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मेरी व्यथा.. — एक उद्योगपति की अनकही कहानी

दफ्तर में अकेले बैठे एक उद्योगपति की भावनात्मक तस्वीर

दफ्तर की खामोशी बहुत कुछ कहती है। दिनभर की चहल-पहल के बाद जब कुर्सियाँ खाली हो जाती हैं, कंप्यूटर स्क्रीन्स बंद हो जाती हैं और बालकनी में सन्नाटा फैल जाता है, तब एक उद्योगपति का मन अक्सर सवालों से भर जाता है। क्या यह वही सपना है, जिसे कभी शून्य से शुरू किया था? क्या यह वही संस्थान है, जिसे...

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