फूलों का स्वभाव होता है खुद के साथ ही साथ अपने आसपास के वातावरण को भी महकाना और अपनी महक से सराबोर कर देना हर उस शख्स को, जिसने इसे छुआ है। फूलों से बने इत्र में खूबियाँ और भी बढ़ जाती हैं। बात महक की चली है, तो इसी पर आगे बढ़ते हैं। क्या महक का नाता सिर्फ फूलों...
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बचपन के भी दो चेहरे
बचपन के भी दो चेहरे हैं.. यह तथ्य आपको तब सत्य होता दिखाई देगा, जब आप खुद के आवरण से बाहर आएँगे, और अपने आस-पास के लोगों पर भी ध्यान देंगे.. हमारे देश की चहल-पहल भरी सड़कों पर बच्चों की अलग ही दुनिया हमें देखने को मिलती है.. लेकिन, उन मासूमों के जीवन में जो प्रतिकूल स्थितियाँ देखने को मिलती...
Continue reading...मौन पीड़ाओं की नज़रअंदाजी..
हमारे शहरों की हलचल भरी सड़कों पर, हॉर्न बजाती कारों के शोर और भागदौड़ के बीच, हम अक्सर ऐसे लोगों की खामोश चीखें सुनते हैं, जो हर दिन जीवन के लिए संघर्ष करते हैं। कभी रास्तों पर हमें बुजुर्ग पुरुष और महिलाएँ, कमजोर और समय से थके हुए, हाथ फैलाकर बैठे मिलते हैं। कभी खोखली आँखों वाले बच्चे, अपने छोटे-छोटे...
Continue reading...एक अनदेखा संकट….
हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहाँ का हर कोना खान-पान की एक संपन्न विरासत लिए हुए है। एक ऐसा देश, जहाँ कहीं आपको मसालों की सुगंध मिलेगी, तो कही हवाओं में मिठास घुली होगी। अलग-अलग कोने में अलग-अलग जायका मिलेगा। यह खान-पान तो हमारी पहचान है, लेकिन खाने के शौकीन इस देश की एक सच्चाई और है, जहाँ...
Continue reading...इंसानियत की समझ से परे टीस भूख की
भूख और भुखमरी ये ऐसे मुद्दे हैं, जो हमें हमारी इंसानियत की गहराइयों में झाँकने पर मजबूर करते हैं। जब हमारा अपना बच्चा भूखा सोता है, तो हमारी आत्मा भीतर तक कचोट जाती है। दया बेशक हमें सिर्फ अपने लोगों पर ही आती है। कुछ स्थितियों में बाहर किसी व्यक्ति को देखकर भी आ ही जाती है, लेकिन हम में...
Continue reading...भूख की चीख
पेट से निकली हुई बेबाक भूख की चीख कानों से सुनाई नहीं, बल्कि दिखाई देती है आँखों से भूख से जिस समय पेट बिलखता है, उस स्थिति में दुनिया की कोई भी बात ज़हन में नहीं आती। बात बहुत बड़ी है, जरुरत है, पेट की इस गुहार को सुनने की और इसे महसूस करने की। उस पेट में उठती दलील,...
Continue reading...खून को पसीने के रूप में बहाता है किसान, तब जाकर आप तक पहुँचता है अन्न
“खून को पसीने के रूप में बहाता है किसान, तब जाकर आप तक पहुँचता है अन्न” यह वाक्यांश सटीक रूप से इस तथ्य को उजागर करता है कि किसानों का श्रम और संघर्ष ही हमारे जीवन का आधार है। यदि वे मेहनत और हमारी फिक्र करना बंद कर दें, तो मुझे कहने में कोई संकोच नहीं कि हम चंद ही...
Continue reading...मजबूरियों में दम तोड़ता बचपन….
एक सर्द सुबह बस स्टेशन पर बैठा मैं अपनी बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी दो छोटे बच्चे मेरे पास आए। उनकी मासूम आँखों में थकान और समस्याओं से जूझते बचपन की कहानी साफ झलक रही थी। उनके नन्हें हाथों में पेन के कुछ पैकेट थे। वे मेरे पास आए और मुझसे पेन खरीदने की गुजारिश करने लगे। उनकी...
Continue reading...गरीबी: स्थिति या मानसिक सोच?
गरीबी, हमारे देश में एक ऐसी समस्या है, जिसे खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा प्रयास किए गए। इसके लिए हर प्रकार की योजनाएँ, कार्यक्रम और अभियान चलाए गए, फिर भी इस समस्या से छुटकारा नहीं पाया जा सका। इसका एक कारण यह है कि इस समस्या को केवल एक आर्थिक स्थिति मानकर ही इसका हल खोजा जाता रहा, जबकि...
Continue reading...गरीबी और अशिक्षा का भंवर
विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भी आज देश में आन्तरिक तौर पर देखा जाए, तो हजारों समस्याएँ देखने को मिल जाएँगी। कहने को तो हम आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुके हैं, लेकिन आज भी देश में करीब 53 करोड़ लोग गरीबी और अभाव का जीवन जी रहे हैं, आज देश में जितने...
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