admin

जनता को इस बात से फर्क पड़ना चाहिए कि उनका प्रतिनिधि शिक्षित है या नहीं

जनता राजनीतिक नेता से शिक्षा और जवाबदेही की अपेक्षा करती हुई

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और इसकी सफलता इसके नेताओं या राजनीतिज्ञों की शैक्षणिक योग्यता पर निर्भर है। इस मुद्दे पर बहस लाज़मी है कि क्या राजनेताओं के लिए शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य किया जाना चाहिए? वर्ष 2015 में हरियाणा सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षिक मानदंड निर्धारित करते हुए हरियाणा पंचायती राज...

Continue reading...

नीतीश का राजनीतिक चरित्र समझना उन्हें पलटीमार बताने जितना आसान नहीं

भारतीय राजनीति में रणनीतिक नेतृत्व दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य

कुछ ही महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 9वीं बार शपथ लेने वाले नीतीश कुमार, राजधानी पटना में 18 विपक्षी दलों के साथ बीजेपी के खिलाफ पहली बैठक की मेजबानी कर रहे थे। आगामी लोकसभा चुनावों से पूर्व यह पहला मौका था, जब बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी के लिए एक संगठित विपक्ष की चुनौती तैयार हो रही...

Continue reading...

राजनेताओं की शैक्षणिक योग्यता का मुद्दा बहुत गंभीर है: राजनेताओं को शिक्षित होना ही चाहिए

राजनेता की खाली कुर्सी, किताबें और संसद की पृष्ठभूमि वाला प्रतीकात्मक दृश्य

राजनीति में ‘शैक्षिक योग्यता’ तय होना जरूरी क्यों नहीं? कम से कम एक सरकारी अफसर को उचित मार्गदर्शन के लिए साथ रखा जाए काफी समय से इतना सोचने के बाद, आज मैं “हमारे भारत देश के राजनेताओं की शैक्षणिक योग्यता” विषय पर अपने विचार लिखने को तैयार हूँ। हममें से बहुत से लोग इस बात से वास्ता रखते होंगे कि...

Continue reading...

2030 के भारत को केंद्र में रखकर चुने गए 3 राज्यों के मुख्यमंत्री

Minimalistic map highlighting MP, Rajasthan and Chhattisgarh with SDG icons

2030 के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर हुआ एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों का चुनाव तीन राज्यों में हुए हालिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत ने आम जनमानस के साथ दोनों प्रमुख दलों को भी चौंकाने का काम किया, लेकिन इससे भी कहीं अधिक इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के चुनाव ने सत्ता दल के दिग्गज नेताओं...

Continue reading...

‘डर्टी पॉलिटिक्स’ के खेल में बुरे फँसे भारतीय युवा

भारत की प्रगति की भव्य चौखट पर, राजनीति का स्थान हमेशा से ही केंद्र में रहा है। हालाँकि, अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे अक्सर ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ के रूप में वर्णित किया जाता है। घिनौनी राजनीति का यह एक ऐसा टैग बन चुका है, जिसने खुद को हमारी सामूहिक समझ के ताने-बाने में काफी बुरी...

Continue reading...

समावेशिता और प्रतिनिधित्व के आह्वान से ही राजनीति में सशक्त बन सकेंगे भारत के युवा

भारतीय राजनीति में युवा प्रतिनिधित्व और समावेशिता को दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र, संसद और युवा चिन्हों के साथ।

वास्तविक लोकतंत्र का आधार लोकप्रिय संप्रभुता को माना जाता है, जहाँ सरकार को स्वयं लोगों से शक्ति प्राप्त होती है। निर्वाचित अधिकारी तब तक ही अधिकार रखते हैं, जब तक वे नागरिकों की इच्छा और आकाँक्षाओं के अनुरूप होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि वास्तविक रूप से वे लोग सशक्त रहें, जो लोकतंत्र के हित में कार्य करते हैं।...

Continue reading...

लोकतंत्र को आकार देने में युवा मतदाताओं की भूमिका अहम्

भारत के युवा मतदाता मतदान करते हुए और लोकतंत्र को आकार देने में अपनी भूमिका निभाते हुए, पार्लियामेंट और मतदान प्रतीकों के साथ।

भारत में युवा मतदाताओं की भूमिका का बहुत अधिक महत्व है, जो देश में उनकी व्यापक संख्या और लोकतंत्र को गहन रूप से प्रभावित करने की क्षमता से प्रेरित है। एक प्रमुख जनसांख्यिकीय के रूप में, युवा देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही, चुनावी परिणामों, नीतियों और राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।...

Continue reading...

डिजिटल युवा: समाज में बदलाव लाने और भारत की सफलता के उत्प्रेरक

इस डिजिटल युग में, देश के युवा इन्फॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी तक अभूतपूर्व पहुँच स्थापित कर चुके हैं, जो देश की प्रगति के लिए सबसे मजबूत घटकों में से एक है। डिजिटल परिदृश्य को नेविगेट करने में उनकी कुशलता समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकती है। सोशल मीडिया के प्रभाव के...

Continue reading...

भारत के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका को कम नहीं आँका जा सकता

भारत को अधिक प्रगतिशील और समृद्ध भविष्य की दिशा की ओर अग्रसर करने में युवा शक्ति अहम् भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का भारत के विकास में अभूतपूर्व योगदान रहा। यही उनकी ख्याति है कि उन्हें ‘भारत के मिसाइल मैन’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने एक बार कहा था, “मेरा संदेश, विशेष रूप से युवा लोगों...

Continue reading...

भारत का घुमंतु समाज: डॉ. अतुल मलिकराम की दृष्टि से इतिहास, संस्कृति और अधिकार

Dr. Atul Malikram with nomadic tribes of India showcasing their traditional lifestyle, culture, music, dance, and struggle for dignity.

भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक परिदृश्य में घुमंतु समाज का स्थान अद्वितीय और गहरा है। यह कोई अलग या पृथक वर्ग नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता की जीवंत धारा है — एक ऐसी धारा जो हजारों वर्षों से घूमती रही है, लेकिन कभी भी अपनी जड़ों से विचलित नहीं हुई। नट, सपेरा, बंजारा, लोहार, बैरवा, बावरिया, गारसिया, जोगी, टोड़ा,...

Continue reading...