एक प्यारी-सी जिद…

बच्चों की जिद और फेरीवाले की मुस्कान

बचपन की वो सुनहरी यादें.. याद है जब हम अपनी छोटी-छोटी जिदें पूरी करने के लिए बड़ों से रूठ जाया करते थे। कभी गुलाबी रंग का गुब्बारा चाहिए, तो कभी रंग-बिरंगी चूड़ियाँ। घुँघरू वाले झुनझुने की खनक या फिर मुँह में मिठास घोलते गुलाबी-गुलाबी गुड़िया के बाल.. इन छोटी-छोटी चीज़ों के लिए की गई हमारी जिद, हमारे बचपन की उन सुनहरी यादों में से एक है, जो दिल को आज भी सुकून देती है। हमारे जिद करने पर वह कुल्फी वाला वहीं रुक जाता था और बड़ी उम्मीद भरी नज़रों से हमारी ओर देखा करता था, हमारे बहुत मचलने पर कभी-कभी कह भी पड़ता था कि बच्चा इतना रो रहा है, तो ले लीजिए न साहब……

उन दिनों को आज याद करता हूँ, तो खयाल आता है कि हमारी ये प्यारी-सी जिद सिर्फ हमें ही नहीं, बल्कि उस गली के नुक्कड़ पर खड़े छोटे-छोटे फेरीवालों के लिए भी कितनी मायने रखती थी। हम जब एक गुब्बारे की ज़िद करते थे, तब माता-पिता के चेहरों पर भले ही चिंता की लकीरें उभर आती थीं, लेकिन उस गुब्बारे वाले के चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान खिल जाती थी।

याद है, जब गर्मियों की दोपहर में, हम बाहर आइसक्रीम वाले की घंटी की आवाज़ सुनकर दौड़ जाया करते थे। वह घंटी, जिसे सुनकर हम सब-कुछ छोड़ कर दौड़ पड़ते थे, वह महज एक घंटी नहीं थी, वह एक परिवार के लिए भूख मिटाने की आवाज़ हुआ करती थी। आइसक्रीम के छोटे-छोटे कप, हमारी आँखों में चमक और दिल में ठंडक देने के साथ-साथ उस आइसक्रीम वाले की जीवन में भी थोड़ी-सी मिठास भर दिया करते थे। हमारी उस छोटी-सी जिद के पीछे छिपी होती थी एक उम्मीद, एक परिवार की उम्मीद। उम्मीद यह कि बच्चों की जिद के कारण ही सही आज सारा सामान समय पर बिक जाएगा, तो शायद शाम को कोई फेरीवाला अपने परिवार को भर पेट खाना खिला पाएगा, वह भी अपने नन्हें-नन्हें बच्चों के लिए शाम को घर कुछ ले जा पाएगा।

हालाँकि, इस नजरिए से मैंने भी पहले कभी नहीं सोचा था कि बच्चों की एक छोटी-सी जिद किसी के लिए कितनी बड़ी खुशी का कारण बन सकती है?

बच्चों की जिद माता-पिता को बेशक बेचैन कर सकती है, लेकिन मुझे लगता है वह फेरीवाला दुनिया का एकमात्र शख्स होगा, तो चाहता होगा कि बच्चे जिद करें..

जब बच्चे गुब्बारे की जिद करते हैं, तो सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उस गुब्बारे वाले के लिए भी एक नई उम्मीद जगा देते हैं। बच्चों की प्यारी-सी जिद, उनके जीवन की गाड़ी को थोड़ा और आगे बढ़ाने में मदद करती है। आज भी, जब मैं बाज़ार जाता हूँ और किसी बच्चे को रंग-बिरंगी टॉफियों के लिए मचलते देखता हूँ, तो मन में यही ख्याल आता है कि यही जिद, उन फेरीवालों के लिए कितनी अहमियत रखती है। और माता-पिता जब उनकी जिद पूरी करते हैं, तो फेरीवालों की आँखों की चमक सच-मुच देखते ही बनती है। एक छोटे-से खिलौने का बिक जाना, उनके लिए किसी बड़ी खुशी से कम नहीं होता होगा।

कई बार ऐसा होता है कि हम बड़े होकर अपनी इन प्यारी-सी जिदों को भूल जाते हैं। लेकिन जरा सोचिए, वो फेरीवाले जिनके पीछे हम बचपन में कभी खुशी-खुशी अपनी छोटी-सी जिद पूरी करने के लिए दौड़ लगाते थे, आज भी वहीं खड़े हैं, उसी उम्मीद के साथ। वो अब भी बच्चों की उन प्यारी-सी जिदों के भरोसे ही जी रहे हैं। आज भी शायद हमारे पुराने स्कूल के पास वो इमली वाले चाचा बैठते होंगे, जिन्हें हमारी छुट्टी होने का इंतजार हमसे भी ज्यादा रहता था। उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हमारी वो छोटी-सी जिद कितनी बड़ी भूमिका निभाती रही होगी, ये हमें शायद ही कभी समझ आए।

ये बात सही है कि बच्चों की जिद कभी-कभी माता-पिता के लिए परेशानी का सबब बन जाती है, पर उसी जिद में छिपी होती है किसी की भूख मिटाने की उम्मीद। आप इस बात को समझें कि उनके चेहरे पर जो मुस्कान आती है, वो बच्चों की उन प्यारी-सी जिदों की बदौलत ही है। तो अगली बार, जब आपका बच्चा जिद करे, तो परेशान होने के बजाए कभी-कभी ही सही, लेकिन उसकी वह जिद पूरी कर दिया कीजिए। उस छोटी-सी जिद को पूरा कर, आप न सिर्फ अपने बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला पाएँगे, बल्कि उस फेरीवाले के जीवन में भी एक छोटी-सी खुशी भर देंगे। यकीन मानिए, इस सोच के साथ आप अपने बच्चे और उस फेरीवाले से भी ज्यादा खुश होंगे उस दिन..

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