कठिनाइयों के बीच खड़ी उम्मीद……

शहर की हलचल भरी सड़कों पर, हॉर्न बजाते शोर और तेज़ कदमों की आवाज़ के बीच, हमारे दैनिक जीवन के गुमनाम नायक मौजूद होते हैं। ये लोग, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है और कम ही सराहा जाता है, हमारे शहरी जीवन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। फिर भी, उनकी चुनौतियों और बाधाओं से भरी यात्रा पर शायद ही कभी हमारा उतना ध्यान गया होगा जितने के वे हकदार हैं।

सोचिए, जब हम सुबह की मीठी नींद में होते हैं, तब ये लोग सर्दी, गर्मी या बरसात की परवाह किए बिना सुबह-सवेरे उठ जाते हैं। उनका दिन हमसे बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। जहाँ हमारा दिन शुरू होता है गुनगुनी चाय और ताजे अखबारों के साथ, वहीं उनका दिन शुरू होता है सब्जियों को छाँटने, सामान व्यवस्थित करने और फुटपाथों पर अपने ठेले के लिए एक छोटी-सी जगह ढूँढने के साथ। उनके दिन का पहला संघर्ष वहीं से शुरू हो जाता है, जब उन्हें सड़क के किनारे अपनी छोटी-सी दुकान लगाने के लिए काफी मशक्क्त करना पड़ती है और न सिर्फ आस-पास के दूकान वालों, बल्कि स्थानीय अधिकारियों से भी खरी-खोटी सुनना पड़ती है।

कभी परमिट की झिक-झिक से निपटना, तो कभी मनमाना जुर्माना भरना.. उनकी छोटी-मोटी कमाई को भी निगल जाता है। सुबह सवेरे ही किसी से कभी कहा-सुनी हो जाए, तो पूरा दिन किस चिढ़ में निकलता है, यह हम सब अच्छी तरह जानते हैं। फिर भी, ये लोग सारा दिन एक ही जगह खड़े रहकर, हमें ताज़ा-ताज़ा सब्जियाँ, गर्म-गर्म चाय या फिर चटपटे चाट बड़े ही प्यार से परोसते हैं। उस पर भी हम उनसे भाव-ताव करने में लगे होते हैं। सारा दिन एक ही जगह पर गुजरने के लिए उनके पास न साफ पानी की सुविधा होती है, और न ही शौचालय की। सड़कों के किनारे ही वे अपना ठिकाना बना लेते हैं, जहाँ धूप, धूल और प्रदूषण के बीच वे अपने व्यापार को जैसे-तैसे जिन्दा रखते हैं। लाखों लोगों को सस्ती वस्तुएँ और सेवाएँ प्रदान करने के बावजूद, स्ट्रीट वेंडर अक्सर नीति निर्माताओं और जनता की नज़र में अनदेखे ही रहते हैं।

उनकी मेहनत को नजरअंदाज कर दिया जाता है, उनके व्यापार में लाए गए कौशल और खुबी को तो कभी ठीक से देखा तक नहीं जाता है। चाहे वह सड़क किनारे चाट की दुकान में मसालों की महारत हो या सुंदर गहने तैयार करने की कलाकारी, उनका हर काम एक कला है। उनके लिए उनका व्यवसाय केवल आय का स्रोत नहीं है, बल्कि यह उनकी कला और कौशल को प्रदर्शित करने का भी एक तरीका है। प्रत्येक विक्रेता की एक कहानी होती है.. विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता की कहानी, अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य के सपनों की कहानी और अपने परिवार को चलाने की संघर्षमयी यात्रा की कहानी।

अब समय आ गया है कि इन गुमनाम नायकों की ओर ध्यान दिया जाए। उनके योगदान को मान्यता देना केवल एक स्वीकृति नहीं है; यह सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण का मामला भी है। स्ट्रीट वेंडर्स या सड़क विक्रेता ऐसी नीतियों के पात्र हैं, जो उनके अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें सम्मानजनक परिस्थितियों में काम करने का अवसर दें। कानूनी रूप से उनकी स्थिति को औपचारिक बनाना, जो लाइसेंसिंग और परमिट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान करे, इसमें बहुत महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें मनमाने निष्कासन और जबरन वसूली से सुरक्षा मिल पाएगी। इसके अलावा, बुनियादी सुविधाओं के साथ नामित वेंडिंग जोन बनाने से उनकी कामकाज की परिस्थितियों में सुधार हो पाएगा। इसके अलावा, विक्रेताओं के बीच एकजुटता को बढ़ावा देने से उनकी आवाज बुलंद हो पाएगी और उनकी सौदेबाजी की शक्ति भी मजबूत हो सकेगी। सहकारी समितियाँ और संघ ऋण तक पहुँच, थोक खरीद पर छूट और निष्पक्ष नीतियों की वकालत करने से भी उसकी स्थिति में सुधर आ पाएगा।

जैसे हम अपने शहरों की हलचल भरी सड़कों पर भाग रहे हैं, आइए कभी थोड़ा रुककर इन सड़क विक्रेताओं की मेहनत को भी समझें, जो हमारे जीवन को संवारते हैं। उनकी यात्रा दृढ़ता और आशा, संघर्ष और विजय की यात्रा है। उनके योगदान को पहचानकर और उनकी चुनौतियों का समाधान करके, हम न केवल उनकी गरिमा का सम्मान करेंगे, बल्कि एक अधिक समावेशी और जीवंत समाज को भी बढ़ावा देंगे। आइए, हम एक ऐसे कल का सृजन करें, जहाँ सड़क विक्रेताओं को हमारे शहरी जीवन में महत्वपूर्ण योगदानकर्ताओं माना जाए, जहाँ उनके अधिकारों की रक्षा की हो और उनकी आवाज़ सुनी जाए। साथ मिलकर, हम एक उज्जवल कल के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं, जहाँ प्रत्येक स्ट्रीट वेंडर को फलने-फूलने और चमकने का अवसर मिल पाएगा।

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