पाठ्यक्रम के साथ पाठशाला का रास्ता सुगम होना भी जरुरी

ग्रामीण भारत में स्कूल तक पहुँचने में बच्चों की कठिनाइयाँ

जैसा कि आप सभी जानते हैं, देश की शिक्षा नीति में लगभग 34 वर्ष बाद परिवर्तन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और शैक्षणिक ढाँचे को मजबूत बनाना है। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और छात्र परिणामों पर विशेष बल दिया गया है, जिससे छात्रों के बीच एकाग्रता, सहयोग और रचनात्मकता को बढ़ावा मिल सके और वे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सके।

वैसे तो देश के सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने कई योजनाएँ चला रखी हैं, जिन योजनाओं का लाभ बेशक देश के लाखों बच्चे ले रहे हैं, लेकिन क्या कभी ने इस ओर ध्यान दिया है, कि सुदूर क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों का स्कूल तक पहुँचने का सफर कैसा रहता है? सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए साइकिल तो वितरित कर दी, लेकिन क्या कभी उन रास्तों की ओर ध्यान दिया है, जहाँ से होकर ये बच्चे स्कूल जाते हैं।

दरअसल, कुछ दिनों पहले मैंने अखबार में किसी क्षेत्र विशेष के बारे में पढ़ा, जहाँ बरसात के चलते एक स्कूल में पानी भरने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्कूल से बाहर निकलने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस खबर को पढ़कर मेरे मन ख्याल आया कि इस जैसे ही देश में न जाने कितने स्कूल होंगे, जो बरसात के समय में नदी में तब्दील हो जाते होंगे। कई जगह तो स्कूल तक जाने वाले रास्तों और नदी में कोई अंतर ही नहीं समझ आता है। लेकिन, फिर भी पढ़ने की ललक रखने वाले कुछ विद्यार्थी इन नदियों जैसे रास्तों को पार करके भी स्कूल जाते हैं। लेकिन, इसके बाद भी उनके सामने स्कूल के जर्जर भवन और शिक्षा के बुनियादी ढाँचे का अभाव चुनौती बनकर खड़ा होता है।

अभी कुछ समय पहले जगदलपुर में स्कूल की छत गिरने से कई मासूम बच्चों के घायल होने की खबर चर्चा का विषय रही थी। मेरा मानना है कि बुनियादी ढाँचा निर्विवाद रूप से शैक्षिक विकास की आधारशिला है।

शिक्षा में बुनियादी ढाँचे में व्यवस्थित कक्षाओं, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं और खेल के मैदानों जैसी भौतिक सुविधाओं आदि के साथ ही पानी, बिजली और स्वच्छता जैसी आवश्यक उपयोगिताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।

शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचे का होना बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे असमानताओं को कम किया जा सकेगा और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि प्रत्येक बच्चे को सीखने और सफल होने का समान अवसर मिले। आधुनिक तकनीक और कम्प्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और मल्टीमीडिया टूल जैसे संसाधनों तक पहुँच के साथ ही स्कूलों तक पहुँचने वाले रास्तों का सुगम होना भी आवश्यक है। शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे को अक्सर अपर्याप्त धन, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में असमानताएँ और अपर्याप्त रखरखाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इसलिए देश के सतत विकास के लिए यह जरुरी है कि शैक्षिक परिदृश्य को आकार देने में बुनियादी ढाँचे की परिवर्तनकारी शक्ति को नजरअंदाज न करते हुए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समर्थन करने के साथ ही बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण किया जाए, क्योंकि परिवेश का शिक्षा ग्रहण करने पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

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