भीड़ में खामोशी..
हलचल भरी और खचाखच भीड़ वाली सड़कों पर जहाँ शहरी जीवन की दैनिक लय लोगों के जमावड़े के साथ पूरी होती है, वहाँ इस भीड़ के भारी शोर के बीचों-बीच कुछ लोग चुपचाप सादगी से चंद रुपए कमाने की आस में खुद से ही एक खामोश जंग लड़ रहे होते हैं। उनके जीवन का यह पिन ड्रॉप साइलेन्स बिल्कुल वैसा ही होता है, जैसे क्लास में हल्ला होने पर टीचर बच्चों को चुप होने के लिए कहती हैं, और उसके बाद एक अजीब-सा सन्नाटा छा जाता है उस क्लास में, जिसमें अभी चंद मिनट पहले मानों सब्जी बाजार लगा हुआ था।
कल्पना कीजिए एक फल विक्रेता की, जिसका ठेला कई तरह के रंग-बिरंगे फलों से सजा हुआ है, दर्जी कपड़े में न जाने कितनी कहानियाँ सिल रहा है, और मोची खुले आसमान के नीचे पहने हुए जूतों की मरम्मत कर रहा है। उनके छोटे-से व्यवसाय में आकर्षक लोगो या विज्ञापन के बड़े-बड़े बजट नहीं होते, ये बिना ब्रांडिंग के ही फलते-फूलते हैं। ये फलते-फूलते हैं उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और दरियादिली से, जिसके बूते ग्राहक खुद ही उनकी तरफ खींचे चले आते हैं। उनका यह स्वभाव और अथाह मेहनत ही उनके द्वारा बेचे जाने वाले सामान का वास्तविक ब्रांड है। यह बहुत गहरा कारक है, लेकिन अफसोस, हम में से किसी का भी इस बात पर ध्यान नहीं जाता है।
तथ्य यह है कि हमारा समाज अक्सर प्रोडक्ट्स की वास्तविक गुणवत्ता से अधिक ब्रांड के नामों को महत्व देता है। साफ शब्दों में कहूँ, तो हम सामान पर लगे लेबल को देखकर ब्रांड को आँकते हैं। लेबल पर यह फोकस हमारे सतही मूल्यों को दर्शाता है। उनकी कड़ी मेहनत और कौशल के बावजूद, रोजमर्रा के कारीगरों को अक्सर नज़रअंदाज कर दिया जाता है। हम सोचते हैं कि असली मोल ब्रांड के नाम और ऊँची कीमतों वाले टैग से आता है, लेकिन हम गैर-ब्रांडेड वस्तुओं की प्रामाणिकता और शिल्प कौशल को भूल जाते हैं। हम रुझानों की पूँछ पकड़ कर उनके पीछे-पीछे चलते जाते हैं, फिर हमें इस बात से भी कोई मतलब नहीं होता कि वह हमें किस दिशा में ले जा रही है। हम भेड़ चाल के साथ चलते चले जाते हैं और इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि असली मूल्य किसी प्रोडक्ट के सार और उसके पीछे की कहानी में निहित होता है, लेबल में नहीं।
उन लोगों की कहानियों के बारे में सोचने के लिए कुछ समय निकालें, जो आपकी भाषा में बिना ब्रांड वाले प्रोडक्ट्स या सेवाएँ देते हैं। महिलाएँ अपने हाथों की जादूगरी से सुंदर-सुंदर टोकरियाँ और चटाइयाँ बुनती हैं, पुरुष अपने हाथों से मजबूत जूते बनाता है, किसान ताज़ी सब्जियाँ उगाता है, कुम्हार मिट्टी में जान फूँककर एक से एक बढ़कर बर्तन और सजावट के सामान बनाता है, दर्जी घंटों बैठकर आपके लिए एक-से बढ़कर एक परिधान सिलता है, मंदिर और बाग-बगीचों के बाहर गुड़िया के बाल बेचने वाला चिलचिलाती धूप में सिर्फ इसी आस में बिना किसी शिकायत के अपना पसीना पानी की तरह बहाता है कि शायद कोई बच्चा उसके इन गुड़िया के बाल को देखकर जिद कर लेगा, और उसकी चंद कमाई हो जाएगी। ऐसे, हजारों उदाहरण हैं, जिनके बारे में यदि बात करने बैठा, तो लेख खत्म हो जाएगा, लेकिन उदाहरण नहीं।
मेरे मायने में ये लोग ही चलते-फिरते ब्रांड हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास संघर्ष और दृढ़ता की अपनी एक अलग कहानी है। कहानी, जो न सिर्फ अनकही, बल्कि अनसुनी भी है। उनका काम उनके कौशल और समर्पण को दर्शाता है, फिर भी इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता, क्योंकि यह किसी प्रतिष्ठित लेबल के साथ नहीं आता है।
अगली बार जब आप खरीदारी करें, तो अपनी पसंद के प्रभाव पर एक बार विचार जरूर करें। आपके द्वारा खरीदी गई ब्रांडेड वस्तुएँ बेशक फैशनेबल हो सकती हैं, लेकिन गैर-ब्रांडेड वस्तुओं का मूल्य उससे भी अधिक गहरा होता है। एक मूल्य, जो उन्हें बनाने वाले लोगों के जीवन और संघर्ष में निहित होता है। यदि आप इन प्रोडक्ट्स का समर्थन करने लगेंगे, तो आपको बता दूँ, आप चंद वस्तुओं की खरीदारी ही नहीं करेंगे, बल्कि आप उनकी कड़ी मेहनत को भी स्वीकार करेंगे और उनका और उनके काम का सम्मान भी करेंगे।
अब समय आ गया है कि हम एक ब्रांड होने के मतलब की परिभाषा एक बार फिर से रचें। समय है लेबल और मूल्य टैग से परे देखने का और प्रोडक्ट्स और उनके पीछे के लोगों के वास्तविक मूल्य को समझने का, उस भावना को समझने का, जो किसी ब्रांड से कम नहीं। अमीर की ब्रांड को तो हर कोई चमकाता है, क्यों न इस बार गरीबी के ब्रांड को भी चमकने का मौका दिया जाए और उनके ब्रांड को भी ब्रांड बनाया जाए। आखिरकार, एक ब्रांड की पहचान सिर्फ लोकप्रियता और भाग्य तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रामाणिकता, गुणवत्ता और इंसान की भावना के बारे में होना चाहिए। जरुरत है अनब्रांडेड, अनदेखे और कम मूल्यों वाली वस्तुओं की सराहना करें और उनका समर्थन करें। ऐसा करके, हम उन लोगों के जीवन को सफल बनाने में अभूतपूर्व योगदान देते हैं, जो स्वयं दिन-रात एक करके अथाह मेहनत से इन सामग्रियों को बनाते हैं और अपने जीवन को मानवता के सच्चे सार से समृद्ध करते हैं।