सच्चे रिश्तेदार

शादी में भीड़ और सच्चे रिश्तेदारों का फर्क

शादियों का मौसम शुरू हो चुका है, और हर रोज लाखों की तादाद में शादियाँ हो रही हैं। आप लोग भी रिश्तेदारों और परिचितों की शादियों में मेहमान नवाजी का लुफ्त उठा ही रहे होंगे। आजकल की शादियों में 500-700 मेहमान बुलाना तो आम बात है। कहीं-कहीं तो यह संख्या हजारों में भी देखने को मिल जाती है। ज्यादा से ज्यादा मेहमान बुलाना इस बात का प्रमाण हो गया है कि आपका आयोजन कितना भव्य रहा। जिसके यहाँ जितने अधिक मेहमान, उसका आयोजन उतना ही सफल माना जाता है। उस पर यदि आपके मेहमानों की लिस्ट में किसी बड़े अभिनेता, राजनेता या सेलिब्रिटी का नाम जुड़ गया, तो फिर तो आपके यहाँ के आयोजन को लम्बे समय तक याद रखा जाएगा….

इस लिस्ट में कई ऐसे रिश्तेदार भी शामिल होते हैं, जिन्हें आपने सालों से नहीं देखा है, जो आपके सुख-दुःख में शायद ही कभी खड़े रहे हों, लेकिन शादी के भोज में वे जरुर नजर आ जाएँगे। ये वही लोग हैं, जो आप ही के आयोजन में आएँगे, आयोजन का आनंद लेंगे और बाद में आयोजन की कमियाँ निकालते नजर आएँगे। मुझे परेशानी मेहमानों से नहीं है। आपका आयोजन है, बेशक आप चाहे जितने अतिथियों का स्वागत करें, लेकिन इतने मेहमान बुलाना क्या सच में आवश्यक है। वो भी वे लोग, जो आपके आयोजन में आकर उस आयोजन की ही दस कमियाँ निकलने से नहीं चुकेंगे, उन्हें आमंत्रित कर उनके लिए अपनी सालों से जुटाई पूँजी को खर्च करना क्या सही है? ज़रा आप ही विचार कीजिए….। 

इसमें गलती सिर्फ उन मेहमानों की ही नहीं है, थोड़ी हमारी भी है। शादी-ब्याह के आयोजन के नाम पर हमें भी तो न जाने कहाँ-कहाँ के रिश्तेदार याद आ जाते हैं, जिन्हें सालों से देखा तक नहीं, उन्हें भी बुलाना हमारे लिए जरुरी हो जाता है। जिन मेहमानों ने सालों में कभी सुध नहीं ली, सुख-दुःख के समय में हमारे लिए कभी खड़े नहीं हुए, जिन्होंने जरुरत पड़ने पर कभी आपके लिए चार पैसे या एक युनिट खून की मदद तक नहीं की, सिर्फ दिखावा करने या झूठी वाह-वाही के लिए उन पर अपनी कमाई खर्च करना क्या सही है? कई लोग तो कर्ज लेकर भी इस दिखावे का समर्थन करते हैं, जो मेरे विचार में किसी भी प्रकार से सही नहीं है।

अगर आपको अपना आयोजन बड़े स्तर पर करना ही है, तो इन दूर के रिश्तेदारों को बुलाने से कहीं ज्यादा बेहतर है, उन शुभचिंतकों को अपनी खुशियों में शामिल किया जाए, जिन्होंने मुसीबत के समय पर आपका साथ दिया हो। वे लोग जिनका आपके दैनिक जीवन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई न कोई योगदान रहा हो। मेरा मानना है कि आपकी खुशियों में शामिल होने के असली हकदार वे ही लोग हैं, जो जरुरत पड़ने पर आपके साथ खड़े रहे हों, फिर चाहे उनसे आपका कोई खून का रिश्ता हो या न हो। बस यही आपके अपने हैं बाकी सब गैर हैं। 

इसलिए शादी-ब्याह या किसी भी बड़े आयोजन में भारी भीड़ जमा करने से बेहतर है उन लोगों को अपनी खुशियों में शामिल करना, जो सच में आपकी खुशियों में शामिल होने के हकदार हैं, इससे आपकी खुशियों में सिर्फ आपके शुभचिंतक शामिल हो सकेंगे और ये आयोजन आपकी जेब पर भी भारी नहीं पड़ेंगे। साथ ही आप भी अपनी खुशियों का उत्सव बिना किसी चिंता के मना पाएँगे।

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