किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी जरुरी..

किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक ज्ञान की कमी दर्शाता दृश्य

एक व्यक्ति को तब तक सफल नहीं माना जा सकता, जब तक वह पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ दुनियादारी की समझ न रखे

एक बार किसी काम से मेरा बैंक जाना हुआ, बैंक में भीड़ ज्यादा होने के कारण लम्बी लाइन लगी हुई थी। मैं भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने लगा, तभी मेरी नजर वेटिंग एरिया में लगी बेंच पर पड़ी। वहाँ लगभग 14 से 15 साल का एक बच्चा अपने फोन में गेम खेलने में व्यस्त था। वह अपने गेम में इतना व्यस्त था कि उसे यह भी ध्यान नहीं कि वह कहाँ है और आस-पास क्या हो रहा है।

कुछ देर बाद एक बुजुर्ग महिला उस बच्चे के पास कोई फॉर्म लेकर आई और उससे वह फॉर्म भरने के लिए मदद माँगने लगी। बच्चे ने थोड़ी देर वह फॉर्म अलट-पलट कर देखा फिर उन महिला को यह कहते हुए वापस कर दिया कि उसे वह फॉर्म भरना नहीं आता। बुजुर्ग महिला भी “कोई बात नहीं बेटा” कह कर वहाँ से चल दी। फिर मैंने ही आगे रहकर उनसे वह फॉर्म माँगा और उन्हें भर कर दिया। साथ ही बताया कि इसे कहा जमा करना है। उन महिला की मदद तो मैंने कर दी, लेकिन यह देखकर बड़ी हैरानी हुई कि इतने बड़े बच्चे को बैंक का एक साधारण-सा फॉर्म तक भरना नहीं आता, जबकि उसे देख कर तो लग रहा था कि वह किसी नामी स्कूल में जाता होगा। इस वाकये को देख कर समझ नहीं आया कि क्या कहूँ और किसे दोष दूँ? उस बच्चे को, उसके माता-पिता को या फिर उस स्कूल को, जहाँ वह जाता होगा? या हमारी शिक्षा व्यवस्था को, जिसमें हम अपने बच्चों को केवल किताबी ज्ञान दे कर अपना काम पूरा मान रहे हैं या यूँ कह लें कि अपने हाथ झटक रहे हैं।

लेकिन, हाथ क्या सिर्फ स्कूल वाले ही झटक रहे हैं? नहीं, इसमें माता-पिता का योगदान भी बराबरी का है। नई पीढ़ी के बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान की कमी का मुख्य कारण यह है कि आजकल के अभिभावक अपने बच्चे को किसी नामी-गिरामी स्कूल में एडमिशन दिला कर निश्चिंत हो जाते हैं।

उन्हें लगता है कि बस, अब तो उनके बच्चे की लाइफ सेट हो गयी, अब तो वह एक कामयाब इंसान बन कर ही स्कूल से बाहर निकलेगा। उसके बाद न घर में उन्हें दुनियादारी की समझ देने के लिए कुछ सिखाया जाता है और न ही स्कूल में इन चीजों पर ध्यान दिया जाता है।

मेरा प्रश्न है कि क्या सच में सिर्फ किताबी ज्ञान देकर हम अपने बच्चों को सफल बना लेंगे? क्या व्यवहारिक ज्ञान भी उतना ही जरुरी नहीं, जितना किताबी ज्ञान है? बेशक जरुरी है, मेरे हिसाब से तो किताबी ज्ञान जितना जरुरी है, व्यावहारिक ज्ञान भी उतना ही जरुरी है। एक व्यक्ति को तब तक सफल नहीं माना जा सकता, जब तक वह पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ दुनियादारी की समझ न रखे।

आज हालात ये हैं कि बच्चों को रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों का भी ज्ञान नहीं हैं। उन्हें न तो हमारी संस्कृति और सभ्यता के बारे में कुछ पता है और न ही दैनिक-दिनचर्या के काम-काज की कोई जानकारी है, जैसे- बैंक के छोटे-मोटे फॉर्म भरना, हिसाब-किताब, घरेलू काम-काज आदि। किताबी ज्ञान भी जो है, वह भी बस परीक्षा में अच्छे नंबर लाने तक ही सीमित है, उस ज्ञान की व्यवहारिक उपयोगिता का कोई अता-पता नहीं है। क्या इस तरह हम अपने बच्चों की शिक्षित करके उन्हें सफल बना लेंगे? मेरे हिसाब से तो नहीं। इस तरह तो बच्चे न शिक्षित हो पाएँगे और न ही व्यावहारिक बन पाएँगे।

क्या हम हमारे बच्चों के लिए ऐसा भविष्य चाहते हैं? यदि नहीं, तो व्यावहारिक ज्ञान देने की शुरुआत हमें सबसे पहले अपने घर से ही करना होगी। कहते हैं घर किसी व्यक्ति की पहली पाठशाला होता है और माँ उसकी पहली गुरु। आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनके पीछे उनकी माँ के द्वारा दिए गए संस्कार और सीख ही थी, जिन्होंने उन्हें जीवन में सफल बनाया।

हमें भी यदि हमारे बच्चों को जीवन में सफल बनाना है, तो उन्हें किताबी ज्ञान के साथ-साथ दुनियादारी की समझ भी देना होगी और इसकी शुरुआत अपने घर से ही करना होगी। इसके लिए जरुरी है कि बच्चों को कच्ची उम्र से ही घर के काम-काज सिखाएँ, घर के सभी फैसलों में उन्हें भी शामिल करें और उनकी भी राय लें। इससे न सिर्फ बच्चो में जिम्मेदारी का भाव बढ़ेगा, बल्कि उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ेगी। घर के छोटे-मोटे हिसाब-किताब भी उनसे करवाएँ। इससे उन्हें पैसे सँभालने की समझ आएगी। स्कूल में भी किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ बच्चों को एक-एक जिम्मेदारी दें, जिससे उन्हें टीम वर्क में काम करने की समझ आएगी। स्कूल में पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ जीवन में काम आने वाले हुनर भी उन्हें सिखाएँ। साथ ही, किताबी ज्ञान को भी सिर्फ परीक्षा में पास होने के लिए सीमित रखने के बजाए जीवन में उसकी उपयोगिता भी सिखाई जाए।

तब ही बच्चे व्यावहारिक ज्ञान सीख पाएँगे और अपने जीवन में सफल भी हो पाएँगे। आखिर ये बच्चे ही तो देश का भविष्य हैं। इनकी समझ और बुद्धि पर ही हमारा आने वाला कल टिका है। यदि हमें अपना और देश का भविष्य उज्जवल करना है, तो नई पीढ़ी को अभी से तैयार करना होगा। इसके लिए जरुरी है कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान पर भी ध्यान दिया जाए।

Share