शिक्षक कौन होता है? जो आपको अच्छी शिक्षा देता है, है न! सिर्फ ज्ञानी होना शिक्षक होना तो नहीं कहला सकता और फिर शिक्षकों का तो कर्तव्य ही होता है कि वे अपने छात्रों में उच्च नैतिकता और मजबूत चरित्र का विकास करें। यदि शिक्षक ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो इसका मतलब है कि वे अपनी सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से विमुख हो रहे हैं और इस तरह, वे अपने महान पद के प्रति निष्ठाहीन ही हैं। एक शिक्षक दूसरों से क्यों अलग होता है? क्योंकि वह किसी भी व्यक्ति के लिए किताबी ज्ञान के साथ ही नैतिक आचरण और मजबूत चरित्र का भी निर्माण करता है। मेरे हिसाब से एक अच्छा शिक्षक वह है, जो श्रेष्ठ बनाने के बजाए आपको उत्तम बनाने का प्रयास करे।
प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई ऐसे गुण जरूर होते हैं, जिन्हें व्यक्तित्व के विरासत में मिले गुण भी कहा जा सकता है; इसलिए प्राथमिक स्तर पर, एक छात्र की गुणवत्ता और योग्यता की पहचान उसके शिक्षक द्वारा की जाना चाहिए। शिक्षक को चाहिए कि बिना भेद-भाव किए बच्चे के उस गुण को पहचाने और उसे उन्हीं कार्यकलापों के लिए प्रेरित करे। इसके लिए यह आवश्यक है कि एक निश्चित स्तर तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नैतिक ज्ञान के अतिरिक्त तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने की सुविधाएँ भी प्रदान की जाएँ, उस विशेष गुण के साथ जिसकी पहचान उसके शिक्षक द्वारा पहले ही उसके व्यक्तित्व में की जा चुकी है। चूँकि स्वभाव से ही उसकी रुचि उस ज्ञान में है, इसलिए वह उसे आसानी से प्राप्त कर लेगा और साथ ही उसमें निपुण हो जाएगा।
जब वह स्नातक स्तर तक अपनी पढ़ाई पूरी कर लेता है और इस अतिरिक्त ज्ञान के साथ किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय से बाहर आता है, तो उसके पास एक दिशा होती है। ऐसे में, भले ही उसे प्राइवेट या सरकारी नौकरी मिले या न मिले, लेकिन वह अपने तकनीकी ज्ञान के आधार पर किसी न किसी तरह का स्वरोजगार हासिल करने में सफल होगा।
इसके लिए शिक्षकों की भी ट्रेनिंग हो, टेस्ट हो, शिक्षक स्वयं भी इसके लिए प्रयास करें और समय के साथ स्वयं को अपडेट रखें, जैसे कि नई शिक्षण विधियों, नवीनतम तकनीकों और विषय विशेष के साथ अपडेट रहने से आप अपने छात्रों को बेहतर ढंग से पढ़ा पाएँगे।
टीचर्स को छात्रों के साथ प्रैक्टिकल अनुभव साझा करना चाहिए। प्रैक्टिकल अनुभव से टीचर्स छात्रों की जरूरतों को समझ सकते हैं और उन्हें बेहतर ढंग से पढ़ा सकते हैं।
अपने अंदर संवेदनशीलता और धैर्य को विकसित कर शिक्षक अपने छात्रों की जरूरतों और चुनौतियों को समझ सकते हैं और उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। और जब टीचर्स खुद को अपडेट रखेंगे, तो ही पुरानी प्रणाली को बदलने के लिए उचित माँग कर पाएँगे। मेरे हिसाब से, इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर शिक्षकों के वेतन में वृद्धि होना सुनिश्चित किया जाना चाहिए और कम से कम तभी उनकी शिक्षा को परिणामोन्मुख माना जाएगा।