मौत किराए पर नहीं मिलती

एक विचारशील व्यक्ति श्मशान के किनारे खड़ा, जीवन की अनमोलता और मृत्यु की अनिवार्यता को समझते हुए।

इस दुनिया में लगभग हर चीज़ किराए पर मिल जाती है, जैसे कि घर, गाड़ी, कपड़े और यहाँ तक कि गहने भी। लेकिन, एक चीज़ ऐसी है, जिसके लिए अपने जीवन की सारी मालकियत, दौलत-शोहरत आदि चाहे जो कुछ भी न्यौंछावर कर दो, चाहे कुछ भी कर लो, वह कभी किराए पर नहीं मिलती.. मैं जिस चीज की बात कर रहा हूँ, वह और कुछ नहीं, बल्कि मौत है। मौत न तो रिश्वत लेती है, और न ही कोई सौदेबाजी करती है.. यह एक ऐसा सत्य है, जो हमें जीवन की असली कीमत और उसकी अनमोलता का एहसास कराता है। दो अक्षर का यह छोटा-सा शब्द हमें याद दिलाता है कि हमारा जीवन कितना महत्वपूर्ण है और इसे पूरी तरह से जीना कितना जरुरी है।

खरबों की संपत्ति के मालिक माननीय रतन टाटा जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निधन से पहले उन्होंने जो अपने अंतिम विचार पेश किए, वो दुनिया के छोटे से लेकर बड़े से बड़े शख्स को भीतर तक हिलाकर रख देने के लिए काफी हैं। उन्होंने कहा कि मैं व्यापार जगत में सफलता के शिखर पर पहुँच चुका हूँ। बेशक, मेरा जीवन दूसरों की नज़र में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालाँकि, काम के अलावा मेरे पास कोई खुशी नहीं है। रुपया-पैसा सिर्फ एक सत्य है, जिसका मैं उपयोग करता हूँ। 

इस समय अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए और अपनी पूरी जिंदगी को याद करते हुए, मुझे एहसास होता है कि जिस पहचान और पैसे पर मुझे गर्व था, वह मृत्यु से पहले खुद को झूठा और बेकार साबित कर चुका है। आप अपनी कार चलाने या पैसे कमाने के लिए किसी को किराए पर ले सकते हैं। लेकिन, आप अपनी जगह किसी और को पीड़ित होने और मरने देने के लिए किराए पर नहीं ले सकते।

कितनी बड़ी सीख है यह हमारे जीवन के लिए कि पैसों से हर चीज नहीं खरीदी जा सकती, जबकि वो लोग न जाने किस असमंजस में जी रहे हैं, जो कहते फिरते हैं कि हाथ में पैसा आ जाए, तो हम पूरी की पूरी दुनिया ही खरीद लें। 

हमारे जीवन में कई बार कई वस्तुएँ गुम हो जाती हैं। कई दफा ये खोई हुई भौतिक वस्तुएँ मिल भी जाती हैं। लेकिन, एक चीज़ है, जो यदि एक बार खो जाए, तो फिर कभी नहीं मिलती, और वह है जीवन। हम जीवन के किसी भी चरण में हों, कितनी ही ऊँचाइयाँ छू लें, एक न एक दिन हमें इस समय का सामना करना ही होगा, जब दिल से धड़कन का साथ छूट जाएगा। तीन स्थान ऐसे हैं, जहाँ जाकर जीवन के महासागर की गहराई चंद मिनटों में ही माप ली जाती है। ये स्थान हैं: अस्पताल, जेल और श्मशान। अस्पताल में आप समझेंगे कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। जेल में आज़ादी की असली कीमत समझ में आती है। और श्मशान में आपको एहसास होता है कि जीवन कितना क्षणभंगुर है।

बचपन में हमें बेशक घड़ी, गाड़ी, बंगला और अच्छे कपड़े लुभा सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमें एहसास होता है कि महँगी चीज़ें असल में हमें खुशी नहीं देतीं। जीवन में सबसे अधिक जरुरी है सुकून का होना। यदि सुकून नहीं, तो फिर दौलत-शोहरत कुछ भी नहीं।

चाहे हम 300 रुपए की घड़ी पहनें या फिर 3000 रुपए की, समय दोनों एक ही बताती हैं। चाहे हमारे पास 100 रुपए का पर्स हो या 500 रुपए का, वह पैसे रखने के ही काम आता है। चाहे हम 5 लाख रुपए की कार चलाएँ या फिर 50 लाख की, रास्ता और दूरी एक ही होती है और मंजिल भी। घर चाहे 300 वर्ग फुट का हो या 3000 वर्ग फुट का, यदि मन में अकेलापन है, तो फिर यह हर जगह समान ही होता है। सच तो यह है कि सच्ची खुशी इस दुनिया की भौतिक वस्तुओं में नहीं होती। जब हम जीवन की अनमोलता को समझते हैं, तो हमें अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताए समय की सच्ची खुशी का महत्व समझ में आता है। फर्स्ट क्लास या इकोनॉमी क्लास में उड़ान भरने से कोई फर्क नहीं पड़ता, यदि विमान नीचे गिरता है, तो हम सभी एक साथ और एक तरह से ही सब नीचे गिरेंगे।

इसलिए, अपने परिवार, जीवनसाथी और दोस्तों से प्यार करें, उनके साथ अच्छा व्यवहार करें, कभी किसी के साथ छल न करें, कभी कोई काम ऐसा न करें, जिससे किसी के दिल को ठेस पहुँचे। अपने दोस्तों और परिवार के साथ हँसना, बोलना और बातें करना ही सच्ची खुशी है।

हमारे जीवन की असली सच्चाई यही है और हमें अपने बच्चों को सिर्फ अमीर बनना नहीं, बल्कि खुश रहना सिखाना चाहिए। जब वे बड़े होंगे, तो उन्हें चीज़ों की कीमत नहीं, उनका मूल्य पता होगा। आज हम जिस ज़मीन पर चल रहे हैं, कल वह भी हमारी नहीं होगी। जिन भौतिक वस्तुओं के लिए हम तेरा-मेरा करके जीवन भर लड़ते रहते हैं, उनमें से छटाँक भर भी हम अपने हिस्से में अपने साथ नहीं ले जा सकेंगे। फिर ये दँगा-फसाद क्यों? क्यों नहीं हम विनम्र हो जाते और अपने माता-पिता का धन्यवाद् करते, जिन्होंने हमें यह जीवन दिया?

ज़रा-सी सफलता पर उछलने वाले हम जैसे लोगों को माननीय रतन टाटा जी के साथ ही सिकंदर, राकेश झुनझुनवाला और अजीज प्रेमजी जैसी शख्सियतों से भी यह सीख लेना चाहिए कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के बाद भी विनम्रता और कृतज्ञता बनाए रखना यदि आपको आता है, तो आपका मूल्य क्या है। उनकी उपलब्धियाँ हमें प्रेरित करती हैं, लेकिन उनके विचार और जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि असली खुशी और संतोष आखिर विनम्रता से ही आता है।

मौत की अनिवार्यता हमें जीवन के मूल्य और उसकी अनमोलता को समझने के लिए प्रेरित करती है। हमें अपने जीवन को पूरी तरह से जीना चाहिए, अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए और अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना चाहिए। भौतिक वस्तुएँ और संपत्ति हमें असली खुशी नहीं दे सकतीं, लेकिन सच्चे रिश्ते और प्यार हमें वह खुशी और संतोष दे सकते हैं, जो हम जीवन में तलाशते हैं। जीवन अनमोल है और हमें इसे पूरी तरह से जीना चाहिए। 

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