आज सुबह से ही हल्की-हल्की बारिश हो रही है, और हो भी क्यों न बरसात का मौसम जो चल रहा है। यह मौसम अक्सर लोगों को बड़ा पसंद होता है, क्योंकि इस समय धरती हरियाली की चादर ओढ़े, पेड़-पौधों पर आई नई पत्तियाँ खुशी से झूमती हुई, बरबस ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। इस लुभावने मौसम और खुशी से झूमते पेड़-पौधों के हरियाली ओढ़ने की वजह है, उनकी जड़ों को भरपूर मात्रा में पानी का मिलना…. किसी भी पेड़ की मजबूती उसकी जड़ों पर निर्भर करती है। पेड़ों की ही तरह हर किसी के लिए जड़ों का मजबूत होना बहुत जरुरी होता है।
जैसे भवन निर्माण के लिए उसकी नींव मजबूत होनी चाहिए, ठीक वैसे ही देश को मजबूत बनाने के लिए उसे चलाने वाला सिस्टम और नियम दोनों ही मजबूत होने चाहिए। इन नियमों को लेकर आपने लोगों को गली-मोहल्ले के चौराहों पर, चाय की गुमटियों पर लोगों को यह बोलते हुए सुना होगा कि देश में गरीबी और भुखमरी बढ़ती जा रही है, शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता दोनों को बेहतर करने की आवश्यकता है आदि जैसी कई बातें हैं, जो लोग अक्सर किया करते हैं। आज-कल लोगों को इस तरह की बातें करते हुए सुनना बहुत आम बात है। लेकिन लोग कभी-भी इस ओर ध्यान नहीं देते कि वे अपना क्या योगदान करें, जिससे देश की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके।
मुझे ऐसा लगता है, किसी भी संरचना के निर्माण में किया गया छोटा-सा योगदान भी बड़े मायने रखता है। मैं यहाँ रामायण का उदाहरण देना चाहूँगा… जब प्रभु श्रीराम, सीता माता को लेने लंका जा रहे थे, तब उनकी सेना राम सेतु बनाने में व्यस्त थी। वैसे तो सेना में हमेशा योद्धा और शूरवीर ही होते हैं, लेकिन प्रभु श्रीराम की सेना अनोखी थी, जिसमें बाली और सुग्रीव जैसे सेनापतियों के साथ ही वानरों की एक विशाल श्रृंखला शामिल थी।
जब लंका पहुँचने के लिए राम सेतु का निर्माण कार्य चल रहा था…. तब एक गिलहरी पानी में डुबकी लगाती, फिर रेत में लोटकर अपने शरीर पर रेत लपेटती और पुल पर आकर रेत को झटक देती।
उसका बार-बार ऐसा करना प्रभु श्रीराम देख रहे थे, कुछ समय बाद उन्होंने उस नन्हीं गिलहरी से पूछा कि तुम यह क्या कर रही हो? उनके इस प्रश्न पर गिलहरी ने बड़ी ही विनम्रता से उत्तर दिया कि मैं एक अच्छे काम में मेरा योगदान दे रही हूँ। गिलहरी का उत्तर सुनकर प्रभु श्रीराम का हृदय करुणा से भर गया और उन्होंने उस गिलहरी पर प्रेमपूर्वक अपना हाथ फेरा, जिसका प्रमाण हम आज भी उसके शरीर पर बनी धारियों के रूप में देखते हैं।
मेरा ऐसा मानना है कि यदि वह छोटी-सी गिलहरी इतने बड़े काम में अपना योगदान दे सकती है, तो हम और आप मिलकर अपने देश की स्थिति को बेहतर बनाने में अपना योगदान क्यों नहीं दे सकते? कहने को तो कई सालों से देश से गरीबी हटाने की मुहिम चली आ रही है, लेकिन इतने सालों में कोई भी गरीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को नहीं पा सका। मुझे लगता भी नहीं है, बिना आम नागरिक के सहयोग के सरकार आने वाले वर्षों में भी इस लक्ष्य को हासिल कर पाएगी।
देश से गरीबी को मिटाने और देश की स्थिति को सुधारने के लिए पहले गहराई से इनके कारणों पर विचार करना चाहिए। जैसा आपने अक्सर देखा होगा, एक डॉक्टर, मरीज का इलाज करने से पहले उसकी सभी परेशानियों को ध्यानपूर्वक सुनता है, ताकि वह उसे उचित दवाइयाँ दे सके। ठीक इसी तरह हमें भी मिलकर पहले देश में गरीबी और अशिक्षा जैसी कमियों की जड़ तक जाकर, उन्हें सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
