हमारे शहरों के हर कोने में, जहाँ पर जीवन एक अलग लय में बहता है और जहाँ सपनों को उड़ने के लिए पंख मिलते हैं, इसके पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शहरी गरीब, जो शहर को जीवित रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, उन्हें जीवन की बुनियादी जरूरतों के बिना खुद...
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किसने बनाए हैं ‘जूठन’ और ‘उतरन’ जैसे शब्द?
लम्बे समय की सेविंग के बाद पिछले महीने ही अपने लिए इतना महँगा शर्ट खरीदा था, इतनी जल्दी यह मुझे छोटा होने लगा है, एक काम करता हूँ किसी को दे देता हूँ.. आज फिर माँ ने टिफिन में दो रोटी ज्यादा रख दी, यह फिर फेंकने में जाएगी, किसी को दे देता हूँ.. यह जो हमारे द्वारा अपने कपड़ों...
Continue reading...तोड़ देगी भारत को गरीबी एक दिन
विभिन्न देशों की स्थिति-परिस्थिति यानि आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उन्हें दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है: एक विकसित और एक विकासशील। निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को आमतौर पर विकासशील देश कहा जाता है, वहीं, उच्च मध्यम आय और उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को विकसित देश कहा जाता है। यह तो हुआ किताबी ज्ञान। मेरे मायने इस...
Continue reading...भ्रष्टाचार और पेपर लीक की आग की लपटों में झुलसते छात्र
भारत की शिक्षा प्रणाली एक भयानक तूफान के चपेट में आ बैठी है। एक ऐसा तूफान, जो धूल-मिट्टी के रूप में अपने साथ भ्रष्टाचार और पेपर लीक का बवंडर साथ लिए चल रहा है। एक ऐसा तूफान, जो अनगिनत छात्रों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को निगलता ही चला जा रहा है। इन तमाम सुर्खियों और जाँचों के पीछे एक गहरी...
Continue reading...आधी रात में केक काटने का चलन: उत्सव या दिखावा?
कुछ दिनों पहले ही मेरा जन्मदिन बीता, रात के 12 बजते ही अचानक से फोन बज उठा। जन्मदिन की बधाई देने के लिए परिचितों के मैसेज की जैसे कतार-सी लग गई, ऐसा लग रहा था मानों रात के 12 बजे का समय एकदम से विशेष बन गया हो। घर में भी हर कोई जाग रहा था, मेरी बिटिया हाथ में...
Continue reading...आजकल की शादियाँ दिखावा..?
देव उठने के साथ ही शादियों का सीज़न शुरू हो चुका है। इस सीज़न में जीवन की नई शुरुआत करने वाले नव दंपतियों को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएँ…। आने वाले कुछ महीनों तक शहनाइयों की गूँज और शादियों की चमक-दमक बनी रहेगी। आप में से भी ऐसे कई लोग होंगे, जिनके घर शादी के न्यौते आ चुके होंगे...
Continue reading...एक कप गरमा-गरम चाय की चुस्की और मजबूत संबंध
4,750 वर्ष पहले सम्राट शेन नोंग ने जब चाय की आकस्मिक खोज की, तब उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनकी यह खोज एक दिन न सिर्फ दो लोगों के संबंधों के सृजन, बल्कि उन्हें मजबूत करने का एक प्रतिभाशाली सूत्र बन जाएगी। आज के डिजिटल युग में, जहाँ लोग अक्सर अपने फोन और ई-मेल के माध्यम से अपनी व्यस्तता...
Continue reading...व्यवसायों के लिए केवल लाभ का विषय ‘बार्टर डील’
एक ऐसी दुनिया, जहाँ रुपया-पैसा या करंसी ही एक्सचेंज का प्राथमिक माध्यम है, वहाँ बार्टरिंग का कॉन्सेप्ट काफी पुराना मालूम पड़ता है। हालाँकि, मौजूदा बिज़नेस परिदृश्य में देखें, तो नकदी का उपयोग किए बिना, अपना क्लाइंट बेस बढ़ाने के साथ-साथ रेवेन्यू में जरुरी वृद्धि के लिए, बार्टर सिस्टम एक प्रभावी रणनीति साबित हुई है। दो दशकों से अधिक के अनुभव...
Continue reading...कल्चर, कनेक्शन और क्रेडिबिलिटी: भारत में रीजनल पीआर के लिए सफलता के पिलर्स
आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में, प्रभावी पब्लिक रिलेशन्स की महत्ता पहले से कहीं अधिक है, खासकर तब, जब बात भारत के विविध और जीवंत बाजार को नेविगेट करने की आती है। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत में किसी भी पीआर कैंपेन की सफलता कल्चर (संस्कृति), कनेक्शन (संपर्क) और क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) की तिकड़ी में महारत हासिल करने पर निर्भर करती...
Continue reading...पीआर परिदृश्य में किस तरह क्राँति ला रही है क्रिएटर इकॉनमी?
कहानी कहने की कला और आकर्षक कॉन्टेंट हमेशा ही दर्शकों के मन-मस्तिष्क में विशेष स्थान रखते हैं। सोशल मीडिया के आगमन ने इस विशेष कला को ऊँचा उड़ने के लिए नए पंख दिए हैं, जिसके माध्यम से स्टोरीटेलिंग आर्टिस्ट्स को बतौर ऑनलाइन खुद को अभिव्यक्त करने के असीमित अवसरों की सौगात मिली है। पहले के समय में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स सिर्फ...
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