सुगम होना भी जरुरी जैसा कि आप सभी जानते हैं, देश की शिक्षा नीति में लगभग 34 वर्ष बाद परिवर्तन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और शैक्षणिक ढाँचे को मजबूत बनाना है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और छात्र परिणामों पर विशेष बल दिया गया है, जिससे छात्रों के बीच एकाग्रता, सहयोग...
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महँगी होती शिक्षा की लगातार गिरती गुणवत्ता
अब न तो पहले जैसी शिक्षा रही है और न ही पहले जैसे शिक्षक एक सुबह मैं ताजी हवा खाने के लिए टहलने निकला था, रोज की तरह ही सड़कों पर पीली स्कूल बसें आती जाती दिखाई पड़ रही थीं। चौराहों पर छोटे-छोटे बच्चे स्कूल की यूनिफॉर्म पहने कँधे पर बड़ा-सा बस्ता टांगे अपनी स्कूल बसों की राह देख रहे...
Continue reading...लगातार अभ्यास मूर्ख व्यक्ति को
भी बना देता है बुद्धिमान “करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान। रसरी आवत-जात ते सिल पर परत निशान॥” कवि वृंद रचित ”वृंद सतसई” का यह दोहा पुराने समय से ही काफी प्रचलित है, जो बच्चों को स्कूल हो या घर सभी जगह सिखाया जाता है, जिसका अर्थ है कि निरंतर अभ्यास करने से मुर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है।...
Continue reading...किताबी ज्ञान के साथ-साथ
व्यावहारिक ज्ञान भी जरुरी.. एक व्यक्ति को तब तक सफल नहीं माना जा सकता, जब तक वह पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ दुनियादारी की समझ न रखे एक बार किसी काम से मेरा बैंक जाना हुआ, बैंक में भीड़ ज्यादा होने के कारण लम्बी लाइन लगी हुई थी। मैं भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने लगा, तभी मेरी...
Continue reading...गुरु कुम्हार और शिष्य घड़ा
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट। अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥ कबीर के इस दोहे का अर्थ नई पीढ़ियाँ शायद ही जानती हों। गुरु और शिष्य के उदाहरण को हम इस दोहे से बखूबी समझ सकते हैं। जिस प्रकार कुम्हार भीतर से हाथ का सहारा देकर, बाहर से चोट मारकर मटके तथा बर्तनों को गढ़ता है,...
Continue reading...खोखला बीज भला क्या काम का?
इंसान की आधारभूत जरूरतों में से पहली जरूरत रोटी होती है, जिसके लिए किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाता है, लेकिन सिर्फ मेहनत कर देने से अच्छी फसल नहीं उग जाती, इसके लिए जरूरत होती है गुणवत्ता वाले बीज की, क्योंकि जब बीज अच्छा होगा, तभी अच्छी फसल होगी और तब सही मायने में किसान की मेहनत रंग लाएगी। किसी...
Continue reading...शिक्षा व्यवस्थाओं के किए-कराए
पर पानी फेरने का काम कर रहीं परीक्षाएँ भारत में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हमेशा से उठते पेंचीदे सवाल शायद ही कभी खत्म हो सकेंगे। निरंतर आगे बढ़ते देश में शिक्षा का स्तर ऊपर जा रहा है या नीचे? क्या वास्तव में हमारे देश की शिक्षा व्यवस्थाएँ छात्रों के भविष्य को समृद्ध बनाने के काबिल हैं? ऐसे तमाम सवालों का...
Continue reading...“ओल्ड इज़ गोल्ड” कहावत एकदम खरी
आज के समय में देखा जाए तो संस्कार और शिक्षा दोनों ही बदल चुके हैं। प्राचीन समय में लोग अपने बच्चों को गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा करते थे, जहाँ वे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक ज्ञान भी अर्जित करते थे। फिर धीरे-धीरे समय बदला और अंग्रेजी सभ्यता ने भारतीय संस्कृति और परम्पराओं को जकड़ लिया।...
Continue reading...एक निवाले की कीमत……
बर्गर खाने की इच्छा हुई.. पास के मैक डोनाल्ड पर पहुँच जाओ। चाट खाने का मन हुआ.. चाट का ठेला बिल्कुल सड़क के किनारे ही है। घर के खाने से ऊब गए.. फटाफट तैयार हुए और बाहर किसी बढ़िया से होटल में खाना खा आए। हम लोगों के लिए, खाना एक रोजमर्रा का आनंद है, हमारी उँगलियों पर एक से...
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बर्गर खाने की इच्छा हुई.. पास के मैक डोनाल्ड पर पहुँच जाओ। चाट खाने का मन हुआ.. चाट का ठेला बिल्कुल सड़क के किनारे ही है। घर के खाने से ऊब गए.. फटाफट तैयार हुए और बाहर किसी बढ़िया से होटल में खाना खा आए। हम लोगों के लिए, खाना एक रोजमर्रा का आनंद है, हमारी उँगलियों पर एक से...
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