किताबी ज्ञान तक सीमित हमारी शिक्षा नीति और इंडस्ट्री के लिए जरुरी कौशल के बीच की खाई भारत के हलचल और महत्वाकांक्षाओं से भरे एक शहर में, आन्या रहती है। आन्या 20-22 साल की एक होनहार बालिका है, जिसने हाल ही में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अब वह एक अच्छी-सी नौकरी चाहती है। पढ़ाई...
Continue reading...Soumya
छात्र उपस्थित, शिक्षक अनुपस्थित
‘बिना शिक्षक के कक्षा’, यह कुछ ऐसा है, जैसे बिना हवा और पानी के हमारी पृथ्वी नई अटेंडेंस: बच्चे! प्रेज़ेंट टीचर.. टीचर! एब्सेंट बच्चों.. बिना शिक्षक के शिक्षा.. कितना अजीब लग रहा है न यह पढ़कर? ज़रा कल्पना करके देखिए एक ऐसे गुरुकुल की, जिसमें कोई गुरु ही न हो और फिर भी शिष्य उस गुरुकुल में शिक्षा या कोई...
Continue reading...हर निवाले की बचत जरुरी….
“भोजन का सही सम्मान उसकी बर्बादी न करके और उसे प्रेम से ग्रहण करके किया जाता है।” भूख हमारे देश की एक बड़ी समस्या है, जिससे आजादी के 78 सालों बाद भी हम पूरी तरह निजात नहीं पा सके हैं। हमारे देश में रोज करीब 20 करोड़ लोग भूखे सोने को मजबूर हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, हर दिन...
Continue reading...बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख
बचपन जीवन का सबसे खूबसूरत दौर होता है। बचपन के वो खेल-खिलौने, वो यार-दोस्त ही तो जीवनभर की मीठी याद बन जाते हैं, जो जीवन के कठिन दौर में भी कभी याद आ जाए, तो मन को थोड़ा सुकून और चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान दे जाती है। लेकिन, बचपन की मासूमियत और उसकी मिठास का एहसास हर किसी के नसीब...
Continue reading...डस्टबिन खा रहा लोगों का खाना
कल दोपहर मैं एक होटल में खाना खाने गया था। मेरी टेबल के पास बैठे कुछ लोग दिखाई दिए, जिन्होंने बहुत सारा खाना मंगवाया था। लेकिन जब वे लोग होटल से गए, तो उनकी प्लेटों में ढेर सारा खाना बचा हुआ था। मेरा दिल बड़ा दुखा, जब मैंने देखा कि वेटर बिना सोचे-समझे उस सारे खाने को कूड़ेदान में फेंक...
Continue reading...अज्ञानी पर ही सदा, करे गरीबी वार…..
क्या आपने कभी सोचा है बचपन में हमें अ से ज्ञ ही क्यों सिखाया गया, ज्ञ को पहले अ को बाद में क्यों नहीं सिखाया गया? दरअसल अ से ज्ञ तक पढ़ना, अज्ञान से ज्ञानी बनाने तक का पूरा सफर है। इस बात को समझने में लोगों की पूरी उम्र निकल जाती है और कई बार उम्र निकलने के बाद...
Continue reading...लोगों का भला भी करते चलें..
जीवन की आपाधापी में ऐसे न जाने कितने ही काम हैं, जो बेशक हमें जिम्मेदारी के साथ करने होते हैं, लेकिन हमारी शान-ओ-शौकत के नीचे कुचलकर वे दम तोड़ देते हैं.. आलिशान बंगले, महँगी गाड़ियाँ, संभाले न संभले ऐसी धन-दौलत, नाम, रुतबा और भी न जाने कितने ही भारी-भरकम शब्द घोंट देते हैं गला उन लोगों का, जिनके जीवन के...
Continue reading...क्या सच में पढ़ाई से ज्यादा जरुरी है शादी?
कुछ समय पहले गुजरात के जामनगर में हुए एक भव्य आयोजन की चर्चा आपने जरूर सुनी होगी। देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के बेटे की प्री-वेडिंग सेरेमनी थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन पर करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हुए। हमारे देश में अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि फलाने की शादी...
Continue reading...भ्रष्टाचार और पेपर लीक
की आग की लपटों में झुलसते छात्र भारत की शिक्षा प्रणाली एक भयानक तूफान के चपेट में आ बैठी है। एक ऐसा तूफान, जो धूल-मिट्टी के रूप में अपने साथ भ्रष्टाचार और पेपर लीक का बवंडर साथ लिए चल रहा है। एक ऐसा तूफान, जो अनगिनत छात्रों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को निगलता ही चला जा रहा है। इन तमाम...
Continue reading...शिक्षक तो पढ़ा रहे हैं,
लेकिन क्या बच्चे सीख भी रहे हैं? शिक्षा का मतलब कभी-भी किसी खाली पात्र में जल भरने तक ही सीमित नहीं रहा है। महान अर्थशास्त्री तथा नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन एवं अभिजीत बनर्जी भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि किसी भी अन्य की तुलना में शिक्षा एकमात्र ऐसा साधन है, जो जीवन के अवसरों में वृद्धि...
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