खून को पसीने के रूप में बहाता है किसान, तब जाकर आप तक पहुँचता है अन्न

खेत में पसीना बहाता भारतीय किसान

“खून को पसीने के रूप में बहाता है किसान, तब जाकर आप तक पहुँचता है अन्न” यह वाक्यांश सटीक रूप से इस तथ्य को उजागर करता है कि किसानों का श्रम और संघर्ष ही हमारे जीवन का आधार है। यदि वे मेहनत और हमारी फिक्र करना बंद कर दें, तो मुझे कहने में कोई संकोच नहीं कि हम चंद ही दिनों में दाने-दाने के मोहताज हो जाएँगे। और फिर हमारे पास वो भूख-प्यास के लड्डू भी नहीं बचेंगे, जो अक्सर हमारी दादी-नानी मुसीबत के समय के लिए बचाकर रखा करती थीं। उनका समर्पण और मेहनत हमारे लिए अन्न और भर पेट भोजन को संभव बनाती है। किसानों की मेहनत और संघर्ष के बिना हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं होता।

किसान अपने खेतों में कठिन मेहनत करते हैं, चाहे वह गर्मी की चिलचिलाती धूप हो या फिर कड़कड़ाती सर्दी की रातें। वे अपने अथक प्रयासों से हमारे लिए अन्न का उत्पादन करते हैं और वे दिन-रात एक करके बच्चों की तरह फसलों की देखभाल करते हैं, उन्हें प्रचुर मात्रा में पानी देते हैं, खाद डालते हैं, और समय-समय पर कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं।

इसके बावजूद हम में से कई लोग भोजन की बर्बादी की गंभीरता को नहीं समझते, या यूँ कह लें कि समझना ही नहीं चाहते। यह बहुत बड़ा मुद्दा है कि भारत में हर वर्ष लगभग 6.7 करोड़ टन भोजन यूँ ही बर्बाद हो जाता है, जो कुल उत्पादित भोजन का लगभग 40% है। यह आँकड़ा सिर्फ आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण पर भी बेहद गंभीर प्रभाव पड़ता है।

अन्न और भोजन की बर्बादी के मुख्य कारणों में शामिल हैं:

स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की कमी: कोल्ड स्टोरेज और उचित पैकेजिंग की कमी की वजह से हर वर्ष फलों और सब्जियों का 5 से लेकर 13% और अन्य खाद्य पदार्थों का 3 से लेकर 7% तक बर्बाद हो जाता है।

आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन की कमी: कमजोर आपूर्ति श्रृंखला, खराब इन्वेंटरी प्रबंधन और अपर्याप्त वितरण सुविधाएँ अन्न की बर्बादी की सबसे बड़ी वजहों में से एक हैं।

फेंकने की आदत: लोग होटल आदि जाने के दौरान जरुरत से अधिक मात्रा में भोजन ले लेते हैं और बचे हुए भोजन को यूँ ही फेंकने के लिए छोड़ देते हैं। हर दिन अतिरिक्त भोजन पकाने की आदत भी बर्बादी का एक कारण है।

भोजन की बर्बादी से सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं होता है, बल्कि इससे पर्यावरण पर भी भारी दबाव पड़ता है। बर्बाद हुए खाद्य पदार्थों की वजह से भारी मात्रा में निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा कारण हैं।

अन्न और भोजन खाद्य बर्बादी का सबसे अधिक नुकसान उन्हें नहीं होता, जिनमें वास्तव में इसे बर्बाद करने की आदत पड़ चुकी है, बल्कि इसके सबसे अधिक नुकसान की मार उन लोगों को झेलना पड़ती है, जिन तक इसकी पहुँच सुलभ नहीं है और बमुश्किल ही जिन्हें भोजन और अन्न नसीब हो पाता है।

हालाँकि, सतत विकास लक्ष्यों के तहत अन्न और भोजन की बर्बादी को कम करने के लिए सरकार और निजी दोनों ही क्षेत्र साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ महत्वपूर्ण कदम ऐसे भी हैं, जिन्हें अमल में लाना समय की माँग है:

सरकार और निजी कंपनियों द्वारा कोल्ड चेन सुविधाओं का विकास इस दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे फलों और सब्जियों की ताजगी बनी रहती है और बर्बादी कम होती है। वहीं, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के रूप में इन्वेंटरी के प्रबंधन को सुधारने से खाद्य बर्बादी को कम किया जा सकता है। लोगों को जागरूक करना भी भोजन आदि की बेवजह बर्बादी को कम और अंततः खत्म कर सकता है। वे अपनी थाली में उठा ही भोजन लें, या बाजार से खरीदें, जितने की उन्हें जरुरत हो और बचे हुए भोजन को सही तरीके से संग्रहित करें।

किसानों का खून-पसीना हमारे लिए अन्न उपजाने में खर्च होता है। उनकी मेहनत का सम्मान करने और खाद्य बर्बादी को कम करने के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे। यदि हम सभी मिलकर खाद्य बर्बादी को रोकने के लिए कदम उठाएँ, तो हम न सिर्फ अपने देश के किसानों का वाकई सम्मान करेंगे, बल्कि पर्यावरण को भी संरक्षित करेंगे और खाद्य सुरक्षा को भी बढ़ावा दे सकेंगे। इसलिए, अगली बार जब आप भोजन खरीदें या घर पर बनाएँ, तो जरुरत से अधिक मात्रा में खरीदने या पकाने से पहले एक बार विचार जरूर कर लें कि इस अन्न के उपजने से लेकर आपके पास आने तक कितनी मेहनत और समर्पण लगा है।

Share