख दिए हैं, जिसके माध्यम से स्टोरीटेलिंग आर्टिस्ट्स को बतौर ऑनलाइन खुद को अभिव्यक्त करने के असीमित अवसरों की सौगात मिली है। पहले के समय में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स सिर्फ...

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विष्णु, शिव और पार्वती जैसे व्यक्तित्व ही कॉर्पोरेट के पूरक

विष्णु, शिव और पार्वती के प्रतीकात्मक रूप, कॉर्पोरेट में संतुलन, नवाचार और नेतृत्व को दर्शाते हुए

शिव पुराण के अनुसार, दक्ष-प्रजापति अपनी पुत्रियों के लिए ऐसे योग्य और धनवान वर चाहते थे, जो देवता हों, पृथ्वी पर जीवन को आसान बनाने में सहायक हों, जैसे कि वर्षा-देवता देवराज इंद्र या फिर अग्नि देव। वर्तमान समय में कॉर्पोरेट जगत की स्थिति भी यही है, जहाँ सबसे योग्य, सबसे कुशल और सबसे दक्ष टीम मेंबर्स की तलाश को...

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वो बातें, जो भगवान श्री कृष्ण से पीआर प्रोफेशनल्स को जरूर सीखना चाहिए

भगवद्गीता में अर्जुन को मार्गदर्शन देते भगवान श्री कृष्ण, नेतृत्व और संचार कौशल का प्रतीक

पब्लिक रिलेशन्स (पीआर) की दुनिया लगातार विकसित हो रही है। इस विकास के साथ ही साथ अपने क्षेत्र विशेष की जटिलताओं से निपटने के लिए प्रोफेशनल्स को न सिर्फ लगातार प्रेरणा, बल्कि सार्थक मार्गदर्शन की भी जरुरत होती है। गहन ज्ञान और शाश्वत शिक्षाओं का एक ऐसा ही सटीक स्रोत प्राचीन भारतीय महाकाव्य, भगवद्गीता से मिलता है। इस महाकाव्य में...

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एम्प्लॉयीज़ से चलती है कंपनी

ऑफिस में मिलकर काम करते एम्प्लॉयीज़, कंपनी की सफलता और टीमवर्क का प्रतीक

यह शत-प्रतिशत सत्य है। जब भी कोई कंपनी अपनी नींव रखने के बाद नए आयाम छूती है, तरक्की करती है, नई दिशाओं में आगे बढ़ती है और सफल होती है, तो बेशक उसमें बॉस का अहम् योगदान होता है। लेकिन सबसे बड़ा योगदान होता है, उसमें काम करने वाले एम्प्लॉयीज़ का, जो इसे अपनी कर्मस्थली मानते हैं। और सही मायने...

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बॉस या……..

टीम के साथ संवेदनशील और सहयोगी व्यवहार करता एक आदर्श बॉस

खड़ूस.. अकड़ू.. ये ऐसे अनकहे शब्द हैं, जो हमेशा ही मेरे कानों में गूँजते हैं, जब भी स्टाफ का कोई मेंबर तनी हुई भौहें लेकर गुस्से से आसपास से गुजर रहा होता है। मुँह पर कोई नहीं कह पाता, लेकिन मेरा मानना है कि बेशक स्टाफ के चुनिंदा लोगों के मन में यह नाम आ ही जाता होगा। यह तो...

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पीआर एजेंसी की जरुरत कब और क्यों?

ब्रांड ग्रोथ और कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी पर काम करती पीआर एजेंसी

एल्विन एडम्स का मानना है कि संचार के इस युग में पब्लिक रिलेशन किसी भी ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण है। आज के समय में हर तरह के ब्रांड्स, चाहे वे नए हो या पुराने, तेजी से विकास कर रहे हैं। तेजी से हो रहे इस विकास ने इंडस्ट्री के सामने अलग ब्रांड इमेज बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है,...

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सोने की चिड़िया में फिर बसने लगे प्राण

भारत के पुनर्जागरण और वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता प्रेरणादायक दृश्य

अपने पिंजरे की बेड़ियों को तोड़ते हुए अभूतपूर्व गति से उड़ने लगी सोने की चिड़िया भारत एक ऐसा नाम है, जो दुनिया के शक्तिशाली देशों के दायरे से अरसे से अछूता रहा है, यह बात और है कि किसी ज़माने में हमारे देश का दूसरा नाम ‘सोने की चिड़िया’ विश्व में शंखनाद करता था। जिस देश का कोहिनूर सदियों से...

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सेक्स एजुकेशन गलत नहीं, आज की आवश्यकता है

भारतीय शिक्षा प्रणाली में सेक्स एजुकेशन की आवश्यकता को दर्शाता जागरूक दृश्य

हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली द्वारा कलंक और रूढ़िवादिता के कारण होने वाली सामाजिक प्रतिक्रिया से बचने के लिए सेक्स एजुकेशन को बहुत आसानी से समाप्त कर दिया गया है, लेकिन इसकी कीमत तो छात्र ही चुकाते हैं। यह गंभीर समस्या आज उचित समाधान की माँग कर रही है। इससे जुड़ी शर्म की उत्पत्ति का पता लगाने और सेक्स एजुकेशन को...

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क्या हम सेक्स एजुकेशन का सच्चा विज्ञान जान पाए हैं?

भारतीय समाज में सेक्स एजुकेशन के सच्चे विज्ञान पर जागरूक संवाद

यूँ तो हमारा देश संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना ही जाता है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हम संस्कृति और सभ्यता के आड़े सत्य को न जानें। जैसा कि पिछले आर्टिकल में मैंने बात की थी कि हमारे एजुकेशन सिस्टम में सेक्स एजुकेशन का क्या स्थान है? उसी को आगे बढ़ाते हुए, अतीत में सेक्स एजुकेशन...

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