जून 1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया, तो उन्होंने अनजाने में भारतीय लोकतंत्र की उस नई नींव की आधारशिला रख दी थी, जिसे आने वाले पाँच दशकों की राजनीति को परिभाषित करना था। 1977 का चुनाव महज एक मतदान नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की बहाली का जनादेश था, जिसने मोरारजी देसाई के रूप में देश को पहला...
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यूपीए का दशक: मनमोहन की मौन सरकार और उपलब्धियों-विवादों की कहानी
भारतीय राजनीति में 2004 से 2014 का दशक एक ऐसा विरोधाभासी और जटिल अध्याय है, जिसका मूल्यांकन एकतरफा नहीं किया जा सकता। एक राजनीतिक रणनीतिकार के चश्मे से देखने पर महसूस होता है कि यह वह ऐतिहासिक दौर था, जब भारत ने इतिहास की सबसे तेज आर्थिक विकास दर दर्ज की और अभूतपूर्व लोक-कल्याणकारी सामाजिक सुधारों की नींव रखी, लेकिन...
Continue reading...इंदिरा से राहुल तक कितनी बदल गई कांग्रेस
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास केवल एक राजनीतिक दल की यात्रा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण और उसकी लोकतांत्रिक चेतना का जीवंत दस्तावेज है। 1885 में अपनी स्थापना से लेकर स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने तक, कांग्रेस देश की राजनीति की धुरी बनी रही। आजादी के बाद के शुरुआती दशकों को यदि कांग्रेस का स्वर्णिम कालखंड कहा जाए, तो...
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