भारतीय लोकतंत्र में कोई भी हार अंतिम नहीं होती। यहाँ जनता किसी दल को हमेशा के लिए खारिज नहीं करती, बल्कि समय-समय पर उसे आईना दिखाती है। इतिहास गवाह है कि जो दल इस आईने में खुद को ईमानदारी से देख लेता है, वही दोबारा सत्ता के शिखर तक पहुँचता है। कांग्रेस की 1980 की वापसी हो, तृणमूल कांग्रेस का...
Continue reading...कांग्रेस
1977 से 2026 तक भारत की राजनीति कैसे बदली
जून 1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया, तो उन्होंने अनजाने में भारतीय लोकतंत्र की उस नई नींव की आधारशिला रख दी थी, जिसे आने वाले पाँच दशकों की राजनीति को परिभाषित करना था। 1977 का चुनाव महज एक मतदान नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की बहाली का जनादेश था, जिसने मोरारजी देसाई के रूप में देश को पहला...
Continue reading...