मुझे ऐसा लगता है, हमारे देश में गरीबी का प्रमुख कारण शिक्षा का अभाव और शिक्षा का स्तर कमजोर होना है। शिक्षा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार करने की पहली सीढ़ी होती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, माताओं को पहला गुरु कहा जाता है, इसलिए यदि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के समान अवसर प्रदान करके, देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार किया जा सकता है। देश के लोगों को शिक्षा का स्तर सुधारने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए।
यह तो रही आगे आने वाली पीढ़ी की बात, जिसे हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर देश की तरक्की के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते है। लेकिन, उन लोगों को क्या जो अपनी उम्र का एक पड़ाव अशिक्षित रहकर ही पार कर चुके हैं? कहने को तो सरकार ने ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम चला रखा है, लेकिन अब इस उम्र में शिक्षा ग्रहण करना, उन्हें थोड़ा मुश्किल और शर्मिंदगी भरा लगता है। हमें ऐसे व्यक्तियों को सरकार द्वारा चलाए जाने वाले कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में बताना चाहिए और उन्हें इनसे होने वाले लाभ के बारे में अवगत कराना चाहिए।
ऐसा जरुरी तो नहीं कि सिर्फ पढ़े-लिखे लोग ही देश की प्रगति में सहायक होते हैं। हर वह व्यक्ति देश के विकास में अपना योगदान दे सकता है, जो किसी कार्य को करने की योग्यता रखता है। यदि इरादा दृढ़ हो, तो कुछ भी करना असंभव नहीं होता है, इसलिए देश के सभी नागरिकों को मिलकर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को बढ़ावा देने, कार्य करने की क्षमता और कुशलता को प्रोत्साहित करने और देश के चतुर्मुखी विकास के लिए सदैव अपना सहयोग देने के लिए तत्पर रहना चाहिए।
इन सब बातों के अलावा एक मुख्य बिंदु और भी है, जिस पर लोगों को गौर करने की आवश्यकता है, वह है भुखमरी। यह शब्द अकेले ही देश को पतन की ओर ले जाने के लिए काफी है, क्योंकि इंसान जो भी काम करता है, उसका प्रथम उद्देश्य पेट भरना ही होता है। आज कुछ लोग अनपढ़ होने के कारण दो वक्त की रोटी के लिए सड़कों पर भीख माँगने को मजबूर हैं। यदि हम इन लोगों को रोजगार दिलाने में, सड़कों पर भीख माँगते बच्चों को खाना और शिक्षा देने में अपना सहयोग दें, तो यकीन मानिए, वह दिन दूर नहीं होगा जब देश गरीबी, अशिक्षा और भुखमरी से मुक्त होकर एक समृद्ध देश बन जाएगा।
असाक्षरता, गरीबी, भुखमरी ये तीनों ही हमारे देश के विकास को अवरुद्ध करने वाली मुख्य जड़ें हैं। यदि इन जड़ों को ही काट दिया जाए, तो देश अपने आप विकासशील से विकसित की श्रेणी में आ जाएगा। यहाँ मैं कुछ बातें साझा करना चाहता हूँ, जो शायद देश की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए बहुत सार्थक सिद्ध होंगी।
हर इंसान को ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि वह अपने घर में काम करने वाली महिला के बच्चे या उसके घर के आस-पास रहने वाले बच्चों को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करे। दरअसल, ज्यादातर लोगों का ऐसा मानना होता है कि मजदूर का बच्चा मजदूर ही बनेगा, जबकि यह बात सरासर गलत है। मजदूर का बच्चा भी अफसर बन सकता है, बस उसे सही दिशा और मार्गदर्शन की जरुरत होती है। इन गरीबों के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार ने कई योजनाएँ चला रखी हैं। अब आम जनता का यह कर्तव्य बनता है कि वह गरीब तबके के बच्चों को पढ़ाई के फायदे बताए और उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे। ऐसे बच्चों को उन लोगों की कहानियाँ सुनानी चाहिए, जो बचपन में पढ़ाई में अच्छे नहीं थे, लेकिन बड़े होकर उन्होंने अपने अद्भुत प्रदर्शन से लोगों को चकित कर दिया।