जो करना है आज ही करो, क्योंकि किसे पता कल हो न हो

सूर्योदय के समय खड़ा व्यक्ति जो जीवन की अनिश्चितता और आज में जीने का संदेश दर्शाता है

“पूरा दिन पड़ा है, शाम को करता हूँ”, “इतना भी क्या जरुरी है, बाद में हो जाएगा”, “जल्दी किस बात की है, अभी नहीं तो बाद में हो ही जाएगा”, कई बार यह बाद, बाद ही रह जाता है, क्योंकि आजकल समय का कोई भरोसा नहीं है।

हम सभी अपने सपनों को पूरा करने की तलाश में होते हैं, लेकिन कभी-कभी हम अपने सपनों और कामों को पूरा करने के लिए किसी विशेष मौके का इंतजार करते रहते हैं। हम अक्सर कहते हैं, “कल से शुरू करूँगा” या “बाद में कर लूँगा”, लेकिन न जाने क्यों यह नहीं समझते हैं कि कल कभी नहीं आता? हम न जाने क्यों, यह नहीं समझते कि भविष्य न सिर्फ अनदेखा, बल्कि अनिश्चित भी है। कल के भरोसे न बैठते हुए हमें अपने सपनों और कामों को पूरा करने का निर्णय आज ही लेना चाहिए।

कभी-कभी हम अपने जीवन को किसी महत्वपूर्ण काम को नजरअंदाज करके बर्बाद कर देते हैं, यह सोचकर कि हम अभी ऐसे क्या अड़ी पड़ी है, कल कर लेंगे। हम यह मान लेते हैं कि कल के लिए हमारे पास समय है, लेकिन वास्तव में कल की ग्यारंटी देता कौन है? जीवन इतनी अनिश्चितता से भरा हुआ है कि हम आज को छोड़कर कल की उम्मीद पर निर्भर नहीं कर सकते।

काम को टालने की हमारे भीतर की आदत बहुत बुरी है, क्योंकि हम इस धोखे में खुद को रखते हैं कि हमारे पास पर्याप्त समय है, और फिर एक दिन वह पर्याप्त समय देखते ही देखते गुजर जाता है, और हमारे पास सिवाए पछतावे के कुछ भी नहीं बचता है। हमारी यह आदत कई अवसरों को स्वाहा कर देती है। “कल कभी नहीं आता” हमें याद दिलाता है कि हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए आज ही और इसी वक्त काम करना होगा।

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।

संत कबीर दास एक अरसे पहले ही हमें यह सीख दे गए हैं कि कार्यों को टालना और आलस्य करना हमारे लिए सिवाय हानि कुछ भी लेकर नहीं आता है। हमारे पास समय बहुत कम है, इसलिए जो काम कल करना है, वह आज करें, और जो आज करना है, वह अभी और इसी वक्त करें, क्योंकि यदि ऐसा समय या स्थिति आ गई, जिसकी वजह से आप अपना काम करने के योग्य ही नहीं रहे, तो फिर काम कब पूरा होगा। लेकिन कहते हैं न कि मुफ्त में मिलने वाली सीख कोई लेना ही नहीं चाहता। मैं एक उदाहरण के रूप में अपनी इस बात को समझाने की कोशिश करता हूँ। कुछ समय पहले की बात है, एक गाँव में एक छोटा-सा लड़का रहता था। वह बहुत ही समझदार था। खुलकर अपनी बात रखता और मन भरकर आज में जीता। एक दिन, उसने अपने दोस्तों से एक सवाल पूछा, “यदि तुम्हें पता चले कि कल तुम्हारी जिंदगी का आखिरी दिन है, तो तुम क्या काम करोगे?” उसे अपने दोस्तों ने विभिन्न जवाब मिले। एक ने कहा, “उस एक दिन बहुत बड़ी पार्टी का आयोजन करूँगा, ताकि लोग मुझे याद रखें”, एक ने कहा, “एक दिन के लिए सैर-सपाटे पर निकल जाऊँगा”, उसका एक दोस्त बड़ा ही पेटू था, तो स्वाभाविक रूप से उसने कहा कि अलग-अलग जगहों के प्रसिद्ध और स्वादिष्ट व्यंजनों के चटखारे लेना पसंद करूँगा, तब तक, जब तक कि मेरा पेट जवाब न दे जाए।

इन जवाबों पर उस बच्चे के चेहरे पर मंद-सी मुस्कान थी। इतने में एक दोस्त ने उसे टोकते हुए कहा कि हँस क्या रहा है, इस स्थिति में तू क्या करता? इस पर जवाब देते हुए उस समझदार बच्चे ने कहा “मैं कल के लिए वह सब कुछ करूँगा, जो मुझसे हो सकता है और जिसका होना बहुत जरुरी है, ताकि जब मैं न रहूँ, तो मेरे मन में उस काम को लेकर यह मलाल नहीं रहे कि शायद समय रहते कर लेता, तो आज मुझे पछतावा नहीं रहता। सच कहूँ, तो मैं अपने साथ किसी भी तरह का बोझ लेकर नहीं जाना चाहता, जो भी मेरी जिम्मेदारियाँ हैं, उन्हें पूरा करके जाना चाहता हूँ।”

अब हँसने की बारी दोस्तों की थी, क्योंकि उनकी नज़रों में उनका काम ज्यादा जरुरी था। इस बात के बाद भी वे मुफ्त की इस सीख को अपने जीवन में नहीं उतार सकें। बच्चा छोटा है, बात भी छोटी है, लेकिन सीख बहुत बड़ी है। इस बच्चे का उदाहरण हमें यह याद दिलाता है कि हमारे पास जीने का एक ही दिन है, जो कि आज है। कल का क्या होगा, कैसा होगा, हम नहीं जानते। इसलिए अपने आज में जीना सीखो, अपने आज को जीना सीखो और अपने आज को खुलकर जीना सीखो।

कई बार कई ख्वाहिशें मन में पलती हैं, जिन्हें पूरा करने का मन जोरों पर होता है, लेकिन कुछ जिम्मेदारियों आदि के चलते इंसान उन्हें मन में भरकर जीने को मजबूर हो जाता है और मन भरकर जी ही नहीं पाता। माना कि जीवन में परेशानियाँ बहुत हैं, जिम्मेदारियाँ भी हैं, लेकिन अपने आज को खुलकर जीने और मन भरकर जीने की आदत डाल लें, क्योंकि किसे पता कल हो न हो?

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