आदत आदत की बात है

सुबह दौड़ लगाता एक भारतीय सैनिक और छाया में बदलता विद्रोही चेहरा

अच्छी आदतों से ‘शक्ति’ का जन्म होता है और बुरी आदतों से ‘बर्बादी’ का

आदत.. यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक शक्ति है, जो इंसान को ऊँचाइयों तक ले जा भी सकती है और उसे बर्बादी के गहरे गर्त में धकेल भी सकती है। सच तो यह है कि आदतें ही हमें इंसान बनाती हैं, और आदतें ही हमें हैवान भी बना सकती हैं। कुल मिलाकर, हर आदत की अपनी एक पहचान होती है, और फिर यही पहचान हमें सिर्फ खुद से ही नहीं, बल्कि पूरे समाज से भी मिलती है। अच्छे कामों की आदतें अपनाने वाला इंसान समाज में अलग पहचान रखता है और खूब सम्मान पाता है, जबकि बुरी आदतें उसे सिवाए पतन के कहीं और नहीं ले जाती हैं, जहाँ न सिर्फ उसकी अपनी पहचान खत्म हो जाती है, बल्कि समाज में भी उसकी छवि एक खलनायक के समान बन जाती है।

आपने कभी गौर किया है कि समाज के वे लोग, जो जीवन में बड़ा नाम और कामयाबी हासिल करते हैं, उनमें क्या खास बात होती है? क्या वे कोई अलौकिक शक्तियाँ रखते हैं? नहीं, वे सिर्फ अपनी आदतों की वजह से ही सफल होते हैं। उनका सुबह का वक्त, उनकी जीवनशैली, किसी के काम आने की उनकी ललक, हँसकर बोलने का उनका स्वभाव, उनका आचरण, उनका बोल-चाल का सलीका, उनका सोचने का तरीका; यह सब आदतों का ही परिणाम होता है। ये आदतें ही उन्हें अपने लक्ष्य के करीब लाती हैं। 

लेकिन दूसरी ओर, जब किसी इंसान की आदतें गलत दिशा में मुड़ जाती हैं, तो वह किसी भयानक मुसीबत का कारण बन सकती हैं। आदत ही एक व्यक्ति को इंसान बना सकती है और आदत ही है, जो उसे हैवान भी बना सकती है। यह वह शक्ति है, जिससे एक व्यक्ति की पूरे समाज में जय-जयकार होने लगती है, वहीं आदत से ही कुछ लोग अपनी कई पीढ़ियों को शर्मसार कर बैठते हैं। वे तरह-तरह के जुर्म करने लगते हैं। वे सीरियल किलर बन जाते हैं। फिर कुछ लोग एक के बाद एक बलात्कार करते हुए, न सिर्फ अपना चेहरा, बल्कि पहचान भी छिपाए फिरते हैं। मैं यह नहीं कहता कि हर व्यक्ति जान-बूझकर गलत आदतें अपनाता है, कई बार गलत परिस्थितियाँ भी इंसान को गलत आदत अपनाने पर मजबूर कर देती हैं।

आपने पान सिंह तोमर के बारे में तो सुना ही होगा न.. एक फौजी, जो पूरी दुनिया में अपनी दौड़ने की कला से जाना जाता था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। फौजी बनने के लिए पान सिंह तोमर ने खूब पसीना बहाया। सुबह चार बजे जब लोग नींद में होते, तो वे खेतों में दौड़ते हुए कई किलोमीटर नाप चुके होते थे। कई महीनों की मेहनत के बाद उनका सपना साकार होने वाला था। सेना की भर्ती निकली और अच्छी कद काठी के कारण वे पहली कोशिश में ही सिपाही बन गए। 

पान सिंह तोमर ने फौजी बनने के लिए कड़ी मेहनत की थी। उनकी इस मेहनत, अनुशासन शौक के तौर पर दौड़ने की आदत ने उन्हें एक उत्कृष्ट सैनिक और एथलीट बनाया। उन्होंने सात बार राष्ट्रीय स्टीपलचेज के चैम्पियनशिप जीती और 1952 के एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। लेकिन, फिर परिवार के साथ भूमि विवाद और न्याय की अनदेखी ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। अफसरों के सामने कई बार गिड़गिड़ाए। फरियाद लेकर कलेक्टर के पास भी गए और दौड़ में जीते मेडल दिखाए। कलेक्टर ने मेडल जमीन पर फेंक दिए और उन्हें धक्के मारकर दफ्तर से बाहर निकलवा दिया। 

कहीं से भी मदद न मिली। मायूस होकर जब घर लौटे, तो माँ की आँखों से बहते आँसू देख न सके। पान सिंह का खून खौल उठा। अब एक अनुशासित फौजी का कानून से भरोसा उठ गया। सालों तक देश के लिए पसीना बहाने वाला फौजी बदले की आग में जलने लगा; यहीं से पैदा हुआ एक खतरनाक डकैत पान सिंह तोमर। यहाँ पान सिंह तोमर गलत आदत का शिकार हो गए और गले के मैडल किनारे करके कँधे पर बन्दूक तान ली। बस फिर क्या ही होना था, जमीन हड़पने वाले परिवार के एक-एक सदस्य को पान सिंह ने गोलियों से भून डाला। अब तक पान सिंह तोमर चंबल के बीहड़ों का सबसे खूंखार डकैत बन चुका था। अब पूरा चंबल पान सिंह की दहाड़ से थर्राने लगा, वह बागी जो बन चुका था। 

फौज की ट्रेनिंग ने तोमर को इतना मजबूत बना दिया था कि हर बार पुलिस को औंधे मुँह गिरना पड़ता। वह कहते हैं न “सौ सुनार की, तो एक लौहार की..”। एक दिन 500 से ज्यादा सुरक्षाबलों ने डकैत पान सिंह तोमर को चंबल में घेर लिया और सैकड़ों राउंड की फायरिंग में पान सिंह तोमर और उसके कई साथी मारे गए।

पान सिंह तोमर का विद्रोह एक ऐसी व्यवस्था के खिलाफ था, जिसने एक अनुशासित सिपाही और एक बेहतरीन धावक के नाम को मिट्टी में मिला दिया। एक गलत आदत ने देश के सपूत को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया।

पान सिंह तोमर के इस उदाहरण से यह समझा जा सकता है कि आदतें हमें वही बना सकती हैं, जो हम चाहें। आदतें ही हैं, जो हमारे जीवन की सबसे मजबूत ताकत होती हैं। चाहे हम अच्छा काम करें या बुरा, हमारी आदतें हमें उसी रास्ते पर ले जाती हैं। इसलिए, अपनी आदतों को समझें और उन्हें सही दिशा में लगाएँ, ताकि हम अपने जीवन को और अपने समाज को बेहतर बना सकें।

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