जीवन की आपाधापी में ऐसे न जाने कितने ही काम हैं, जो बेशक हमें जिम्मेदारी के साथ करने होते हैं, लेकिन हमारी शान-ओ-शौकत के नीचे कुचलकर वे दम तोड़ देते हैं.. आलिशान बंगले, महँगी गाड़ियाँ, संभाले न संभले ऐसी धन-दौलत, नाम, रुतबा और भी न जाने कितने ही भारी-भरकम शब्द घोंट देते हैं गला उन लोगों का, जिनके जीवन के...
Continue reading...Soumya
क्या सच में पढ़ाई से ज्यादा जरुरी है शादी?
कुछ समय पहले गुजरात के जामनगर में हुए एक भव्य आयोजन की चर्चा आपने जरूर सुनी होगी। देश के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के बेटे की प्री-वेडिंग सेरेमनी थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस तीन दिवसीय भव्य आयोजन पर करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च हुए। हमारे देश में अक्सर ऐसी खबरें सुनने में आती हैं कि फलाने की शादी...
Continue reading...भ्रष्टाचार और पेपर लीक
की आग की लपटों में झुलसते छात्र भारत की शिक्षा प्रणाली एक भयानक तूफान के चपेट में आ बैठी है। एक ऐसा तूफान, जो धूल-मिट्टी के रूप में अपने साथ भ्रष्टाचार और पेपर लीक का बवंडर साथ लिए चल रहा है। एक ऐसा तूफान, जो अनगिनत छात्रों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को निगलता ही चला जा रहा है। इन तमाम...
Continue reading...शिक्षक तो पढ़ा रहे हैं,
लेकिन क्या बच्चे सीख भी रहे हैं? शिक्षा का मतलब कभी-भी किसी खाली पात्र में जल भरने तक ही सीमित नहीं रहा है। महान अर्थशास्त्री तथा नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन एवं अभिजीत बनर्जी भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि किसी भी अन्य की तुलना में शिक्षा एकमात्र ऐसा साधन है, जो जीवन के अवसरों में वृद्धि...
Continue reading...तोड़ देगी भारत को गरीबी एक दिन
बात करे हैं कामयाबी की दास्तां सुनाएँ क्या गरीबी की भूखा तरसे खाने के एक निवाले को नमन है भारत के ऐसे विकास निराले कोविभिन्न देशों की स्थिति-परिस्थिति यानि आर्थिक स्थिति को देखते हुए, उन्हें दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है: एक विकसित और एक विकासशील। निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को आमतौर पर विकासशील देश कहा जाता...
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