भारत में घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त जातियों की संख्या देश की कुल आबादी की लगभग 10% है, जो अपनी खानाबदोश जीवनशैली के कारण अक्सर सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुविधाओं से वंचित रहते हैं। हाल ही में राजस्थान सरकार ने इन समुदायों के बच्चों के लिए घुमंतू जाति पहचान पत्र जारी किया है, जिससे वे बिना स्थायी दस्तावेजों के भी स्कूलों...
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घुमंतू समाज को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए जरुरी केंद्र व राज्य सरकारों की इच्छाशक्ति
भारत की सांस्कृतिक विविधता में घुमंतू समाज एक अनमोल रत्न की तरह है, जो अपनी अनूठी जीवनशैली और परंपराओं के साथ देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा रहा है। लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से यह समाज, दशकों से अपनी खानाबदोश प्रकृति के कारण मुख्यधारा से कटा हुआ है और आज भी मूलभूत सुविधाओं व अधिकारों से वंचित है। शिक्षा, स्वास्थ्य,...
Continue reading...घुमंतू समाज के नए जीवन का आधार बनेगा राष्ट्रीय स्तर का कॉमन आइडेंटिटी कार्ड
भारत में घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त जातियों की संख्या देश की कुल आबादी की लगभग 10% है, जो अपनी खानाबदोश जीवनशैली के कारण अक्सर सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुविधाओं से वंचित रहते हैं। हाल ही में राजस्थान सरकार ने इन समुदायों के बच्चों के लिए घुमंतू जाति पहचान पत्र जारी किया है, जिससे वे बिना स्थायी दस्तावेजों के भी स्कूलों...
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