आपकी सफलता का आकार, आपकी सोच पर निर्भर करता है
लोग अक्सर मानते हैं कि सफलता मेहनत करने से मिलती है। जितनी अधिक हम मेहनत करेंगे, उतनी अधिक सफलता पाएँगे.. आप क्या सोचते हैं? क्या सच में आपको लगता है कि यह सही है? यदि सही है तो कितना सही है? क्या सचमुच सफलता में सिर्फ और सिर्फ मेहनत का ही योगदान होता है??
मुझे नहीं लगता। मेरे विचार में, सफलता बहुत हद तक आपकी सोच पर निर्भर करती है। यदि आपने ठान लिया कि आप सफल होंगे, तो आपको सफल होने से दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं सकती। मैं मानता हूँ कि जितना बड़ा आप सोच सकते हैं, उतनी ही बड़ी सफलता आप अपने नाम कर सकते हैं। आपकी मेहनत से ज्यादा, आपकी सोच आपकी सफलता का आकार तय करती है।
वह कहते हैं न कि जैसा हमारा औरा होता है, वैसा ही हमारे साथ जीवन में होने लगता है। जब हम सोचते हैं कि हम किसी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, तो हमारा मन और शरीर उसी दिशा में काम करने लगते हैं। यह सोचने की शक्ति ही हमें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। कई बार हम देखते हैं कि रात-दिन एक करके सिर्फ और सिर्फ मेहनत करने वाले लोग भी असफल हो जाते हैं। बार-बार कोशिश करने के बाद भी उनके हाथ हार ही लगती है। लेकिन, इससे परे जो लोग अपने लक्ष्य पर विश्वास करते हैं, वे किसी न किसी तरह सफल हो ही जाते हैं।
महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन का जीवंत उदाहरण हम सभी के सामने है। वे हजारों बार असफल हुए, और तब तक नहीं रुके, जब तक उन्होंने बल्ब का आविष्कार नहीं कर दिया। यहाँ मेहनत से अधिक वह सोच काम आई, जो उन्होंने कुछ अलग, सबसे अलग करने के लिए ठान रखी थी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने से भी ऊपर हमेशा अपनी सकारात्मक सोच को रखा। उन्हें विश्वास था कि आज न सही, कल वे सफल जरूर होंगे, और अंततः वे सफल हुए भी। उन्होंने उनकी पीठ पीछे हँसने वाले लोगों की आवाज़ की भनक तक अपने कानों को पड़ने नहीं दी। इसी तरह, कितने ही बड़े-बड़े उद्योगपति, खिलाड़ी और कलाकार भी अपनी सोच के बल-बूते पर ही अपने-अपने क्षेत्र में सफल हुए हैं।
सकारात्मक सोच न सिर्फ आपके आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि आपके आस-पास के वातावरण को भी सकारात्मक बनाती है। जब हम सकारात्मक सोचते हैं, तो हम अपने आप को और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। इसके विपरीत, नकारात्मक सोच हमें डर और असफलता की ओर ले जाती है।
क्या आपने कभी किसी अरबपति को मेहनत करते देखा है? हर मिनट, हर सेकंड में लाखों-करोड़ों रुपए कमाने वाले इन अरबपतियों की कंपनियों के कर्मचारी मेहनत करते हैं। बेशक, सफल कंपनी के साथ-साथ वे भी होते हैं, लेकिन असल में बड़ी सफलता किसके हाथ होती है? बड़ी सोच रखने वाले की। एक अरबपति की सोच, उसकी दृष्टि, दृढ़ता और रणनीति ही उसे दूसरों से अलग बनाती है। उसकी सोच ही उसकी कंपनी को ऊँचाइयों तक ले जाती है। उनके उद्देश्य, संयम, सोच, प्रयास और मेहनत के संयोजन से वे यह मुकाम हासिल कर सके हैं। यह संयोजन बिल्कुल स्वादिष्ट सब्जी की तरह है, जिसमें सभी मसाले उचित मात्रा में डाले जाते हैं। यदि आप सारे मसालों को छोड़कर नमक ही नमक डालते जाएँगे, तो न सिर्फ वह सब्जी बेरंग बनेगी, बल्कि बेस्वाद भी होगी। यहाँ मैं नमक की तुलना मेहनत से करना चाहता हूँ। बिना सोच-विचार के मेहनत ही मेहनत करते चले जाने से हाथ कुछ भी नहीं लगेगा।
