एक बच्चे के रूप में मेरा स्कूल बहुत अलग था। आज के बच्चे ऐसी शिक्षा और ऐसे बचपन से कोसों दूर हैं। चीज़ें पहचान से परे हो गई हैं। बूढ़े लोग अक्सर अतीत के बारे में बातें करते हैं। हमारे समय में ऐसा था वैसा था और न जाने क्या-क्या? लेकिन वे सही कहते हैं। आप पूछ सकते हैं कि...
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जो करना है आज ही करो, क्योंकि किसे पता कल हो न हो
“पूरा दिन पड़ा है, शाम को करता हूँ”, “इतना भी क्या जरुरी है, बाद में हो जाएगा”, “जल्दी किस बात की है, अभी नहीं तो बाद में हो ही जाएगा”, कई बार यह बाद, बाद ही रह जाता है, क्योंकि आजकल समय का कोई भरोसा नहीं है। हम सभी अपने सपनों को पूरा करने की तलाश में होते हैं, लेकिन...
Continue reading...फिर एक धमाका और तहस-नहस हुईं कई ज़िंदगियाँ
जब किसी युद्ध से बम ब्लास्ट की खबर सामने आये तो ये मालूम ही रहता है कि कसूरवार और बेकसूरवार दोनों ही तरह के लोगों की जान जा सकती है लेकिन ये क्या! एक नया शोर अचानक कानों में सुनाई दे रहा है कि हरदा जैसे छोटे से जिले में पटाख़ा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ। ब्लास्ट भी ऐसा कि 20...
Continue reading...तालीम बढ़ रही है अदब घट रहे हैं, मसला मालूम नहीं अल्फाज़ रट रहे हैं
तिल्फ़ (नन्हा शिशु) में बू आए क्या माँ-बाप के अतवार की। दूध तो डिब्बे का है, तालीम है सरकार की।। उपरोक्त दोनों पंक्तियाँ वर्तमान समय की शिक्षा का विस्तार से वर्णन करती हैं, जिनका उपयोग प्रसिद्ध उर्दू कवि अकबर इलाहाबादी ने अपने उर्दू दोहे में किया है। इसका अर्थ यह है कि माता-पिता के संस्कार उनके बच्चों में नहीं दिखते,...
Continue reading...आपके संस्कार ही आपकी पहचान हैं
कैसे संस्कार हैं इसके? कैसे संस्कार दिए हैं माता-पिता ने? इत्यादि। जब भी हम किसी बच्चे को उद्दंडता करते देखते हैं या किसी भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी उम्र का हो, को बुरा व्यवहार करते देखते हैं, तो पहला शब्द ही हमारे दिमाग में आता है ‘संस्कार’। कहते हैं बच्चों के संस्कार उनके खुद के जीवन की ही नहीं,...
Continue reading...यह कैसा संस्कार?
बच्चों को संस्कार देने से पहले, क्या हम हमारे संस्कारों पर खरे उतर रहे हैं? हम खुद में तो झाँके कि हम कितने संस्कारी हैं? संस्कारों पर बात पहले भी की जा चुकी है, आगे भी करते रहने की जरूरत रहेगी और तब तक रहेगी जब तक हम उस संस्कार के पेड़ के नीचे वापस न बैठ जाएँ। यह बड़े...
Continue reading...नारा नहीं हैं, ‘राम’
“जबरदस्ती के ‘जय श्री राम’ में सब कुछ है, बस राम नहीं” जगविदित है अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह होने जा रहा है। शतकों के इंतज़ार के बाद यह दिन हमें देखने को मिल रहा है। लोग अपने-अपने अंदाज में अपने भाव व्यक्त कर रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर श्रीराम को लेकर एक...
Continue reading...समानता की दौड़ से परे नारी का अस्तित्व
आज हमारा समाज महिलाओं और पुरुषों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता की वकालत कर रहा है। लेकिन यह निराशाजनक तथ्य है और मुझे इस विचारधारा से बहुत नफरत है। अब बेवजह तो कुछ भी नहीं होता, तो जाहिर है इसकी भी वजह होगी और है भी। इंसान का उसके जन्म के समय से ही जेंडर निर्धारित कर दिया जाता...
Continue reading...देश की महिला सशक्त है: मूर्त वास्तविकता या महज़ एक भ्रम?
महिला सशक्तिकरण, नारीवाद और समान अधिकारों की तलाश एक अरसे से बाट निहार रही है कि उसे हमारे समाज के किसी कोने में थोड़ी-सी ही सही, लेकिन जगह मिल जाए। हालाँकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि हमने पिछले कुछ दशकों में महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में निर्विवाद रूप से प्रगति की है, लेकिन इस बात को...
Continue reading...अब कम उम्र के लोगों को कैंसर की चपत
कम उम्र के लोगों को तेजी से अपना शिकार बना रहा कैंसर युवाओं को अपनी चपेट में लेने को उतारू- कैंसर मेरे एक परिचित हैं रोहन, पिछले साल उनमें अचानक तेज पेट दर्द की समस्या पनपने लगी। इसे सामान्य समस्या समझकर उन्होंने प्रारंभिक उपचार के लिए डॉक्टर से सलाह ली। डॉक्टर ने संबंधित जाँचें लिख दी यह पता लगाने के...
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