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वक्त की रफ्तार ने आगे बढ़ाया या पीछे धकेल दिया हमें..

भारत में पुराने और आधुनिक जीवनशैली के बीच का भावनात्मक अंतर दर्शाता दृश्य, जहाँ समय की रफ्तार सोच और सेहत को प्रभावित करती दिखती है

मेरे ज़हन में कई दफा कुछ ऐसे ख्याल पनपते हैं, जो बयाँ करते हैं कि वक्त की रफ्तार वाकई हमारी सोचने की क्षमता और काम की हमारी काबिलियत से काफी तेज है। वक्त का पहिया चलता गया और लोगों के सोचने और समझने का नजरिया भी समान रूप से बदलता चला गया। बहुत-सी परम्पराएँ, कार्यशैलियाँ और विचार ऐसे रहें, जो...

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शिकायत खुद से..

A thoughtful man sitting alone by a window at evening, reflecting on life, responsibility, and inner self

जीवन की आपाधापी में खुद के लिए चंद मिनटों की मोहलत बमुश्किल ही मिली.. एक तरफ दुनियादारी का शौक और दूसरी तरफ जिम्मेदारियों का बोझ, ये दोनों किसी गाड़ी के पहिए के से मेरे जीवन में साथ-साथ ही चले, न ही एक आगे और न ही एक पीछे, बिल्कुल साथ-साथ.. शिकायक करूँ भी तो किससे, सिवाए खुद के? इसलिए शिकायत...

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शादी-ब्याह को चंगुल मानने लगी युवा पीढ़ी की बड़ी आबादी

युवा पुरुष और महिला विवाह को लेकर दबाव और असमंजस की स्थिति में खड़े, समाज में बदलते वैवाहिक नजरिए को दर्शाती तस्वीर

विवाह एक खूबसूरत बंधन है, जहाँ सिर्फ दो व्यक्ति ही नहीं, बल्कि दो परिवार भी मिलते हैं। बेशक, यह एक नैतिक परंपरा रही है, लेकिन धीरे-धीरे नए दौर के बोझ तले दबती जा रही है। एक ऐसा नया दौर, जिसमें शादी का बंधन किसी कैद जैसा जान पड़ने लगा है। एक ऐसा नया दौर, जहाँ अपने ही हमसफर का कुछ...

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जनता को इस बात से फर्क पड़ना चाहिए कि उनका प्रतिनिधि शिक्षित है या नहीं

जनता राजनीतिक नेता से शिक्षा और जवाबदेही की अपेक्षा करती हुई

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और इसकी सफलता इसके नेताओं या राजनीतिज्ञों की शैक्षणिक योग्यता पर निर्भर है। इस मुद्दे पर बहस लाज़मी है कि क्या राजनेताओं के लिए शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य किया जाना चाहिए? वर्ष 2015 में हरियाणा सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षिक मानदंड निर्धारित करते हुए हरियाणा पंचायती राज...

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नीतीश का राजनीतिक चरित्र समझना उन्हें पलटीमार बताने जितना आसान नहीं

भारतीय राजनीति में रणनीतिक नेतृत्व दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य

कुछ ही महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 9वीं बार शपथ लेने वाले नीतीश कुमार, राजधानी पटना में 18 विपक्षी दलों के साथ बीजेपी के खिलाफ पहली बैठक की मेजबानी कर रहे थे। आगामी लोकसभा चुनावों से पूर्व यह पहला मौका था, जब बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी के लिए एक संगठित विपक्ष की चुनौती तैयार हो रही...

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राजनेताओं की शैक्षणिक योग्यता का मुद्दा बहुत गंभीर है: राजनेताओं को शिक्षित होना ही चाहिए

राजनेता की खाली कुर्सी, किताबें और संसद की पृष्ठभूमि वाला प्रतीकात्मक दृश्य

राजनीति में ‘शैक्षिक योग्यता’ तय होना जरूरी क्यों नहीं? कम से कम एक सरकारी अफसर को उचित मार्गदर्शन के लिए साथ रखा जाए काफी समय से इतना सोचने के बाद, आज मैं “हमारे भारत देश के राजनेताओं की शैक्षणिक योग्यता” विषय पर अपने विचार लिखने को तैयार हूँ। हममें से बहुत से लोग इस बात से वास्ता रखते होंगे कि...

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2030 के भारत को केंद्र में रखकर चुने गए 3 राज्यों के मुख्यमंत्री

Minimalistic map highlighting MP, Rajasthan and Chhattisgarh with SDG icons

2030 के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर हुआ एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों का चुनाव तीन राज्यों में हुए हालिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत ने आम जनमानस के साथ दोनों प्रमुख दलों को भी चौंकाने का काम किया, लेकिन इससे भी कहीं अधिक इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के चुनाव ने सत्ता दल के दिग्गज नेताओं...

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‘डर्टी पॉलिटिक्स’ के खेल में बुरे फँसे भारतीय युवा

भारत की प्रगति की भव्य चौखट पर, राजनीति का स्थान हमेशा से ही केंद्र में रहा है। हालाँकि, अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे अक्सर ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ के रूप में वर्णित किया जाता है। घिनौनी राजनीति का यह एक ऐसा टैग बन चुका है, जिसने खुद को हमारी सामूहिक समझ के ताने-बाने में काफी बुरी...

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समावेशिता और प्रतिनिधित्व के आह्वान से ही राजनीति में सशक्त बन सकेंगे भारत के युवा

भारतीय राजनीति में युवा प्रतिनिधित्व और समावेशिता को दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र, संसद और युवा चिन्हों के साथ।

वास्तविक लोकतंत्र का आधार लोकप्रिय संप्रभुता को माना जाता है, जहाँ सरकार को स्वयं लोगों से शक्ति प्राप्त होती है। निर्वाचित अधिकारी तब तक ही अधिकार रखते हैं, जब तक वे नागरिकों की इच्छा और आकाँक्षाओं के अनुरूप होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि वास्तविक रूप से वे लोग सशक्त रहें, जो लोकतंत्र के हित में कार्य करते हैं।...

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लोकतंत्र को आकार देने में युवा मतदाताओं की भूमिका अहम्

भारत के युवा मतदाता मतदान करते हुए और लोकतंत्र को आकार देने में अपनी भूमिका निभाते हुए, पार्लियामेंट और मतदान प्रतीकों के साथ।

भारत में युवा मतदाताओं की भूमिका का बहुत अधिक महत्व है, जो देश में उनकी व्यापक संख्या और लोकतंत्र को गहन रूप से प्रभावित करने की क्षमता से प्रेरित है। एक प्रमुख जनसांख्यिकीय के रूप में, युवा देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही, चुनावी परिणामों, नीतियों और राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।...

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