Indian Politics

घुमंतू समाज के नए जीवन का आधार बनेगा राष्ट्रीय स्तर का कॉमन आइडेंटिटी कार्ड

घुमंतू समाज के लिए कॉमन आइडेंटिटी कार्ड की अवधारणा दर्शाती तस्वीर

भारत में घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त जातियों की संख्या देश की कुल आबादी की लगभग 10% है, जो अपनी खानाबदोश जीवनशैली के कारण अक्सर सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुविधाओं से वंचित रहते हैं। हाल ही में राजस्थान सरकार ने इन समुदायों के बच्चों के लिए घुमंतू जाति पहचान पत्र जारी किया है, जिससे वे बिना स्थायी दस्तावेजों के भी स्कूलों...

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बुंदेलखंड की बदहाली को बदलने का दस सूत्रीय रोडमैप

बुंदेलखंड के विकास और ग्रामीण बदलाव को दर्शाती तस्वीर

बुंदेलखंड की धरती, जो कभी अपनी वीरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व विख्यात थी, आज गरीबी, बेरोजगारी और पलायन के अभिशाप से कराह रही है। यहाँ के गाँवों में फैली भुखमरी और अभाव की स्थिति किसी से छिपी नहीं है, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठी सरकार शायद इस चीख को सुनने में असमर्थ है। नीति आयोग का बहुआयामी...

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दिग्विजय से शिवराज, कमलनाथ से मोहन यादव तक, ऐसा रहा मध्य प्रदेश का सियासी उठा-पटक

मध्य प्रदेश की बदलती राजनीति और सत्ता परिवर्तन को दर्शाती तस्वीर

मध्य प्रदेश की सियासत का मिज़ाज़ देश के अन्य राज्यों से जरा जुदा है। 1956 में राज्य के गठन के बाद से इस धरती ने राजनीति के कई रंग देखे हैं। कभी कांग्रेस का एकछत्र राज, तो कभी भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला, लेकिन पिछले तीन दशकों का इतिहास इस बात का गवाह है कि यहाँ की सत्ता कभी...

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दो दलों के बीच घूमता छत्तीसगढ़ का राजनीतिक चक्रव्यूह

छत्तीसगढ़ की बदलती राजनीति और भाजपा-कांग्रेस संघर्ष को दर्शाती तस्वीर

छत्तीसगढ़ की राजनीति का मिज़ाज़ देश के अन्य राज्यों से बिल्कुल जुदा है। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर बने इस राज्य ने अपने अब तक के सफर में कई राजनीतिक करवटें बदली हैं। यहां के शांत दिखने वाले मतदाताओं की राजनीतिक परिपक्वता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे किसी भी दल...

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मुलायम, मायावती से योगी तक, कैसा रहा दिल्ली की गद्दी का रास्ता तय करने वाले उत्तर प्रदेश की सियासत का अब तक का सफर

उत्तर प्रदेश की राजनीति के बदलते दौर को दर्शाती तस्वीर

भारतीय राजनीति में एक कहावत बहुत मशहूर है कि देश के प्रधानमंत्री का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। यह बात यूँ ही नहीं कही जाती, क्योंकि 80 लोकसभा सीटों वाला यह राज्य देश की सत्ता का मुख्य केंद्र रहा है। आजादी के बाद से देश को मिले 15 प्रधानमंत्रियों में से 9 इसी मिट्टी से निकले हैं। लगभग...

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यूपीए का दशक: मनमोहन की मौन सरकार और उपलब्धियों-विवादों की कहानी

यूपीए सरकार के दशक और मनमोहन सिंह के नेतृत्व को दर्शाती तस्वीर

भारतीय राजनीति में 2004 से 2014 का दशक एक ऐसा विरोधाभासी और जटिल अध्याय है, जिसका मूल्यांकन एकतरफा नहीं किया जा सकता। एक राजनीतिक रणनीतिकार के चश्मे से देखने पर महसूस होता है कि यह वह ऐतिहासिक दौर था, जब भारत ने इतिहास की सबसे तेज आर्थिक विकास दर दर्ज की और अभूतपूर्व लोक-कल्याणकारी सामाजिक सुधारों की नींव रखी, लेकिन...

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क्या 2047 तक भारत सच में विश्वगुरु बन पाएगा?

2047 तक विकसित और विश्वगुरु भारत की कल्पना को दर्शाती तस्वीर

जब भारत 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे करेगा, तब वह केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव नहीं मना रहा होगा, बल्कि अपने अब तक के राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक सफर का गंभीर आत्म-मूल्यांकन भी कर रहा होगा। यह पड़ताल सिर्फ यह नहीं देखेगी कि देश ने कितनी आर्थिक तरक्की की, कितनी सड़कें बनीं या कितनी गगनचुंबी इमारतें खड़ी...

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अनुप्रिया पटेल की राजनीति और जनसेवा का सफर

अनुप्रिया पटेल को जनसेवा और विकास कार्यों के बीच दर्शाती तस्वीर

भारतीय राजनीति में कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो अक्सर मंत्रियों को उनके मंत्रालय तक ही सीमित देखा जाता है। लेकिन, केंद्रीय राज्य मंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को उन अपवादों में ही शामिल किया जा सकता है, जो मंत्रालय की जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक कर्तव्यों के निर्वहन में भी पहली पंक्ति में खड़ी नजर...

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मोदी के बाद बीजेपी का भविष्य क्या होगा?

मोदी के बाद बीजेपी के भविष्य और नए नेतृत्व को दर्शाती तस्वीर

भारतीय राजनीति के वर्तमान दौर को यदि मोदी युग कहा जाए, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले एक दशक में न केवल देश की सत्ता संभाली, बल्कि राजनीति के व्याकरण को ही बदल दिया। गुजरात के वडनगर की साधारण गलियों से निकलकर विश्व पटल पर छा जाने वाले मोदी का सफर संघर्ष और दूरदर्शिता की एक...

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भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व की बदलती भूमिका

भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को दर्शाती तस्वीर

भारतीय लोकतंत्र की मूल शक्ति उसकी विविधता, विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, विचारधाराओं और समूहों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की संरचना में निहित है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए नेता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आकार देते हैं। इस व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में मुस्लिम समुदाय का योगदान केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि नीति-निर्माण, संगठनात्मक राजनीति, विदेश नीति, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय...

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