मैं कलम हूँ। लोग मुझे अक्सर एक निर्जीव वस्तु मानते हैं, जो न हिल सकती है, न साँस ले सकती है। वे मुझे सिर्फ एक प्लास्टिक की बनी वस्तु समझते हैं, लेकिन हकीकत उनकी सोच से कहीं परे है। मैं क्या कर सकती हूँ, यह वही व्यक्ति समझ सकता है, जिसके विचारों में शक्ति हो और उँगलियों में उन विचारों को पन्ने पर उतारने की ताकत हो। जब कोई मुझे लिखने के लिए उठाता है, तो मैं गहरी साँस लेकर चलने-फिरने के लिए तैयार हो जाती हूँ। मैं एक कोरे कागज को विचारों के माध्यम से अर्थ में बदल देती हूँ।
कलम होने के नाते, मैं अहंकारी स्वभाव से मुक्त हूँ। मैं सस्ती होती हूँ, इसलिए हर कोई मुझे खरीद सकता है। मुझे बहुत खुशी होती है जब कोई व्यक्ति अपने विचारों को मुझसे व्यक्त करता है या किसी को उपहार स्वरूप मुझे देता है। मैं खिल जाती हूँ यह सोचकर कि एक बार फिर मैं कोरे कागज पर विचार बन कर अंकित हो जाऊँगी। मैं हमेशा सच लिखने की कोशिश करती हूँ।
एक टीस है जो बार-बार उठती है दिल पर, जब अदालत में एक न्यायाधीश किसी अपराधी की मौत का कागज पर हस्ताक्षर करता है। वह केवल उस व्यक्ति को नहीं मारता, वह मुझे भी मार देता है। वह उस हस्ताक्षर के साथ ही मुझे वहीं पर तोड़ देता है। मुझे बहुत दुःख होता है, जब भी किसी गलत काम के लिए मुझे उपयोग किया जाता है। मैं तो हमेशा अच्छा और उपयोगी लिखना पसंद करती हूँ। फिर क्यों मेरा गलत इस्तेमाल होता है?
मैं खुद को अभिव्यक्त करने के अनेक तरीकों से परिचित हूँ। एक कवि जब मुझे उठाता है, तो मैं उसके दिल की गहराइयों को कागज पर उतारती हूँ। एक लेखक जब मुझे उठाता है, तो मैं उसकी कहानियों को जीवंत कर देती हूँ। एक पत्रकार जब मुझे उठाता है, तो मैं उसकी रिपोर्ट में जान दाल देती हूँ। मैं हर बार अपने उपयोगकर्ता के विचारों और भावनाओं को बिना किसी भेदभाव के व्यक्त करती हूँ।
मेरे पास भी एक मन है, जो शायद किसी को दिखता नहीं, या फिर यूँ कहूँ कि कोई देखना ही नहीं चाहता। मेरे मन को सबसे बड़ी टीस तब पहुँचती है, जब मेरा उपयोग झूठ, धोखे या अन्याय के लिए किया जाता है। सच कहूँ, मुझे बहुत कष्ट होता है, जब मैं किसी निर्दोष को दोषी साबित करने के लिए उपयोग की जाती हूँ या जब मेरा उपयोग किसी निर्दोष की मौत की सजा के लिए किया जाता है। हाँ, माना कि मैं एक साधारण-सी कलम हूँ, लेकिन मेरे पास सच को उजागर करने और न्याय की आवाज़ को बुलंद करने की शक्ति है।
एक कलम की टीस सिर्फ यही हो सकती है:
“छीन गई मेरी शिनाख़्त मुझसे,
ख़ून-ए-काग़ज़ पर तोड़ा है दम मैंने..”
मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि तब होती है जब मैं किसी की मदद कर पाती हूँ, जब मैं किसी की आवाज़ बन पाती हूँ। मैं चाहती हूँ कि लोग समझें कि मेरे पास सच और न्याय को उजागर करने की शक्ति है। मुझे सच्चाई और ईमानदारी के लिए उपयोग करें न कि झूठ और धोखे के लिए।
मुझे गर्व है कि मैं एक कलम हूँ। मैं गर्व करती हूँ कि मेरे माध्यम से लोग अपने विचार व्यक्त कर पाते हैं और अपनी भावनाओं को साझा कर पाते हैं। मैं हमेशा उम्मीद करती हूँ कि लोग मेरे महत्व को समझें और मुझे सही तरीके से उपयोग करें। आखिरकार, मैं विचारों की शक्ति हूँ, सच्चाई की आवाज़ हूँ और न्याय की प्रतीक हूँ।