यही वजह है कि उद्यमियों के लिए सोच का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक उद्यमी को न सिर्फ अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए, बल्कि अपने कर्मचारियों और समाज को भी प्रेरित करने के बारे में भी सोचना होता है। उद्यमी की सकारात्मक सोच न सिर्फ उसे, बल्कि उसके आसपास के लोगों को भी प्रेरित करने का काम करती है।
एक और उदाहरण से समझाता हूँ, मान लीजिए आप अपने घर के बाहर वाली सड़क पर एक गड्ढा खोदना शुरू कर रहे हैं। आप खूब मेहनत कर रहे हैं और बिना रुके इसे लगातार खोदते ही चले जा रहे हैं, वह भी बिना किसी उद्देश्य के। आप खुद ही बताइए कि इस खुदाई से आपको हासिल क्या होगा? क्या आपको सफलता मिलेगी?? बेशक मिलेगी, आपने एक बड़ा-सा और गहरा गड्ढा खोद दिया है.. आपने सफलता हासिल की है किसी की जान जोखिम में डालने की.. कोई मासूम इंसान या जानवर राह चलते उसमें गिर सकता है, बुरी तरह चोटिल हो सकता है, और बहुत ही ज्यादा गहरा हुआ, तो हो सकता है किस आप किसी बेकसूर की जान लेने में भी सफलता हासिल कर लें.. मैं आपसे ही पूछता हूँ, क्या आप इसे सफलता का नाम देंगे?? ऐसी सफलता आखिर किस काम की, जिसका कोई आधार ही न हो..
मैं यह नहीं कहता कि मेहनत का कोई महत्व ही नहीं है। मेहनत के साथ सोच का संतुलन होना जरूरी है। हाँ, फिर सिर्फ सोचते रहने से भी सफलता नहीं मिल जाती, बल्कि उसके लिए निरंतर प्रयास करना भी बहुत जरुरी है। मेहनत करने से हमारे भीतर धैर्य, अनुशासन और संघर्ष की भावना विकसित होती है। लेकिन, यदि मेहनत के साथ सकारात्मक सोच भी हो, तो सफलता की संभावनाएँ कई गुना बढ़ जाती हैं।
अपनी सोच को विकसित करने के लिए कुछ उपाय हैं। सबसे पहले, अपने जीवन के लिए स्पष्ट और सार्थक लक्ष्य निर्धारित करें। इससे आपकी सोच को एक दिशा मिलेगी और अंततः आप अपने प्रयासों को भी सही दिशा में लगा पाएँगे। नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखकर सकारात्मक विचारों की संगत अपनाएँ। इसके लिए आप प्रेरणादायक किताबें पढ़ सकते हैं, सफल लोगों की जीवन कहानियों से प्रेरणा ले सकते हैं और खुद को प्रेरित रखने के लिए सकारात्मक वातावरण बना सकते हैं।
अपने आप पर विश्वास रखें। आत्मविश्वास सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें और उन्हें पूरा करें। इससे खुद पर आपका विश्वास बढ़ेगा और आप बड़े लक्ष्यों को भी प्राप्त कर सकेंगे। संघर्ष और असफलता को भी अपने जीवन का हिस्सा मानें, क्योंकि असफलता से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें क्या नहीं करना है। यह हमें मजबूत बनाती है। वहीं, संघर्ष के दौरान सबसे अधिक जरुरत होती है सकारात्मक सोच की और उससे सीखकर आगे बढ़ने की।
आप देख सकते हैं कि जो लोग जीवन में सफल हुए हैं, उन्होंने हमेशा बड़े सपने देखे हैं। उनकी सोच ने उन्हें प्रेरित किया और उनकी मेहनत ने उन्हें उन सपनों को साकार करने में मदद की। अब्राहम लिंकन, जो अमेरिका के महान राष्ट्रपति बने, एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने अपनी सोच को बड़ा रखा और लगातार संघर्ष किया, इसी का परिणाम था कि वे एक महान नेता बने। आपकी मेहनत और सकारात्मक सोच का संयोजन ही आपको सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाएगा। इसलिए, मेहनत करें, लेकिन सकारात्मक सोच के साथ। याद रखें, आपकी सोच ही आपकी सफलता का आकार निर्धारित करती है। “सोच बदलो, जीवन बदलेगा” मूलमंत्र को अपनाकर जीवन में हर काम करें और देखिए कि क्या आपको फिर सफल होने से रोकता है।