क्या आपने कभी सोचा है बचपन में हमें अ से ज्ञ ही क्यों सिखाया गया, ज्ञ को पहले अ को बाद में क्यों नहीं सिखाया गया?
दरअसल अ से ज्ञ तक पढ़ना, अज्ञान से ज्ञानी बनाने तक का पूरा सफर है। इस बात को समझने में लोगों की पूरी उम्र निकल जाती है और कई बार उम्र निकलने के बाद भी कई लोगों को यह बात समझ ही नहीं आती। सही मायनों में देखा जाए तो कलम से बड़ा कोई हथियार नहीं होता। कलम एक ऐसा हथियार है, जो बिना रक्तपात किए गहराई तक वार कर सकता है। इसके द्वारा किया गया प्रहार, तलवार से किए गए प्रहार से कई गुना घातक होता है।
बात जब कलम और ज्ञान की चल रही है, इस पर मुझे कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं, जो मैंने कहीं पढ़ी थीं और वे मेरे ज़हन में बस गई। पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार थीं-
”अज्ञानी पर ही सदा, करे गरीबी वार।
विजयी होता युद्ध में, ज्ञान सदा हथियार।”
इन पंक्तियों को पढ़कर समझ आया कि वास्तव में देश में गरीबी व भुखमरी आदि कई समस्याओं की जड़ अज्ञानता ही है।
हमारे देश में साक्षरता का पैमाना यह है कि कोई भी व्यक्ति जो अपना नाम लिख व पढ़ सकता है, उसे साक्षर मान लिया जाता है। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, क्या साक्षरता को मापने का यह पैमाना सही है? मेरी तरह आप में से कितने लोग यह मानते हैं कि इस पैमाने को बदलने की जरुरत है। मुझे लगता है कि शिक्षा का यह मापदंड सरासर गलत है, क्योंकि एक 3 साल का बच्चा भी अपना नाम लिख-पढ़ सकता है। लेकिन क्या वह बच्चा सही-गलत में फर्क कर सकता है? क्या वह देश की तरक्की में योगदान दे सकता है? नहीं दे सकता….
साक्षरता के मापदंड के अनुसार वह बच्चा साक्षर तो है, लेकिन फिर भी वह देश के विकास में योगदान देने लायक नहीं है। तो फिर हमने यह कैसे मान लिया कि एक व्यक्ति जो सिर्फ अपना नाम लिख व पढ़ सकता है, देश के विकास में योगदान देने में सक्षम है? मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि कोई भी व्यक्ति, जो सिर्फ नाम लिखने-पढ़ने में सक्षम है, वह देश के विकास में योगदान नहीं दे सकता। कुछ एक व्यक्ति, होंगे जो ऐसा करने में सक्षम होंगे। लेकिन साक्षर कहलाने के बाद भी देश के लिए अपना योगदान न दे पाने वाले लोगों का पलड़ा भरी ही रहेगा।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा है बदलाव प्रकृति का नियम है, तो अब समय है साक्षरता के पैमाने को बदलने का, शिक्षा के स्तर में सुधार करने का और बेहतर शिक्षा के द्वार खोलने का…. जैसे एक दीपक अंधकार से भरे कमरे में रोशनी की कई किरणें बिखेरने का साहस रखता है, वैसे ही एक साक्षर व्यक्ति कई लोगों के जीवन में शिक्षा रुपी दीप प्रज्वलित कर गरीबी रुपी अंधकार को मिटा सकता है।
वैसे तो सरकार ने शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएँ जैसे-सब पढ़े-सब बढ़े, प्रौढ़ शिक्षा आदि चला रखी हैं, लेकिन सरकार का काम किस ढ़र्रे पर चलता है, यह बात हम सभी भली-भांति जानते हैं। इसलिए कई ऐसी संस्थाएँ हैं, जो सरकार को सहयोग देने के लिए इस क्षेत्र में अपना योगदान देने आगे आ रही हैं।
व्यक्ति यदि पढ़ा-लिखा होता है, तो वह अपने अच्छे-बुरे और सही-गलत में फर्क करना जानता है। एक अनपढ़ व्यक्ति को कोई भी आसानी से मूर्ख बना सकता है, जबकि पढ़े-लिखे लोगों को कोई भी गलत बात मनवाना आसान नहीं होता। यदि हम देश से असाक्षरता को मिटा देंगे, तो इसके साए में गरीबी और भुखमरी नाम के राक्षस भी इसके साथ ही दम तोड़ देंगे और देश सही मायने में तरक्की की राह पर आगे बढ़ने लगेगा। फिर देश को विकासशील से विकसित देश बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।