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इस बार चलते हैं उल्टी सैर पर..

छत पर परिवार के साथ चादर बिछाकर सोता हुआ पुराना भारतीय परिवार

समय के पहिए के घूमने के साथ रहन-सहन के तरीके, परम्पराओं, अन्य तौर-तरीकों और यहाँ तक कि लोगों की विचारधाराओं में भी बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। बड़े दिनों बाद कल एक परिचित के यहाँ शादी में जाना हुआ, तब मैंने यह बात गौर की, कि समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है.. बड़ा ही शानदार माहौल था।...

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गरीबी का ब्रांड

सड़क किनारे बैठा गुमनाम भारतीय कारीगर अपने हाथ से बने सामान बेचते हुए

ब्रांड वह शब्द है, जिसने दुनियाभर में तहलका मचा रखा है। यह सिर्फ एक लेबल नहीं है; यह एक धारणा है, जो हमारे विचारों को प्रभावित करती है। आज की दुनिया में हर कोई ब्रांडेड सामान की तलाश में रहता है। चाहे वह कपड़ा, खाना, इलेक्ट्रॉनिक्स या कोई अन्य दैनिक आवश्यकता की चीज़ हो, हर चीज़ को खरीदने से पहले...

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मेरा काम ही मेरी पहचान है….

बारिश के मौसम में ठेले पर गरमा-गरम पकौड़े बनाता भारतीय स्ट्रीट फूड वेंडर

एक शाम मैं अपने घर की बालकनी में अपने कुछ मित्रों के साथ बैठा था कि अचानक तेज बारिश आ गई। सुहावनी शाम और तेज बारिश में याद आई गरमा-गर्म चाय और पकौड़ों की.. बात जब पकौड़ों की चली, तो हर कोई शहर में सबसे स्वादिष्ट पकौड़े कहाँ मिलते हैं, इस पर अपनी राय परोसने लगा.. कोई कहता कि पकौड़े...

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कठिनाइयों के बीच खड़ी उम्मीद……

भारतीय सड़क किनारे सब्जी बेचता फेरीवाला सुबह के समय

शहर की हलचल भरी सड़कों पर, हॉर्न बजाते शोर और तेज़ कदमों की आवाज़ के बीच, हमारे दैनिक जीवन के गुमनाम नायक मौजूद होते हैं। ये लोग, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है और कम ही सराहा जाता है, हमारे शहरी जीवन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। फिर भी, उनकी चुनौतियों और बाधाओं से भरी यात्रा पर शायद ही कभी...

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चंद रुपयों का सौदा….

ट्रैफिक सिग्नल पर पेन बेचता एक गरीब भारतीय फेरीवाला

आजकल की दिखावे की दुनिया में यह देखना वाकई निराशाजनक है कि मानव स्वभाव कितना उथला हो सकता है। हम अक्सर वास्तविक मायने रखने वाली चीजों के बजाए चमक-दमक वाली चीजों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। दिखावे का यह जुनून हमारे समाज की प्राथमिकताओं के बारे में बहुत कुछ कहता है। यह दर्शाता है कि हम अक्सर इस बात...

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समाज पानी तो फिल्टर कर पीता है लेकिन खून नहीं

भारतीय जेल में अकेला बैठा कैदी समाज की उपेक्षा का प्रतीक

कैदियों के प्रति समाज का नज़रिया अपराधी या पीड़ित के बीच नहीं बंटा हुआ है। यह एक कटु सत्य है कि समाज के लिए एक कैदी सिर्फ अपराधी हो सकता है पीड़ित नहीं। यही सोच समाज पर भारी पड़ रही है और न केवल अपराध बल्कि अपराधियों को भी जन्म दे रही है। भारतीय समाज में कैदियों के प्रति नज़रिया...

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एक प्यारी-सी जिद…

रंगीन गुब्बारे बेचता भारतीय फेरीवाला और उसे देखते बच्चे

बचपन की वो सुनहरी यादें.. याद है जब हम अपनी छोटी-छोटी जिदें पूरी करने के लिए बड़ों से रूठ जाया करते थे। कभी गुलाबी रंग का गुब्बारा चाहिए, तो कभी रंग-बिरंगी चूड़ियाँ। घुँघरू वाले झुनझुने की खनक या फिर मुँह में मिठास घोलते गुलाबी-गुलाबी गुड़िया के बाल.. इन छोटी-छोटी चीज़ों के लिए की गई हमारी जिद, हमारे बचपन की उन...

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बिना सज़ा के ही सज़ा काट रहे हैं विचाराधीन कैदी..

भारतीय जेल में सलाखों के पीछे बैठा विचाराधीन कैदी न्याय का इंतजार करता हुआ

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ हर किसी को स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है। भारत के संविधान और न्यायपालिका का भी यही मानना है कि भले ही कोई अपराधी सज़ा पाने से बच जाए, लेकिन किसी बेगुनाह को सज़ा न हो। लेकिन, विडंबना यह है कि इस लोकतांत्रिक और न्यायप्रिय देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपना...

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अब जरुरत, जेलों को बनाया जाए

भारतीय जेल में कौशल प्रशिक्षण लेते कैदी, सुधारगृह की आवश्यकता दर्शाता दृश्य

बिगाड़गृह से सुधारगृह आज की जेलें: सुधारगृह या बिगाड़गृह? प्राचीन समय में किसी अपराधी के लिए कारावास की सज़ा को जरुरी माना जाता था। उसके पीछे तर्क यह था कि कैदियों को एकांत कारावास में रखने से उन्हें आत्म-मंथन का मौका मिले, जिससे अपराधियों में सुधार आए। हिंदू और मुगल शासन के दौरान, अपराधियों को कड़ी निगरानी में रखा जाता...

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एक गुनाह की कितनी सज़ा?

भारतीय जेल में उत्पीड़ित युवक, अपराध की सज़ा से अधिक पीड़ा झेलता कैदी

समाज की दिखावटी सुविधाओं की ऊँची-ऊँची दीवारों के पीछे, दर्द और पीड़ा की एक छिपी हुई दुनिया है। यह दुनिया है जेल के कैदियों की, जो एक गलती के लिए सज़ा के अंतहीन चक्र में फंसे हुए हैं। समाज के मायने में एक अपराध के लिए एक ही सज़ा होती है। हमें भी बस इतना ही दिखता है कि किसी...

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